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रवीश जी पूजा जी और पाबला जी का शुक्रिया

आज बड़े दिनों बाद अपना इ-मेल चेक किया तो पूजाजीऔरपाबलाजी ने हमारे ब्लॉग सवासेरशौपर पर जो कमेन्ट और लिंक छोड़ा था उसे पढकर तो हमारा दिल बाग़-बाग़ हो गया।और इसके लिए आप दोनों का शुक्रिया । अपने ब्लॉग का जिक्र अखबार मे पढ़कर हमारा खुशहोनाजायजहै ।

रवीशजीआपकाशुक्रिया जो आपने दैनिकहिन्दुस्तानके ब्लॉग वार्ता मे बड़े ही खूबसूरत अंदाज मे हमारे ब्लॉग के बारे मे लिखा । अपनी मसरूफियत की वजह से हमारा इस ब्लॉग पर लिखना कुछ कम हो गया था पर आज इस ब्लॉग वार्ता को पढ़कर दोबारा जोश आ गया है। :)

तो एक बार फिर से आप लोगों का धन्यवाद।

आज साक्षरता दिवस है पर क्या हम ब्लॉगर साक्षर है ?

आज साक्षरता दिवस है । क्या साक्षरता का मतलब सिर्फ पढना लिखना ही आना है ।नहीं हमे ऐसा नहीं लगता है क्यूंकि हम सब पढ़े-लिखे जो अनपढ़ों की तरह व्यवहार करते है तो क्या हम लोगों को भी साक्षर होने की जरुरत नहीं है।

पूरे देश मे जोर-शोर से साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है। पर क्या आप लोगों को नहीं लगता है कि ब्लॉग जगत मे भी हम सभी को साक्षर होने की आश्यकता है । अब आप लोग कहेंगे कि कमाल है आप कैसी बात कर रही है अगर हम ब्लॉगर पढ़े-लिखे नहीं होते यानी कि साक्षर नहीं होते तो ब्लॉगिंग कैसे करते।

अरे भाई साक्षर होने का मतलब ये तो नहीं होता है कि आप ने किसी को भी खासकर महिलाओं को कुछ भी कहने का अधिकार पा लिया है। ब्लॉगिंग का पिछले २ सालों का इतिहास देखा जाए तो जिस तरह से महिलाओं के लिए अपशब्द इस्तेमाल हुए है वो हमारे साक्षर होने का पुख्ता सबूत देते है ।

हिंदी ब्लॉगिंग के शुरूआती दिनों मे पुराने और जानकार लोग यही कोशिश कर रहे थे कि ज्यादा से ज्यादा लोग हिंदी मे ब्लॉगिंग शुरू करे और जिस तरह अंग्रेजी ब्लॉगिंग से लोग इतने बड़े पैमाने पर जुड़े है उसी तरह लोग हिंदी ब्लॉगिंग से भी जुड़े । और आज हिंदी ब्लॉग…

एक सुन्दर शाम मिनाक्षी और रचना के साथ

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अब यूँ तो दिल्ली मे मिनाक्षीऔररचना से मिले हुए तकरीबन एक महीना हो गया है पर इस पर पोस्ट देर से लिख रहे है क्यूंकि दिल्ली मे रहते हुए कुछ ज्यादा व्यस्त हो गए थे और अब चूँकि हम ईटानगर आ गए है तो सोचा कि इस मुलाकात पर पोस्ट लिखी जाए ।

पिछले ३ साल से हम जब भी दिल्ली जाते है रचनाऔररंजना से से जरुर बात होती थी और मिलने का भी कई बार कार्यक्रम बना पर हम लोग कभी मिल नहीं पाए । हर बार कि तरह इस बार भी जब हम दिल्ली मे थे तो रचना और रंजना से बात की तो पता चला की रंजना तो दिल्ली से बाहर गयी हुई थी पर रचना से बात हुई तो पता चला की मिनाक्षी भी उन दिनों दिल्ली आई हुई थी । तो मिनाक्षी से भी बात हुई और मिलने का कार्यक्रम बना । और मिलने की जगह हमारा घर रक्खा गया और दोपहर बाद यानी ३ -४ बजे का रक्खा गया। पहले इसे ब्लॉगर मीट की तरह रखने की सोची गयी पर जिनके नंबर थे वो या तो busy थे या दिल्ली से बाहर थे और बाकी लोगों से संपर्क नहीं हुआ। हाँ मनविंदर जी ने भी आने को कहा था पर उस दिन उन्हें कुछ काम आ गया था इसलिए वो नहीं आई थी।

