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Showing posts from April, 2008

ट्राइबल गाँव की आँगन वाडी

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गोवा के ट्राइबल गाँव मे घूमते हुए हम यहां की आंगन वाडी मे गए और आँगन वाडी की साफ-सफ़ाई और बच्चों को ड्रेस मे देख कर अचंभित हुए बिना नही रहे। आम तौर पर आँगन वाडी मे ड्रेस का कोई सिस्टम नही होता है पर इस आँगन वाडी मे इंचार्ज और अभिभावकों ने मिल कर ये ड्रेस का सिस्टम रक्खा है।इस ड्रेस का खर्चा बच्चों के माता-पिता ही करते है। और वहां की इंचार्ज ने बताया की इससे अभिभावकों को भी अच्छा रहता है और बच्चों मे स्कूल जाने की भावना भी आती है।

जब हम लोग यहां पहुंचे तो बच्चे अपने खेल मे मस्त थे।हम लोगों को देख कर पहले टीचर ने और फ़िर बच्चों ने गुड मॉर्निंग कहा। उसके बाद टीचर ने इन बच्चों को एक गाना सुनाने को कहा।औरबच्चोंनेएक्शनकेसाथगानासुनाया।

थोडीदेरआँगनवाडीमेरुकनेकेबादहमलोगवापिसपंजिमकीओरचलपड़े ।

क्या कभी आपने सड़क पर पड़ा रुपया उठाया है ?

आजकल टी.वी. मे किसी pain relief cream शायद iodex का विज्ञापन आता है जिसमे एक आदमी सड़क पर पड़े ५०० के नोट को झुक कर उठा नही पाता है क्यूंकि उसकी कमर मे दर्द है।

इसी विज्ञापन को देख कर हमे एक वाकया याद आया है।उस समय दिल्ली के जिस ऑफिस मे हम काम करते थे ये वाकया ऑफिस मे साथ मे काम करने वाली हमारी एक बहुत अच्छी दोस्तके साथ हुआ था।इस घटना को अब ७ साल तो हो ही चुके है।दिल्ली का एम.ब्लाक मार्केट मंगलवार को बंद रहता है बस खाने-पीने की दुकाने खुली रहती है।और इसलिए वहां मंगलवार को ज्यादा भीड़-भाड़ नही होती थी। एक ऐसे ही मंगलवार को हमारी दोस्त अपनी बेटी के साथ एम.ब्लाक मार्केट के pizza hut मे pizza खाने गई थी।जैसे ही वो कार से उतरकर pizza hut की ओर चली कि उनकी निगाह सड़क पर पड़े ५०० रूपये के नोट पर पड़ी और उन्होंने वो रुपया उठा लिया और अपनी बेटी से हँसते हुए कहा की चलो आज तो अपने पैसे बच गए। आज का pizza तो फ्री मे खाया जायेगा क्यूंकि ये ५०० रूपये का नोट जो मिल गया है।

खैर दोनों माँ-बेटी ने pizza खाया और बिल उसी ५०० रूपये से दिया और खुश होकर बाहर अपनी कार की तरफ़ जैसे ही वो बढ़ी की उनका …

गिल गिल गप्पा

जब से आज तक ने हॉकी फेडरेशन के ज्योतिकुमारन को पैसा लेते हुए दिखाया है तब से सारे देश मे हड़कंप सा मच गया है। अभी तक तो क्रिकेट मे ही घपले होते थे जैसे betting और अब हॉकी की खबर ने लोगों को और भी चौंका दिया है। कैसे खिलाड़ी या एसोसिअशन के लोग देश को इस तरह से हरवा कर रहते है।ज्योतिकुमारन का कहना है कि उसने पैसा ये सोच कर लिया की उसेकिसी बड़े आयोजन के लिए पेशगी दी जा रही है।ज्योतिकुमारन ने ५ लाख मे डील की जिसमे २ लाख तो वो ख़ुद लेते हुए दिखाए गए और बाकी के ३ लाख उन्होंने दिल्ली मे देने को कहा।हॉकीजोकीभारतकाराष्ट्रीयखेलहैउसेसाधारणखेलकीश्रेणीमेकरदियागयाथा।परअबहॉकीकोसाधारण (general) सेहटाकरमुख्य (priority)श्रेणीमेकरदियागयाहै।


