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कहीं टीम इंडिया की लुटिया फ़िर ना डूब जाए

क्या आपको हमारी बात पर यकीन नही हो रहा है।लीजिये सारी जगह शोर मचा हुआ है। अरे अब ग्रेग के बाद गैरी जो आ गए है । बड़ी मुश्किल से तो टीम इंडिया गुरु ग्रेग के बताये हुए नुस्खों से बाहर निकल पायी और टीम इंडिया मे दुबारा भरोसा बनना शुरू हुआ पर लगता है बी.सी.सी.आई. से टीम इंडिया और भारतीय जनता की खुशी देखी नही जा रही है तभी तो एक नया कोच गैरी क्रिस्टन टीम के लिए रख लिया गया है। एक ग्रेग को रख कर देखा और नतीजा जो हुआ वो सारा भारत क्या सारी दुनिया जानती है कि किस तरह टीम इंडिया विश्व कप मे हारी थी और वो भी बांगला देश के हाथों। पर शायद अभी भी बी.सी.सी.आई को कुछ और ही मंजूर है।तभी तो फ़िर एक बार नया विदेशी कोच लाया गया है। भाई जब भारतीय मैनेजर और कोच टीम इंडिया को सही राह दिखा रहे है तो फ़िर विदेशी कोच की क्या जरुरत है। पर बी . सी . सी . आई और पवार साब को कौन समझाए । पवार साब अपने मंत्रालय की बजाय क्रिकेट मे लगे रहते है।पर क्रिकेट की तरह अगर अपने मंत्रालय पर जरा ध्यान दे तो शायद ज्यादा बेहतर होगा। (क्या पता किसानों का कुछ भला ही हो जाएक्यूंकि लोन माफ़ी मे तो बहुत सारे गड़बड़ घ...

पुनर्जन्म का चक्कर अब टी.वी.सीरियल मे भी

टी.वी.सीरियल की एक बात बहुत अच्छी है कि इसमे दर्शक कुछ भी मिस नही करता है क्यूंकि आप जब भी देखना शुरू करें लगता है कहानी अभी वहीं की वहीं है हाँ बस खलनायक और खलनायिका के जुल्म जरुर बढ़ गए होते है। वो चाहे क्यूंकि ......हो या कहानी घर....हो सलोनी हो...या दुल्हन ...या फ़िर छूना है आस्मान ही क्यों ना हो। अभी कल ही हमने कई दिनों बाद जी टी.वी.देखा तो दुल्हन सीरियल मे कहानी तो कुछ ख़ास नही बढ़ी थी पर हाँ पुनर्जन्म का किस्सा देखने को मिला और हमे हमारी पोस्ट लिखने का विषय भी मिला। टी.वी.के सीरियल मे भी फिल्मी दांव-पेंच देखने को मिलते है। अब जब टी . वी . मे जब नाच - गाना सब कुछ फिल्मी स्टाइल का होने लगा है तो भला पुनर्जम का विषय कैसे छूट जाता। अभी तक तो फिल्मों मे ही पुनर्जन्म दिखाया जाता था पर अब तो टी . वी . के सीरियल मे भी पुनर्जन्म की कहानी दिखाने का चलन होने जा रहा है।पुनर्जन्म पर बनी फिल्में जैसे सुभाष घई की कर्ज और अभी हाल ही मे बनी फरहा खान की ओम शान्ति ओम काफी चली है। अभी तक एकता कपूर के सीरियल मे तथा ...

बेलिबास योगा ( गुरु और रूप अनेक )