खैर हम तीनो ही पहली बार मिल रहे थे ये अलग बात है कि ब्लॉग और फ़ोन से हम लो…

कॉमन वेल्थ गेम्स क्वींस बैटन रिले ( C W G queen's baton relay in itanagar)

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अबचाहेजितनेभीscamहोकॉमनवेल्थगेम्सकोलेकरपरजिसभीराज्यमेक्वींसबैटनआतीहैवोपूराराज्यजोशमेभरजाताहै। अबजैसेजुलाईमेजबक्वींसबैटनयहांआईतोऐसाहीकुछअरुणाचलमेभीहुआथा।

जैसाकिहमसभीकोपताहैकिइससाल३अक्तूबरसेदिल्लीमेकॉमनवेल्थगेम्सहोनेवालेहै
औरइसकेलिएलन्दनसेक्वीनएलिजाबेथ2 नेखिलाड़ियोंकेलिएसन्देशइसबैटनमेभेजाहैऔरइससन्देशको३अक्तूबरकोदिल्लीमेखेलोंकेउदघाटनसमारोहमेपढ़ाजाएगा।क्वीनकेसन्देशकेसाथइसबैटनने२९अक्टूबर२००९मेबकिंघमपैलससेअपनासफ़रशुरूकिया।येबैटन७०देशोंऔरपूरेभारतवर्षमेघूमनेकेबाद३अक्टूबरकोदिल्लीपहुंचेगी।

इसबैटनकेसाथतकरीबन१०-१५लोगोंकीटीमचलतीहै।इसटीमकोजनरलकदीयानलीडकररहेथे।इसबैटनकीखासियतयेहैकिजबइसमेंलाईटजलतीहैतोभारतकेझंडेकातिरंगारंगइसबैटनपरनजरआताहै।जोबहुतहीखूबसूरतलगताहै।दिनमेऔररातमेबैटनबिलकुलअलगलगतीहै।

और२२जुलाईकोकॉमनवेल्थगेम्सकीक्वींसबैटनअरुणाचलप्रदेशकेईटानगरमेआईथी।अरुणाचलप्रदेशदसवांराज्यहैजहाँयेबैटनअपनासफ़रकरतेहुएपहुंचीथी।अरुणाचलप्रदेशकेदोडिस्ट्रिक्टतवांगऔरईटानगर मे इसबैटनकोजानाथा ,पहलेइसेतवांगऔरफिरईटानगरआनाथाऔरइसकेलिएगौहाटीसेइसबैटनकोलेकरहेलीकाप्टरसेतवांगकेलिएलोगरवानाहुएपरभूटानकेआगेमौसमखराबहोनेकेकारणहेलिकॉप्टरवापिस…

ईटानगर मे स्वतंत्रता दिवस समारोह

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कल१५अगस्तकोसारेभारतवर्षकीतरहईटानगरमेभीस्वतंत्रतादिवसकाफीजोशसेमनायागया।हालाँकियहांएकदिनपहलेबारिशहुईथीजिसकीवजहसे१५अगस्तकोमौसमकाफीसुहावनाथा।हाँथोड़ी-थोड़ीबूंदा-बादीहोरहीथीपरउससेलोगोंकेजोशऔरउत्साहमेकोईकमीनहींथी।क्यूंकिलोगछातालगाकरपरेडदेखरहेथे।सुबह -सुबह६जबहमलोगउठेतोदेखासर्किटहाउसमे (हमअभीयहीरहरहेहै) बड़ीचहल-पहलदिखीऔरछोटे-छोटेबच्चेतैयारहोकरइकठ्ठाहोरहेथेपूछनेपरपताचलाकिसभीबच्चेझंडाफहरानेकेलिएइकठ्ठाहोरहेहै।तोसर्किटहाउसवालोंसेपूछनेपरपताचलाकिसातबजेझंडाफहरायाजायेगा।बसफिरहमअपनाकैमरालेकरतैयारहोगएफोटोखींचनेकेलिए।औरठीक७बजेसर्किटहाउसकेजे.इ.नेझंडाफहरायाऔरसभीनेराष्ट्रीयगानभीगायाऔरउसकेबादजे.इ.नेएकछोटासाभाषणभीदियाऔरफिरबच्चोंकोलड्डूऔररसगुल्लेबांटेगए।इसकेबादसाढ़ेआठबजेहमलोगतैयारहोकरइंदिरागाँधीपार्कगएजहाँस्वतंत्रतादिवससमारोहकेलिएलोगजमाहोरहेथे।ठीक९बजेयहांकेमुख्यमंत्रीदोरजीखंडूसमारोहस्थलपरआयेऔरउन्होंनेतिरंगाझंडाफहराया।फिरउन्होंनेपरेडकानिरीक्षणकीया।परेडकेनिरीक्षणकेसमयडी.आई.जी.देओलभीउनकेसाथथी।औरउसकेबादउन्होंनेएकलम्बासाभाषणदियाजिसमेउनकीसरकारक्या-क्याकररहीहैउसकेबारेमेबताया।उसकेबादयहांकेमुख्यसचिवतबमबामनेउनलोगोंकेनामप…