हॉकीकोलेकरअबज़ंगछिड़ीहैगिलऔरगिलकेबीच।एम.एस.गिलजोखेलमंत्रीहैउनकाकहनाहैकिके.पी.एस.गिलकोइस्तीफादेदेनाचाहिएवहींके.पी.एस.गिलकाकहनाहैकीएम.एस.गिलकोखेलकेबारेमेक्यापताहै।खेलमंत्रीकेइसबयानपरकीफेडरेशनमेयुवालोगहोनेचाहिएइसपरके.पी.एस.गिलकाकहनाहैकीफेडरेशनमेहीनहीबल्किखेलमंत्रालयमेभीयुवालोगहीहोनेचाहिए। औरजबसवालउनकीउम्रकोलेकरउठायागयातोके.पी.एस.गिलकाकहनाथाकिउम्रउनकेकाम-काजकेआड़े…

बेटियाँ ही बेटे है.

बेटे की चाहत हर दादा-दादी को होती है क्यूंकि बुजुर्गों का मानना है कि वंश तो लड़कों से ही चलता है। और लड़कियां तो पराया धन होती है जो शादी करके दूसरे घर चली जाती है। ३० साल पहले तो आज से भी ज्यादा बेटे की इच्छा लोगों मे होती थी और बेटी का जन्म होना यानी एक और खर्चा माना जाता था। और ये बात ३०-३२ साल पहले की है और दिल्ली के जिस परिवार की हम यहां बात कर रहे है उसमे पति २ भाई है और पत्नी अकेली बेटी है। और इस दंपत्ति के ३ बेटियाँ है ।और जैसा की हर परिवार मे बेटे के चाहत होती है ठीक वैसे ही इस परिवार को भी बेटे की चाहत थी।

शादी के २ साल बाद जब इस दंपत्ति की पहली बेटी पैदा हुई तो सास कुछ ज्यादा खुश तो नही हुई पर निराशा भी नही हुई क्यूंकि एक तो ये पहला बच्चा था और दूसरे सास के दिल मे कहीं ये उम्मीद थी कि हो सकता है की अगली बार बेटा हो जाए।अभी बेटी ढाई साल की हुई ही थी कि उन्होंने एक और बेटी को जन्म दिया। अब दूसरी बेटी के पैदा होने पर सास-ससुर बहुत दुखी हुए । ससुर जी ने तो कुछ नही कहा पर सास एक और बेटी के पैदा होने से बिल्कुल भी खुश नही थी। उन्हें ये लग रहा था की दो लड़कियां हो गई ह…

क्रिकेट,चीयर गर्ल, और भज्जी का चांटा

क्रिकेट जिसे अभी तक तो सभी लोग जेंतिलमैंस गेम कहते आए है पर अब क्रिकेट का रूप बदलता जा रहा है।पहले क्रिकेट मे सिर्फ़ खेल को प्राथमिकता दी जाती थी पर अब खेल को कम मनोरंजन को ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है।अब ६०-७० के दशक मे सिर्फ़ टेस्ट मैच जो ५ दिन तक चलते थे होता थे और सिर्फ़ सर्दियों मे ही होते थे और क्रिकेट के उन ५ दिनों मे लोग सब कुछ भूल जाते थे। धीरे-धीरे५दिवसीयटेस्टमैचकेसाथ-साथवनडेमैचकीशुरुआतहुई। औरलोगोंकोमजाभीआनेलगाक्यूंकिवनडेमेएकहीदिनमेजीत-हारकाफ़ैसलाहोजाता है । औरखेलमेरोमांचभीबनारहताहै। क्रिकेट मे हार जीत तो होती पहले भी होती ही थी पर आजकल तो हार-जीत के साथ-साथ गाली-गलौज होना आम सी बात हो गई है।