योगा जिसे भारत मे सदियों से ऋषि मुनि और साधू संत लोग करते आए है आज देश विदेश मे मशहूर हो रहा है।माना जाता है कि आज कल की भाग दौड़ भरी जिंदगी मे योगा करने से लोग स्वस्थ रहते है।योगा करने के लिए खुले माहौल जैसे बगीचे मे ,नदी या समुन्दर किनारे को सबसे अच्छा माना जाता रहा है। आज कल योगा बहुत ही ज्यादा प्रचलित हो रहा है । हर कोई योग गुरु बन रहा है। २०-२५ साल पहले दूरदर्शन पर भी योगा दिखाया जाता था जिसमे गुरु (सरदारी लाल सहगल) के दो शिष्य एक महिला और एक पुरूष उनके बताये हुए आसान करते थे। और गुरु बताते थे कि किस तरह से आसन करना है और किस आसन से कौन से रोग ठीक होते है वगैरा - वगैरा । कुछ समय बाद धीरेन्द्र ब्रह्मचारी और डॉली जी का कार्यक्रम दूरदर्शन पर आना शुरू हुआ जिसमे डॉली जी लोगों की समस्याएँ पढ़ती थी और धीरेन्द्र ब्रह्मचारी उनका जवाब देते थे और योग के विभिन्न आसान बताते थे। श्री श्री रवि शंकर जी भी योगा और मेडिटेशन और सुदर्शन क्रिया पर जोर देते है। ना केवल देशी बल्कि विदेशी लोग भी बड़ी संख्या मे इनके भक्त है।इनके एक-एक शिविर मे २५ से ३० हजार लोग आते ह...

बजट लो जी फ़िर आ गया

ये फरवरी के आखिरी दिन बजट के लिए ही बने है। हर साल १५ फरवरी बीतते -बीतते हर तरफ़ सिर्फ़ बजट का ही शोर रह जाता है कि इस साल शायद बजट मे जनता के लिए कुछ जबरदस्त होगा पर बजट पेश होने के बाद वही ढाक के तीन पात ।यानी ना तो आम आदमी और ना ही ख़ास आदमी खुश हो पाता है।आम आदमी ताउम्र सिर्फ़ इसी आस मे बिता देता है कि इस बार ना सही अगले साल का बजट जरुर कुछ अच्छा होगा। वो कहते है ना उम्मीद पर दुनिया कायम है । पहले यानी जब पढ़ते थे तब बजट से कोई ख़ास वास्ता नही रहा , हाँ हमेशा ये जरुर सुनते रहे कि इस साल इन्कम टैक्स मे छूट बढेगी या नही।शादी के बाद भी कुछ ऐसा ही सुनने को मिलता रहा कि इस साल इन्कम टैक्स मे छूट बढेगी या नही। एक्स्साइज ड्यूटी घटेगी या बढेगी। घरेलू चीजों, दवाओं के दामों मे कटौती या बढौती।रेल किराया और हवाई जहाज का किराया बढेगा या वही रहेगा।कौन -कौन सी चीजों पर सबसिडी मिलेगी। घर खर्च पर बजट से क्या असर होगा। लोक सभा मे बजट आने के बाद घर का बजट जरुर गड़बड़ा जाता है। उफ़ बाबा हर साल यही होता है जहाँ फरवरी आई हर कोई अपने हिसाब से सोचने लगता है । पर वित्त मंत्री ...

ठाकरे का राज या ....?

आज कल राज ठाकरे की महाराष्ट्र नव निर्माण सेना कुछ अधिक जोश मे नजर आ रही है। पिछले कुछ दिनों से रोज ही किसी ना किसी वजह से समाचारों मे रहती है कहीं तोड़-फोड़,तो कहीं धरना, क्यूंकि अगर ऐसा नही करे तो कहीं लोग उनकी पार्टी को भूल ही ना जाये। राज ठाकरे जब तक बाल ठाकरे के साथ थे तब तक तो काफी ठीक थे पर अब तो उनका और उनकी पार्टी का नाम किसी ना किसी विवाद मे ही आता है। ऐसा लगता है महाराष्ट्र को अगर इन्होने नही बचाया तो महाराष्ट्र तो ख़त्म ही हो जाएगा। जब अमर सिंह ने मुम्बई मे यू.पी.दिवस मनाने की घोषणा की तो ठाकरे ने कहा की वो अमर सिंह को मुम्बई मे घुसने नही देंगे और राज ठाकरे का कहना है की मुम्बई मे उत्तर भारत के लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है जिससे महाराष्ट्र को खतरा है।और राज ठाकरे का गुस्सा इस बात पर भी है की अमिताभ बच्चन जो की यू.पी. के है वो यू.पी. के विकास के लिए तो काम कर रहे है पर महाराष्ट्र के लिए नही। लो भाई एक महा विद्यालय की घोषणा से ही पूरे उत्तर प्रदेश का विकास हो जाये तो क्या बात है । ठाकरे शायद मुम्बई से उन सभी लोगों यानी माइग्रेंट को मुम्बई से बाहर न...