सांसदों और विधायकों को टोल टैक्स देने की जरुरत क्यूँ नहीं ?

हमारे देश के सांसद और विधायक ऐसे है जो देश और जनता के लिए दावा तो कुछ भी करने का करते है पर उनकी जेब से कुछ जाए ये उन्हें मंजूर नहीं है। अरे आप को यकीन नहीं है पर ऐसा ही है। कल मंत्री मंडल की बैठक मे ये निर्णय लिया गया कि अब से सांसदों और विधायकों को टोल टैक्स नहीं देना पड़ेगा ।

अरे पर आखिर ऐसा फैसला लिया क्यूँ गया ?

क्या आम जनता के पास इफरात धन-दौलत है और ये सांसद और विधायक टोल टैक्स देना भी afford नहीं कर
सकते है। जबकि किसी भी राज्य या शहर मे देखे तो गाड़ियों पर अपनी पार्टी के झंडे लगाए ये फर्राटे से घूमते नजर आते है। जहाँसेभीजनताकोलूटनेकामौकामिलभरजाए ,बस ।

जहाँ नेताओं को अपने लिए कुछ भी फैसला लेना होता तो फटाफट सर्व सम्मति से निर्णय ले लिए जाता है।

पर सवाल ये है कि अगर ये सांसद और विधायक टोल टैक्स नहीं देंगे तो फिर आम जनता क्यूँ दे। क्या सारे तरह के टैक्स देने का जिम्मा सिर्फ आम जनता का ही है।

ऐसा भला ये देश के लिए क्या कर रहे है जो इन्हें टोल टैक्स ना देने की छूट दे दी गयी है।

नबोग्रोह मंदिर (navagraha temple)

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आम तौर पर हम गौहाटी सिर्फ फ्लाईट से आने-जाने के लिए ही जाते है पर वहां रुकते नहीं थे। पर मई के शुरू मे हम ३-४ दिन के लिए गौहाटी गए थे तो जाहिर है कि जब ४ दिन रुकेंगे तो गौहाटी घूमेंगे भी। :) जब गेस्ट हाउस वाले से पूछा कि यहां क्या-क्या घूमने की जगह है तो एक सपाट सा उत्तर मिला कि कामख्या के अलावा तो ज्यादा कुछ नहीं है। मार्केट के बारे मे पूछने पर कहा कि बाजार बहुत दूर है । वो तो बाद मे पता चला कि बाजार सिर्फ १०-१२ कि.मी . दूर था जिसे वो लोग बहुत दूर कह रहे थे।
खैर हम लोग के साथ जो सज्जन गए थे उनसे हम लोगों ने एक टूरिस्ट गाइड मंगवाई और गाईड देख कर पता चला कि जैसा लोग कहते है कि यहां कुछ घूमने के लिए नहीं है वो गलत है। सो हम लोगों ने गौहाटी के मंदिरोंकेसाथ-साथगौहाटीकास्टेटम्यूजीयम ,आसामज़ू ,गौहाटीकेमार्केट देखने का कार्यक्रम बनाया ।और गाईड मे एक तरफ पड़ने वाली जगहों को देखने का पूरे दिन का प्रोग्राम बना। तो सबसे पहले नबोग्रोह मंदिर देखने का निश्चित हुआ और अगले दिन सुबह-सुबह हम लोग नबोग्रोह मंदिर के लिए च…

एक-दूसरे पर आक्षेप करना ही क्या ब्लॉगिंग है ?