और अब वन डे से आगे t20 मैच आ गया । जिसमे वन डे से कहीं ज्यादा रोमांच होता है।और t20 मे एक और नई शुरुआत हुई चीयर गर्ल की जिन्हें बाकायदा विदेशों से लाया गया है पर अभी तक ये समझ नही आया की ये चीयर गर्ल टीम को चीयर करती है या जनता को या वो ख़ुद अपने आप को चीयर करती है । :) क्यूंकि खिलाड़ियों को चीयर करने के लिए तो मैदान मे मौजूद जनता ही काफ़ी होती है और जनता को चीयर करने के …

आख़िर आमिर खान ने अवार्ड ले ही लिया.

आमिर खान और अवार्ड !!
इतने सालों से आमिर खान किसी भी अवार्ड फंक्शन मे ना तो जाते थे और ना ही कोई अवार्ड लेते थे।वो चाहे फ़िल्म फेयर अवार्ड हो या ज़ी सिने अवार्ड हो या फ़िर आई फा अवार्ड ही क्यों ना हो। आमिर ने अपना उसूल बना रखा था इस तरह के अवार्ड फंक्शन से दूर रहने का। परकलआमिरनेअपनेउसूलकोतोड़ा । क्या कहा आपको यकीन नही हो रहा है तो इस लिंक पर क्लिक करिये और ख़ुद देखिये और पढिये ।

और कलआमिरनाकेवलअवार्डफंक्शनमेगएबल्किख़ुदहीअवार्डभीलिया।आमिरखानकोयेस्पेशलअवार्डउनकेहिन्दीसिनेमामेकिएगएयोगदानकेलिएदियागयाहै। कलमुम्बईमेहुएएकसमारोहमेलतामंगेशकरनेमास्टरदीनानाथमंगेशकरअवार्डआमिरखानकोदिया।और अवार्ड लेते हुए आमिर भी खुश ही लग रहे थे।



तुसी ग्रेट हो

तुसी कोलकता की रहने वाली एक बहुत ही आम सी लड़की है। तुसी ने बी.ऐ.पास किया है साथ ही उसने mountaineering institute से भी कोर्स किया हुआ है। तुसी को mountaineering का शौक है और वो माउन्ट एवरेस्ट पर जाना चाहती है। पर चूँकि माउन्ट एवरेस्ट के expedition लिए खर्चा बहुत आता है यही कोई ६-७ लाख रूपये। इसलिए २५ साल की तुसी अंडे बेच कर पैसे इक्कठा कर रही है। पूरी खबर आप इस लिंक पर जाकर पढ़ सकते है।


जिस तरह से तुसी अपने सपने को साकार करने मे लगी हुई है उससे लगता है की अगर मन मे ठान ले तो कोई भी काम मुश्किल नही है।

भारतीय बल्ला भी बोला

IPL को शुरू हुए ५-६ दिन हो चुके है पर जब भी मैच देखो या मैच की झलकियाँ देखो हर समय बस विदेशी ही छक्के और चौवे मारते हुए नजर आते थे। हर मैच मे अपने भारतीय खिलाड़ी १०-२० रन बनाकर आउट हो जाते थे।एक आध छक्के मारे नही की आउट हो जाते थे। बस एक दिल्ली की टीम मे ही अपने भारतीय खिलाडी कुछ कमाल कर पाये है। पहले मैच मे और फ़िर कल अपने दूसरे मैच मे भी दिल्ली की टीम ने बढ़िया प्रदर्शन किया है।

कल तो जैसे सहवाग ने ठान लिया था की बहुत हुआ अब छक्के मारने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट मे उसका नाम लिखा जाना ही है।और जिस तरह से कल सहवाग ने साईमंड के पहले ओवर मे रनों की बरसात की वो इस t20 के मैच मे किसी भारतीय द्वारा पहली बार देखने को मिली।सहवाग ने ४६ बॉल पर ९४ रनों की धुआंधार बल्लेबाजी की थी। कलकीजीतकेबादतोसहवागकाफ़ीजोशमेनजरआरहेहै। अबधोनी,युवराज कब अपनेबल्लेकाकमाल दिखाएँगे इसका अब सभी दर्शकों को इंतजार है।

