कौन नही बनना चाहता है इस देश का प्रधान मंत्री.......
चुनावों की घोषणा के साथ ही देश मे एक अजीब से सरगरमी सी आ गई लगती है । अखबार पढिये या चाहे न्यूज़ देखिये हर जगह बस जोड़ तोड़ की राजनीति ही दिखाई दे रही है । कोई एक राजनैतिक दल छोड़कर दूसरे राजनैतिक दल मे जा रहा है तो कोई नई party ही बना रहा है । हर बार जब लोक सभा चुनाव आने वाले होते है तो एक नया (पर अब पुराना ) third front बनता है जिसमे हर वो राजनैतिक दल शामिल होता है जिसे सरकार या opposition से कोई न कोई प्रॉब्लम होती है । पर पिछले दो बार के चुनावों मे ये भी देखा कि जैसे ही चुनावों का नतीजा आता है तो third front पता नही कहाँ चला जाता है । और कुछ - कुछ शोले के असरानी वाले style मे आधे इधर जाओ आधे उधर जाओ और बाकी मेरे पीछे आओ , जैसा हाल हो जाता है । :) खैर एक बार फ़िर third front की आवाज पूरे जोर-शोर से सुनाई दे रही है । और इस third front मे left party जो साढ़े चार साल तो यू.पी.ए.सरकार के साथ रही वो भी शामिल है । लेफ्ट साढ़े चार साल तक लेफ्ट - राईट - सेंटर करती रही पर फ़िर अचानक उनके अन्दर का ओरिजनल लेफ्ट जाग गया और वो यू . पी . ऐ . से...