कितनेअफ़सोसकीबातहैकिहरकुछदिनपरएकहंगामाहोनाब्लॉगजगतकाएकनियमसाबनगयाहै।हरबारहंगामापिछलेहंगामेसेज्यादाबड़ाहोताहै।कभीमहिलाब्लॉगरतोकभीउनकेद्वारालिखेगएलेखोंकोलेकरहंगामाहोजाताहै। औरकलतोहदहीहोगयी।कल हमनेकईदिनबादजबब्लॉग वाणीखोलातोहमकुछचकरासेगएक्यूंकिकईपोस्टेंसमीरजी,ज्ञानजीऔरअनूपजीकेनामकेसाथलिखीदिखी।औरउन्हेंपढ़करअफ़सोसतोहुआसाथहीबहुतदुःखभीहुआ।किआखिरहमलोगकिसतरहकिब्लॉगिंगकररहेहैजिसमेएक-दूसरेपरकीचडउछालनाक्यासहीहै।

जबहमने२००७मेब्लॉगिंगशुरूकीथीतबआजकीतुलनामेब्लोगरजरुरबहुतकमथे (शायद५००-६०० ) परइसतरहकारवैयाकभीएक-दूसरे केलिए नहीं देखाथा।हाँछोटी-मोटीनोक-झोकहोतीरहतीथीजोब्लॉगिंगऔरब्लॉगरदोनोंकेलिएजरुरीऔरअच्छीहोतीथी। परअबइसनोक-झोककास्वरुपबदलताहीजारहाहै। एकदमसीधेएक-दूसरेकेलेखनपर, एक-दूसरेकेव्यक्तित्वपरआक्षेपकरनाक्याहमब्लॉगरकोशोभादेताहै।

हमयेतोनहींजानतेकिइससबकेपीछेअसलीवजहक्याहैऔरजाननाभीनहींचाहेंगेपरइतनाजरुरकहेंगेकि समीरजी ,अनूपजीऔरज्ञानजीतीनोंकीहीअपनीलेखनशैलीहैऔरअपनाअलगअंदाजहैलिखनेकाऔरजिसेहमसभीब्लॉगरपसंदकरतेहैऔरबड़ेचावसेपढ़तेभीहै। औरइनलोगोंकीएक-दूसरेसेतुलनाकरनाठीकनहींहै।

इसतरहकेविवादसेब्लॉगिंगऔरब्लॉगरदोनोंकाहीनुक्सा…

गंगा गोमती ट्रेन का ऐसा हाल

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फरवरी मे हम कुछ दिनों के लिए इलाहाबाद गए थे और वहां से हमने लखनऊ अपनी दीदी के यहां जाने का कार्यक्रम बनाया था। अब इलाहाबाद से लखनऊ जाने के लिए गंगा गोमती ट्रेन ठीक होती है।हालाँकि इस ट्रेन को पकड़ने मे सुबह पूरी बर्बाद हो जाती है। क्यूंकि ६ बजे की ट्रेन के लिए ५ बजे ही उठाना जो पड़ता है। :) और इसमें एक और प्रोब्लम है कि ये ट्रेन प्रयाग स्टेशन पर बस २ मिनट रूकती है जबकि ज्यादा जनता प्रयाग से ही इस ट्रेन मे चढ़ती है ।
तो हम लोगों ने ए.सी.चेयर कार का टिकट बुक किया। और ट्रेन के समय स्टेशन पर पहुँच गए और इंतज़ार करने लगे।उसदिनअपनीकिस्मतहीखराबथी अचानक ही ट्रेन आने से चंद मिनट पहले खूब आंधी और बारिश शुरू हो गयी और जब ट्रेन आई तो पता चला कि ए.सी. वाला कोच एकदम पीछे है। जबकि कुली ने कहा था कि ए.सी.कोच जहाँ हम लोग खड़ेथे , वहीँ आता है।
खैर जब तक हम लोग कोच तक पहुंचे तो ट्रेन ने धीरे-धीरे चलना शुरू कर दिया था । एक तो बारिश ऊपर से चलती हुई ट्रेन और कुली उसी चलती ट्रेन मे सामान चढाने लगा और जो हम लोगों को बैठाने गया था वो बोला दीदी आप लोग चढ़ जाइए । तो हम लोगों ने कहा कि सामान मत चढाओ…