इसपोस्टकोहमफ़िर४बजेपोस्टकररहेहैक्यूंकिसुबह१२बजेपोस्टकरनेकेबादयेपोस्टकहींदिखनहीरहीथी।

गोवा के एक ट्राइबल गाँव की झलक

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ऐसा नही है की ट्राइबल सिर्फ़ जंगलों मे ही रहते है। अंडमान मे और मध्य प्रदेश मे भी हमने ट्राइबल देखे थे।और अब यहां गोवा मे ट्राइबल को देखने का अवसर मिला। ये ट्राइबल विलेज पंजिम से करीब ५० की.मी .दूर कनकोना के पास कजूर ( cazur ) नाम का छोटा सा गाँव है।जब हम लोग इस गाँव मे पहुंचे तो देखा की एक औरत अपने सिर पर लकड़ी को रखकर बड़े आराम से चली जा रही है।
हालांकि इस गाँव मे पानी के लिए इन सबके घरों मे नल (tap water) नही है। गाँव मे कुआं है ये सब लोग उस कुएं से पानी भरते है। और पूछने पर की कुएं से पानी लाने मे दिक्कत होती होगी तो इनका जवाब था की नही कुआं पास मे ही है। इस गाँव मे महिला मंडल है और आँगनवाडी भी है।यहां के बच्चों को स्कूल के लिए काफ़ी दूर आना पड़ता है। गोवा का ट्राइबल विलेज देख कर खुशी हुई की ये लोग सभ्यता और संस्कृती से अलग नही है। और इसी गाँव मे हमने पहली बार boiled rice कैसे बनाते है उसे देखा।

अब बोएल राइस के बारे मे तो हम सभी ने सुना है और घर मे भी कभी-कभी इस्तेमाल करते है।खास कर फ्राईड राइस के लिए। पर क्या आप जानते है की इसे कैसे बनाते है।नही ना। तो चलिए हम …

हो गई ओलम्पिक मशाल की दौड़

ओलम्पिकमशालऔरतिब्बतियोंकेविरोधकेबीचमेओलम्पिकमशालकाभारतमेआनाऔरसहीसलामतओलम्पिकदौड़काआयोजनहोजानाभारतसरकारइसेएकबड़ीउपलब्धिकेतौरपरमानरहीहै।परक्यावाकईयेओलम्पिकदौड़काआयोजनसफ़लरहाहै।अबयेतोजानकारलोगहीबतापायेंगे।ओलम्पिकमशालकीदौड़केबराबरहीतिब्बतियोंनेभीएकमशालरैलीनिकालीथी।

कलजिसदौड़कोदोपहरएकबजेशुरूहोनाथावोशामको४बजेशुरूहुई।औरउसपरभीइतनीसुरक्षाजितनीतोशायददेशकेप्रधानमंत्रीयाराष्ट्रपतिकीभीनहीहोती।तकरीबन१७०००सुरक्षाकर्मीलगाएगएथे। खैरमशालकीदौड़जबशुरूहुईऔरजोदेखनेकोमिला उसमेंनातोखेलभावनादिखीऔरनाहीलोगोंयाजनतामेइसओलम्पिकमशालकीदौड़कोदेखनेकेलिएकोईउत्साहदिखा।वैसेलोगोंमेअगरउत्साहहोताभीतोबेचारेसिर्फ़सुरक्षाकर्मीकोहीदेखपातेक्यूंकिमशालकोदेखपानातोनामुमकिनहीथा।तीनतरहकासुरक्षाघेराथा।लालऔरकालेरंगकेकपड़ेमेसुरक्षाकर्मीतोसफ़ेदऔरनीलेरंगकेकपडोंमेचीनीऔरबिल्कुलसफ़ेदकपडोंमेतीसरेघेरेकेरूपमेभीसुरक्षाकर्मी।तीन-तीनसुरक्षाघेरेऔरउसपरचीनी (chinese ) लोगतोकिसीकोमशालकेआस-पासभीफटकनेनहीदेते।
कितनेगर्वकीबातहैजिसतरहसेचीनीलोगमशाललेकरदौड़नेवालोंकोinstructionदेरहेथे।किकिसतरहसेमशालकोजलानाहैऔरकिसतरहसेमशालकोपकड़करदौड़नाहै।औरकैसेसीधीलाइनमेदौड़नाहै।जब…

