Wednesday, April 16, 2008

अंडमान मे डी एडिक्शन के o.p.d.मे जो भी क्लाईंट आते थे वो हमेशा परिवार के कहने पर या उन्ही के साथ ही o.p.d. मे आते थे।क्लाईंट हमेशा इस बात से इनकार करते है कि वो ज्यादा नशा करते है। उनका हमेशा ये तर्क होता और वो इस बात पर भी जोर देते थे कि अगर वो शराब पीते है तो अपने पैसे की पीते है। आख़िर वो कमाते भी तो है।और ऐसे मे काउंसलर उनसे पूछता था की बस ५ कारण बता दो कि शराब पीने से क्या-क्या फायदे है ।और काउंसलर कहता कि आप फायदे बताइये हम उन्हें एक पेपर पर लिखते जायेंगे।

और जब क्लाईंट वो फायदे गिनाना शुरू करता था तो काउंसलर उसे एक पेपर पर लिखता जाता । जैसे कि शराब पीने से आराम मिलता है। तकलीफ दूर हो जाती है।चिंता नही रहती है। और मजा तो आता ही है।

और तब काउंसलर क्लाईंट से पूछता ठीक है ये तो आपने फायदे बताये अब क्या आप जानते है कि शराब पीने के क्या-क्या नुकसान होते है। काउंसलर इस बार का ध्यान रक्खता कि नुकसान भी क्लाईंट ही बताये। और क्लाईंट बड़े ही धीरे-धीरे नुकसान गिनाते जैसे इससे शरीर ख़राब हो जाता है। पेट मे दर्द होता है।घर मे झगडा होता है। भूख कम लगती है। लोगों से मिलना-जुलना ( social interaction) कम होता है।

तब काउंसलर पूछता कि एक दिन मे एक बार की शराब पर आप कितना खर्च करते है। इस का जवाब हर कोई बड़े घुमा फिरा कर देता। और साथ ही वो काउंसलर से भी सवाल करता की इस सवाल को पूछने से क्या फायदा होगा।तब काउंसलर कहते कि घबराइये नही आप बताइये फ़िर हम आपको बताएँगे कि हमने ये सवाल क्यों पूछा है ।

और तब बड़ी मुश्किल वो बताते । तो कोई कहता १०० रुपये रोजाना कहता तो कोई कहता २०० रुपये।

और तब काउंसलर उनके सामने ही १०० रुपये को महीने के तीस दिन से गुना करके यानी ३००० रुपये और फ़िर ३००० रुपये को एक साल के १२ महीने से गुना करते। यानी की ३६००० । और फ़िर पिछले जितने सालों से जैसे अगर ३ साल से वो इतने रुपये की शराब पी रहा है तब ३६००० को ३६ महीने से गुना करके उसके सामने दिखाते थे की पिछले तीन सालों मे उसने तकरीबन एक लाख रुपये शराब पर खर्च कर दिए है ।

और ये एक लाख रुपये शराब पर खर्चा करने से उसे मिला क्या ?
औरin एक लाख रुपयों से वो क्या कर सकता था।

और काउंसलर session का अंत यही पर करता और क्लाईंट को सोचने और इस पर विचार करने के लिए कहता।


अंडमान मे क्लाईंट ज्यादातर chronic ही आते थे इसलिए उन्हें बहुत समय देना होता था ।

5 Comments:

  1. Gyandutt Pandey said...
    डी-एडिक्शन तो समय की जरूरत है। और यह (एडिक्शन) तो सर्वव्यापक हो गया है।
    कुन्नू सिंह said...
    शराब पीने के पांच-पांच फाएदें!! एक फायदा बहुत अच्छा है "खांसी" ठीक हो जाता है।
    Udan Tashtari said...
    और ये एक लाख रुपये शराब पर खर्चा करने से उसे मिला क्या ? और इन एक लाख रुपयों से वो क्या कर सकता था।


    --इतनी व्यापकता से ही जो कोई विचार कर ले तो एडीक्शन/ डी एडीक्शन का सवाल ही खत्म हो जायेगा-फिर आप लिखती क्या आखिर?? :)
    Udan Tashtari said...
    @कुन्नू भाई-

    बाकी के चार भी तो बताओ?? :)
    DR.ANURAG ARYA said...
    आपकी इसी बात पे वो किस्सा याद आ गया जो हमारा दोस्त अक्सर हमे बताता था ..मानसिक रोग विशे शाग है ,आजकल यदा कदा चैनलो मे टिपण्णी करते नजर आते है .....जब उन्होंने ऐसे ही तर्क एक मरीज को दिए(उस रोज वो एक बेहद पुरानी कमीज मे ओ.प.डी मे बैठे हुए थे ) तो मरीज ने कहा ...मेरा तो ठीक है डाक्टर साहब पर आपका १ लाख रुपया कहाँ है ?

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