स्मार्ट गार्डनर

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अब आजकल तो सभी जगह गर्मी की बहार सी आई हुई है और यहां भी जब कभी सूरज देवता नजर आते है तो अपने पूरे तेज के साथ नजर आते है यानी कड़क धूप । वैसे यहां पर बारिश मे तो लोग छाता लेकर चलते ही है पर अगर धूप निकली हो तब तो जरुर ही छाता लेकर चलते है। क्यूंकि धूप से बचना भी बहुत जरुरी होता है क्यूंकि यहां बिलकुल झुलसा देने वाली धूप होती है। और वो शायद इसलिए क्यूंकि यहां कोई प्रदुषण नहीं है । धूप के समय हर तरफ रंग-बिरंगी छतरी नजर आती है। :)
यहां पर बागीचे और पार्कों मे काम करने वाली महिलायें भी इस बात का पूरा ध्यान रखती है । यूँ तो ये लोग पूरे दिन काम नहीं करती है बस सुबह के २ घंटे काम करती है और उसके बाद चली जाती है। (अभीतकतोहमनेइतनीदेरहीइन्हेंकामकरतेदेखाहै ) फिर भी ये ख्याल रखती है और अपना धूप से बचाव करती है और इसके लिए वो कैप,छाता,और सिर पर कपडा वगैरा बाँध करके ही काम करती है।ये बहुत अच्छी बात ये है ।

वैसेयहांजोऔरतेंमजदूरीकरतीहैवोभीहमेशाअपनामुंहऔरसिरकपडेसेबांधेरहतीहैधूपऔरधूल-मिटटीसेबचनेकेलिए।

९ बच्चों की मम्मी हमारी मौसी :)

अब बचपन के दिन तो हरेक के जीवन के सबसे सुखद और सुन्दर होते है ,इसमें तो कोई दो राय नहीं है। और बीते हुए दिन जब याद आते है तो कभी-कभी लगता है कि काश वो दिन फिर से दोबारा आ जाए। क्यूँ हम गलत तो नहीं कह रहे है ना। :)

आज अचानक हमे ये किस्सा याद आ गया । बात तो ७० के दशक की है । उस जमाने मे गर्मी की छुट्टियाँ बिताने के लिए कभी हम ननिहाल (फैजाबाद ) कभी ददिहाल (बनारस) या फिर अपनी छोटी मौसी के यहां (वो जहाँ भी रहती थी क्यूंकि मौसाजी का ट्रांसफर होता रहता था ) जातेथे ,कभी ट्रेन से तो कभी कार से । और उस समय अक्सर ऐसा होता था कि अगर मौसी हम लोगों के यहां इलाहाबाद आती थी तो उनके वापिस लौटने पर हम लोग भी कुछ दिन के लिए उनके यहां चले जाते थे। या अगर हम लोग उनके यहां जाते थे तो हम लोगों के वापिस लौटने पर वो लोग हम लोगों के साथ इलाहाबाद आते थे । वैसे ये बड़ा ही रुटीन फीचर था। :)

ऐसी ही एक गर्मी की छुट्टी मे हम चारों बहने मौसी के यहां सीतापुर गए थे और जब कुछ दिन रहने के बाद वहां से इलाहाबादवापिस लौटने लगे तो मौसी भी अपने पाँचों बच्चों के साथ हम लोगों के साथ चली। उस समय मौसी बहुत ज्यादा बड़ी नहीं …

राजीव प्रताप रूडी बन गए है सह -पायलट

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जी हाँ राजनीति के साथ-साथ राजीव प्रताप रूडी अब सह-पायलट भी बन गए है। आजकल वो सह-पायलट की हैसियत से इंडिगो एयर लाईन्स के हवाई जहाज उड़ा रहे है।हैनाचौंकानेवालीबात। कल इंडियन एक्सप्रेस अखबार मे जबहमने ये खबरपढ़ी थी।तोहमभीकुछचौंकगएथे।खैरआपभीखबरपढ़िएऔरउनकीयेफोटोदेखिये । अब ई-पेपर मे तो फोटो नजर नहीं आ रही है इसलिए हम कैमरे से खींच कर यहां लगा दे रहे है। वैसेएकबातहैराजीवरूडीपायलटकीड्रेसमेकाफीस्मार्ट लगरहेहै । क्यूँ ठीक कह रहे है ना। :)

हाय ! जनता के ये नेता है .....