ख़ुद सोचिये कि इसके क्या फायदे है और क्या नुकसान है (डी एडिक्शन)

अंडमान मे डी एडिक्शन के o.p.d.मे जो भी क्लाईंट आते थे वो हमेशा परिवार के कहने पर या उन्ही के साथ ही o.p.d. मे आते थे।क्लाईंट हमेशा इस बात से इनकार करते है कि वो ज्यादा नशा करते है। उनका हमेशा ये तर्क होता और वो इस बात पर भी जोर देते थे कि अगर वो शराब पीते है तो अपने पैसे की पीते है। आख़िर वो कमाते भी तो है।और ऐसे मे काउंसलर उनसे पूछता था की बस ५ कारण बता दो कि शराब पीने से क्या-क्या फायदे है ।और काउंसलर कहता कि आप फायदे बताइये हम उन्हें एक पेपर पर लिखते जायेंगे।

और जब क्लाईंट वो फायदे गिनाना शुरू करता था तो काउंसलर उसे एक पेपर पर लिखता जाता । जैसे कि शराब पीने से आराम मिलता है। तकलीफ दूर हो जाती है।चिंता नही रहती है। और मजा तो आता ही है।

और तब काउंसलर क्लाईंट से पूछता ठीक है ये तो आपने फायदे बताये अब क्या आप जानते है कि शराब पीने के क्या-क्या नुकसान होते है। काउंसलर इस बार का ध्यान रक्खता कि नुकसान भी क्लाईंट ही बताये। और क्लाईंट बड़े ही धीरे-धीरे नुकसान गिनाते जैसे इससे शरीर ख़राब हो जाता है। पेट मे दर्द होता है।घर मे झगडा होता है। भूख कम लगती है। लोगों से मिलना-जु…

क्या धोनी ने सही किया है

धोनी ने कानपुर की पिच बनाने वाले curator शिव कुमार को धन्यवाद दिया की उसने ऐसी पिच बनाई थी जिसकी वजह से इंडिया ने उस मैच मे साउथ अफ्रीका को हरा कर सिरीज एक-एक से बराबर कर ली।धोने ने ना केवल धन्यवाद दिया बल्कि शिव कुमार को १० हजार रूपये भी दिए ।

जहाँ तक pitch curator को धन्यवाद और award देने की बात है तो हमारे ख़याल से तो ये ठीक नही है। ठीक है हर देश अपने यहां की pitch अपने खिलाडियों को ध्यान मे रखकर बनाता है है पर इस तरह से curator को reward देना ।

आप क्या सोचते है।

पेट टोंनवा आएगा

अब बचपन की बातें घूम - फिर कर याद आ ही जाती है।उस समय हम छोटे थे पर खाने के बड़े चोर थे। शाम को खेल कर घर आते तो कई बार खाना खाकर और कई बार बिना खाना खाए ही सो जाते। और जाड़े मे तो ऐसा हम अक्सर करते थे.जहाँ रजाई मे घुसे कि बस पुट से सो गए। मम्मी उठाती तो उठने का नाम ही नही लेते बिल्कुल कुम्भकरण की तरह गहरी नींद मे सो जाते थे।हम तो मजे से सो जाते और मम्मी बेचारी हमे उठाने मे लगी रहती और परेशान भी होती रहती थी।

तो एक दिन शाम को खेल कर आने के बाद हम जैसे ही आंगन मे पडी चारपाई पर सोने के लिए लेटे कि मम्मी आई और प्यार से हमारा सिर पर अपना हाथ फिराते हुए बोली कि कल तुम जब सो गई थी तो पापा ने बताया कि रात मे एक पेट टोंनवा आया था ।
पेट टोंनवा वो क्या होता है।हमने पूछा।
तो मम्मी ने बताया कि ये पेट टोंनवा रात मे आता है और सबके पेट छूकर देखता है कि किसने खाना खाया है और किसने खाना नही खाया है।औरजिसनेखानानहीखायाहोताहैउसेवोअपनेसाथलेजाताहै।
और कल तुमने खाना नही खाया था । इसलिए उसने जब तुम्हारा पेट छुआ तो ये उसे पता चल गया था।
मम्मीकेऐसाकहनेपरहमनेथोड़ाडरकरफ़िरपूछाकितोहमेअपनेसाथनहीलेगया।
मम्मीन…

गोली मार भेजे मे....

ये कल्लू मामा वाला गाना आज के समय मे चारों तरफ़ दिखाई दे रहा है। क्या यू.पी.क्या बिहार,क्या मुम्बई और क्या दिल्ली। बस दो गोली और सामने वाला ढेर।गोली मारने वाले को तसल्ली की उसने अपना हिसाब चुका लिया।

पहले तो हिन्दी फिल्मों मे जितना खून-खराबा देखने को मिलता था उतना तो अब आम जिंदगी मे रोज ही देखने को मिल रहा है। यू.पी.का नोएडा तो जैसे आजकल गोली मारे जाने के लिए ही न्यूज़ मे आ रहा है।तीन दिन पहले ११ बजे रात मे एक एयर होस्टेस की तीन मोटर साइकिल सवार गोली मार कर हत्या कर देते है । अभी ये न्यूज़ ख़त्म भी नही हुई थी की दिल्ली मे गोली मारकर व्यापारी की हत्या करने की ख़बर आ गई।

अभी इन दो गोली मारे जाने की खबर आ ही रही थी की हरियाणा के दस साल के बच्चे की ख़ुद को गोली मारने की खबर आई।तभी दोपहर मे मुजफ्फर नगर मे एक कार मे एक लड़के और लड़की का मृत शरीर मिला और उन दोनों की मौत भी गोली लगने से हुई थी। अब ये हत्या थी या आत्महत्या ये तो पता नही।

कभी आर्मी के तो कभी पुलिस के जवान या तो ख़ुद को गोली मार लेते है या दूसरे को गोली मार देते है।

लगता है गन या पिस्तौल का लाईसेंस मिलना बड़ा आसान हो गया ह…

इतने असंवेदनशील कैसे हो रहे है हम . ...

आज सुबह से एक न्यूज़ आ रही थी जिसमे एक लड़की ने किसी राम कुमार पर रेप का आरोप लगाया । लड़की को सभी न्यूज़ चैनल पर दिखाया जा रहा था जिसमे उस लड़की की दो औरतें चप्पल से पिटाई कर रही थी। और कुछ उसी गली-मोहल्ले के लड़के हंस रहे थे ,ताली बजा रहे थे और यहां तक की नाच भी रहे थे। और इतने पर ही वे लड़कों शांत नही हुए बल्कि उन लड़कों मे से एक लड़के ने तो उस लड़की को पीछे से लात भी मारी ।और ये भी न्यूज़ मे बताया गया की उस लड़की की पिटाई पुलिस के सामने हो रही थी। पर पुलिस ने ना तो इस मार-पीट को रोकने की कोशिश की और ना ही उस लड़की को बचाने की।


आज कल हम इतने असम्वेदन शील कैसे होते जा रहे है ?
तकरीबन हर रोज इस तरह की कोई ना कोई घटना देखने को मिल जाती है।
पहले तो नही पर दोपहर बाद पुलिस ने उन लोगों के ख़िलाफ़ केस रजिस्टर कर लिया है।

राहुल त्यागी ...