कल भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली मे बढ़ती महंगाई के विरोध मे सरकार के खिलाफ रैली थी जिसमे एक दिन पहले से ही ५ लाख लोगों के जमा होने की आशंका जताई जा रही थी पर शायद ३ लाख लोग इस रैली मे शामिल हुए थे।ऐसान्यूज़मेसुननेकोमिला।

दिल्ली जहाँ आजकल गर्मी का काफी प्रकोप है ऐसे मे दिल्ली मे रैली का होना और फिर उसमे बी.जे.पी.के बड़े-बड़े नेताओं का होना और कार्यकर्ताओं या यूँ कहें की दूसरे शहरों से भर-भर कर बसों मे जो लोग लाये जाते है यानी भारी और अपार भीड़ का जुटना। ऐसा लग रहा था की यू.पी.ए.सरकार की तो शामत ही आ जायेगी इस रैली के साथ ही।

पर जो सोचो वैसा होता कहाँ है । दिल्लीमे सूरज देवता कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो रहे थे जिसके फलस्वरूप बी.जे.पी.के अध्यक्ष गडकरी जी कोचक्करआयाऔरवो बेहोश हो गए । बेचारे गडकरी जी जहाँ सूर्य देव की तपन को बर्दाश्त नहीं कर पाए जबकिवोखुलीगाडीमेचलरहेथेपैदलनहीं। वहीँ आम जनता पैदलचलरहीथी,पूरे-जोश से नारे लगाती घूम रही थी।औरबादमेगडकरीजीको एयरकंडीशंडकारमेउनकेघरलेजायागया।

लगताहैजनताकेनेतासिर्फवातानुकूलितकमरों,गाड़ियों ,घरोंऔरसंसदसदन (चूँकियहांभीए.सी.) मेहीमहंगाईकेखिलाफआवाजउठ…

बारिश बादल और कोहरे की आँख-मिचौली

आजकल दिल्ली और उत्तर भारत मे बहुत ज्यादा गर्मी पड़ रही है । आज सुबह ही बेटे से बात हुई तो उसने कहा कि दिल्ली मे गर्मी के मारे बुरा हाल है ।और उसके ठीक उलट यहां ईटानगर मे बारिश के मारे बुरा हाल है ।यहां भी मार्च के दूसरे हफ्ते मे बहुत गर्मी पड़नी शुरू हो गयी थी पर मार्च के आखिरी हफ्ते से जो बारिश शुरू हुई है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही है । कभी- कभी अचानक ही खूब जोर-जोर से बारिश शुरू हो जाती है तो कभी अचानक बादल या यूँ कहें कि बिलकुल ऐसाघनाकोहरा घिर आता है कि सब कुछ उस बादल और कोहरे की धुंध के पीछे छिप जाता है और चंद क्षणों के बाद ही बादल एकदम छंटने लग जाता है और एक खूबसूरत नजारा दिखता है । :)


और ऐसा नजारा यहां अक्सर क्या रोज ही देखने को मिल रहा है।

इस खूबसूरत नज़ारे का हमने विडियो बनाया है ,आप भी देखिये।



आपलोगगर्मीसेपरेशानहैऔरहमबारिशसे । :)

कब तक इसी तरह अजन्मी बच्चियों को मारते रहेंगे ?

कल न्यूज़ मे देखा कि किस तरह अहमदाबाद मे १५ कन्या भ्रूण कचरे मे मिले।जो बहुत ही शर्मनाक और दुखद है कि आखिर इतनी सारी अजन्मी बच्चियों को मारने से उन माँ-बाप और डॉक्टर को क्या मिला। कितने अफ़सोस कि बात है कि एक तरफ तो देश मे लड़कियों को आगे बढाने की बात की जाती है तो वहीँ दूसरी ओर इस निर्ममता से कन्याओं की हत्या की जाती है।