कल जब कैबिनेट के मंत्रियों के मंत्रालयों का फेर बदल किया गया तो कुछ नए लोगों को मौका दिया गया है। अब पहले तो ये सुनने मे आ रहा था कि यंग लोगों यानी नवजवान पीढ़ी के नेताओं को मौका मिलेगा पर बाद मे सिर्फ़ दो ज्योतिरादित्य सिंधिया और जतिन प्रसाद को ही मंत्री पद मिला । सचिन पाइलेट का नाम भी सुनाई दे रहा था पर बाद मे सचिन को मंत्री पद नही मिला।और इससे गुर्जर लोग दुखी हो गए है। और फ़िर वही सब बड़े-बुजुर्गों को यानी ६० साल के ऊपर वालों को ही मंत्री बना दिया गया ।

एम.एस.गिल का नाम सुनकर तो एक बार को लगा की हॉकी की नईया डुबाने वाले को कैसे मंत्री बना दिया गया पर बाद मे याद आया कि वो तो के.पी.एस.गिल है।


अब जब नवजवान पीढ़ी के नेता को मौका दिया जा रहा था तो भला राहुल भइया के नाम पर विचार-विमर्श कैसे ना होता। अब मंत्री तो सोनिया अम्मा की मर्जी से ही लोग बनते है ना।पर राहुल ने भी साबित कर दिया की वो सोनिया अम्मा के पुत्र है अरे वहीत्यागकरके । यानी की राहुल ने मंत्री बनने से इनकार कर दिया।लो भाई अब मंत्री बनते तो काम नही करना पड़ता क्या। :) अभी-अभी तो राहुल भइया भारत की खोज पर निकले और खोज पूरी किए…

हीरोइने और उनके ट्रेड-मार्क हेयर स्टाइल :)

अबहैतोयेअजब-गजबशीर्षकपरइसपरलिखनेकाख़्यालएकपुरानीफ़िल्मदेखतेहुएआया।अबआजकेसमयमेतोहरहीरोइनकेकपड़ेऔरहेयरस्टाइलमिलते-जुलतेसेरहतेहै।यहांतककीआजकीनईहीरोइनोंकाडांसकास्टाइलभीबहुतकुछकरीब-करीबएकसाहीहोताहै।

अब६०और७०केदशककीहीरोइनोंकाअपनाएकअलगहीअंदाजयास्टाइलहोताथाबालबनानेका।औरउससमयकीज्यादातरहीरोइनेउनकेहेयरस्टाइलकीवजहसेभीजानीजातीथी।औरहरहेयरस्टाइलपरहरहीरोइनकाअपनाअधिकारहोताथायानीकीट्रेड-मार्क।येहीरोइनेज्यादातरअपनेहेयरस्टाइलकोहीअपनातीथीपरकभी-कभीहेयरस्टाइलबदलभीलेतीथी।औरगौरकरनेकीबातयेहीकीजोहीरोइनेघोसलाबनातीथीउनकाभीअपना-अपनास्टाइलहोताथा।


मधुबाला-- इनकाहेयरस्टाइलचाहेजैसाभीहोपरइनकेचेहरेपरजुल्फेएकअलगअंदाजमेरहतीथी।महल, औरमुग़ल -ऐ- आजम।

साधना -- साधनाकानामयादआताहै।माथेपरआगेकीतरफ़बालछोटे-छोटेकटेहुएजिसेहमेशासाधनाकटनामसेजानागया।आरजू , एकफूलदोमाली।
वहीदा रहमान --सीधीमांगमेबालकटेहोतेथेऔरजुल्फेबिल्कुलमाथेपरचिपकीहुईसीऔरकभीउठीहुई।
।गाईड, प्यासा।
मीनाकुमारी-- गालोंपरजुल्फेंहोना।पाकीजा, कोहिनूर।
शर्मीलाटैगोर -- जोहमेशाबालोंकोएकहुडकीतरहउठाकरचोटीकरतीथी।औरजोचिडियाकाघोसलाकेनामसेजानाजाताथा।वक्त,आराधना।
वैजन्तीमाला-- ज्यादातरलम्बीछो…