ऐसे डॉक्टर जो इस तरह के जघन्य अपराध करते है और जिनके लिए पैसा ही सब कुछ होता है उनसे तो उनकी मेडिकल की डिग्री वापिस ले लेनी चाहिए । डॉक्टर जिन्हें भगवान का रूप माना जाता है वही हत्यारे बन जाते है ।जबकि उन्हें डॉक्टर बनने पर शपथ भी दिलाई जाती है कि वो कभी भी कुछ गलत काम नहीं करेंगे । पर रुपया कमाने की लालच मे वो सब कुछ भूल जाते है ।

ऐसे डॉक्टर जिनकी अपनी बेटी भी होती होंगी क्या एक क्षण के लिए भी उनका दिल उन्हें धिक्कारता नहीं है ऐसा करने के लिए। इतनी अजन्मी बच्चियों को मारने से मिला रुपया-पैसा कैसे उन्हें फलता-फूलता है।

८० के दशक मे एक बंगाली फ़िल्म देखी थी कन्या भ्रूण पर आधारित ,और तब लगा था कि लोग किस तरह की मानसिकता के साथ जीते है जहाँ बेटी का जन्म अभिश…

अब इसमें यू.पी.बिहार वाली क्या बात है ?

अरुणाचल प्रदेश मे ज्यादातर बैंक के ए. टी.एम. मे अलग लाईन जैसा कुछ system है शुरू मे ये हमें पता नहीं था। अब वैसे ए.टी.एम मे महिला और पुरुष की अलग लाईन का कोई तुक तो नहीं बनता है ।और कहीं ऐसा देखा भी नहीं था। यहां ए.टी.एम मे कोई भी गेट के बाहर नहीं इंतज़ार करता है बल्कि सभी लोग अन्दर लाईन लगा कर खड़े रहते है ।बिलकुल एक के पीछे एक इतना पास-पास खड़े रहते है कि एक दूसरे का पिन नंबर भी देख सकते है। ये जरुर हमारे पतिदेव ने बताया था। वैसे ए.टी.एम.के बाहर लिखा भी रहता है तो भी हर कोई अन्दर आ जाता है ।

खैर ये जनवरी की बात है जब हम नए-नए थे, एक दिन हम एक बैंक के ए.टी.एम. मे पैसे निकालने गए और चूँकि वहां ३-४ लड़के अन्दर खड़े थे इसलिए हमशराफतमेगेटपरखड़ेहोकरअपनेनंबरकाइंतज़ारकरनेलगे । ए.टी.एमकेअन्दरएकमहिलाभीथीजोकभीए.टी.एम.मशीनकेपासजातीऔरकभीवापिसगेटपरआती ।हमसमझनहींपारहेथेकिआखिरमाजराक्याहै ।फिरउसनेहमसेपूछाकिक्याहमउसकीपैसेनिकालनेमेमददकरदेंगे।तोहमनेहाँकहदिया । तब समझ मे आया कि वो पहली बार पैसे निकालने आई थी।

खैर हम वहीँ खड़े रहे और इंतज़ार करने लगे तभी एक सज्जन आये और अन्दर जाकर जहाँ लड़के लाईन …

अमिताभ बच्चन को लेकर इतनी नाराजगी क्यों ?

कल से सभी न्यूज़ चैनल यही खबर दिखा रहे है की मुंबई के बांद्रा सी लिंक के उदघाटन मे अमिताभ बच्चन कैसे गए और उन्हें किसने बुलाया । अरे भाई अगर चले भी गए तो ऐसा कौन सा पहाड़ टूट पड़ा। आखिर अमिताभ बच्चन का अपना भी तो कोई वजूद है और फिर उन्हें इस सदी का महानायक भी कहा जाता है। तो अगर सदी के महानायक पुल के उदघाटन मे चले गए तो इसमें कांग्रेस को अपना इतना अपमान क्यूँ महसूस हो रहा है।

और फिर जब कांग्रेस के नेता और मंत्री उससे हाथ मिलाने मे जरा भी नहीं सकुचा रहे थे तो फिर बाद मे इस बात से मुकर जाना कि अमिताभ बच्चन को उन्होंने नहीं बुलाया था ,कहाँ की शराफत है।

दुनिया भर मे अमिताभ बच्चन को लोग इतना सम्मान देते है पर अपने ही देश मे इस तरह से अपमान होना ,कहाँ तक सही है।