गोवा का शिगमोत्सव फेस्टिवल

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गोवामेशनिवार२९मार्चकोशिगमोत्सवफेस्टिवलकाआयोजनकियागयाथा।कार्निवालकीहीतरहशिगमोत्सव मेभीगोवापूरीमस्तीमेडूबजाताहै।परकार्निवालऔरशिगमोत्सवमेबहुतफर्कहै।कार्निवालमेजहाँमौज-मस्तीऔरफनहोताहैऔरउसमेगोवाकीएकवेस्टर्नझलकदिखतीहैतोवहींशिगमोत्सवमेमौज-मस्तीतोरहतीहैपरइसफेस्टिवलमेगोवाकीपारंपरिकऔरधार्मिकझलकदेखनेकोमिलतीहै।शिग्मो की परेड मे ,फैंसी ड्रेस,फ्लोट और डांस सब कार्निवाल से बिल्कुल अलग होते है। येशिग्मोपरेडकरीब४-५घंटेचलतीहै। शाम५.३०बजेशुरूहोकर१०-१०.३०तकख़त्महोतीहै।



शिग्मोमेभीपरेडनिकालीजातीहै।इसमेभी लोग नाचते-गाते हैऔरफ्लोटनिकालतेहै।इसकेअलावाकुछलोगफैंसीड्रेसमेभीरहतेहै।फैंसीड्रेसमेकोईभगवानविष्णुतोकोईनारदबनाथा।तोकोईसाईबाबातोकोईजादू-टोनेवालातांत्रिक।औरकोईमंगलपान्डे।तोकोईरावणबनाथा।औररावणबेस्टलगाथा। पररावणकीफोटोरातहोनेऔरमोबाइलसेखींचीहोनेकेकारणज्यादाक्लीयरनहीहै।रावणनेसीताहरणकोदिखायाथाजिसमेउसनेअपनीपीठ पर गरुणकोलगारक्खाथाऔरसीताकाएकपुतलासाथलेकरचलरहाथा। यहांतककीशिगमोत्सवकीफ्लोटमेभीज्यादातरधार्मिकझलकमिलतीहै। जैसेशिव-पार्वती ,राम-सीता,गणेशजी,हनुमानजीहीफ्लोटकेमुख्यआकर्षणथे। इसशिग्मोमेकोम्पतिशनहोताहैग्रुपडा…

एप्रैल फूल बनाने के मजेदार तरीके

पहली एप्रैल यानी एक-दूसरे को बुद्धू बनाने का दिन है और इस एक दिन का भी अपना ही मजा होता है। अब बचपन मे और बाद मे यूनिवर्सिटी के दिनों मे हम लोग घर मे एक-दूसरे को और स्कूल मे दोस्तों को एप्रैल फूल बनाते थे। धीरे-धीरे बड़े होते गए और अब तो एप्रैल फूल बस एक तारीख की तरह ही आती है और चली जाती है।

अब जब छोटे थे तब घर मे तो एप्रैल फूल बनाने का सबसे आम तरीका होता था फ़ोन का रिसीवर उठाकर दीदी या भइया को कहना की तुम्हारा फ़ोन आया है।और जैसे ही वो फ़ोन पर हेलो बोलते की हम जोर से गाते एप्रैल फूल बनाया ।

स्कूल मे दोस्तों को एप्रैल फूल बनाने मे भी खूब मजा आता था । कभी किसी को कहते की तुम्हे क्लास टीचर ने बुलाया है। तो कभी कोई हमे कहता की तुम्हे इंग्लिश टीचर ने बुलाया है। और ऐसे मे कई बार सच मे भी टीचर बुलाती तो भी लगता था की कहीं हम एप्रैल फूल ना बन जाए।

उफ़ अब तो यादें ही रह गई है एप्रैल फूल की। वो भी क्या दिन थे।अब तो ऐसे मजाक से छोटे बच्चे भी बुद्धू नही बनते है। पर ऐसे ही कल नेट पर सर्फ़ करते हुए मजेदार साईट मिली जिसमे एप्रैल फूल बनाने के कुछ मजेदार तरीके लिखे हुए थे । पहले तो हमे …