कुएं मे शेर

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क्या आपको यकीन नही आ रहा है की कुएं मे शेर भी हो सकता है तो लीजिये सबूत हाजिर है। :) अब बताइये कुएं और शेर से कुछ याद आया की नही। जी हाँ आप ने बिल्कुल सही समझा हम चालाक खरगोश और शेर की कहानी की ही बात कर रहे है । बचपन मे तो केवल कहानी मे पढ़ा था और अपने बच्चों को भी ये कहानी कई बार सुनाई थी पर शेर को कुएं मे देखने का मौका पहली बार लगा। कुछ पुलिस वाले दिखेंगे जो उस खरगोश को ढूंढ रहे है जिसने इस शेर को कुएं मे गिराया है। :) नोट - इस शेर को कहाँ और किस खरगोश ने गिराया ये तो हम नही जानते है क्यूंकि इस की फोटो खींचने के लिए हम कैमरा लेने जो चले गए थे ।

तारे आस्मां मे

ये खबर तो कल शाम को ही आज तक ने दिखाई थी और आज सुबह जी न्यूज़ और आज तक दोनों चैनल पर ये खबर आ रही थी।तो सोचा आप लोगों तक भी ये खबर पहुंचाई जाये। खबर ये है की दर्शील जिसने तारे जमीं पर मे ईशान की भूमिका निभाई थी उसे अभी हाल ही मे हुए स्टार स्क्रीन अवार्डस मे बेस्ट चाइल्ड ऐक्टर और स्पेशल ज्यूरी अवार्ड का खिताब दिया गया है पर दर्शील का कहना है कि चूँकि वो तारे जमीं पर फिल्म का हीरो है इसलिए उसे बेस्ट ऐक्टर अवार्ड दिया जाना चाहिऐ ना की बेस्ट चाइल्ड ऐक्टर का। दर्शील ने तो यहां तक कह दिया है कि वो ऐसे किसी भी अवार्ड कार्यक्रम मे नही जाएगा जहाँ उसे बतौर चाइल्ड ऐक्टर अवार्ड दिया जाएगा।उसका कहना है कि अवार्ड देना है तो बेस्ट ऐक्टर का दो और नोमिनेशन भी बेस्ट ऐक्टर की श्रेणी मे होना चाहिऐ ना की एक अलग बाल कलाकार की श्रेणी मे ।अभी तक तो शाह रुख खान ही कहते थे आई एम द बेस्ट और अब दर्शील भी यही कह रहे है की वो ही बेस्ट है। अवार्ड से एक और अवार्ड भारत रत्न भी आजकल बहुत चर्चा मे है। अडवानी जी ने अटल बिहारी बाजपेई के नाम की सिफारिश की तो मायावती ने कांशी राम के नाम की तो किसी ने ज्योति बासु त...

जरदारी चले सोनिया की राह

बेनजीर भुट्टो की मौत के बाद पाकिस्तान मे पी.पी.पी. की कमान कौन संभाले पहले तो ये ही निश्चित नही हो पा रहा था। खैर बेनजीर के बेटे बिलावल जरदारी जो कि मात्र उनीस साल के है मतलब अभी बालिग नही हुए है पर उन्हें पी.पी.पी.का अध्यक्ष बना दिया गया है। अध्यक्ष बनने के पहले बिलावल अपने नाम मे भुट्टो नही लगते थे पर अध्यक्ष बनने के बाद से वो अब अपना नाम बिलावल भुट्टो जरदारी लिखने लगे है । अभी हाल ही मे जरदारी ने अपने एक interview मे कहा है कि वो सोनिया गांधी से बहुत प्रभावित है और सोनिया गांधी की तरह ही जरदारी भी अपनी पार्टी को अपना समर्थन और सहयोग देते रहेंगे।मतलब त्याग और बलिदान :) । और अपनी पार्टी के लिए ही वो काम करेंगे पर वो किसी भी पद पर नही रहेंगे।चलिए बाक़ी का interview आप यहां पर क्लिक करके पढ़ सकते है। अब जरदारी सोनिया जैसा बन पाते है या नही या पाकिस्तान मे उन्हें वैसा ही सहयोग मिलेगा जैसा भारत की जनता और नेता सोनिया गांधी को देते है।ये तो समय ही बतायेगा । आपको क्या लगता है ?

ये जीतना भी कोई जीतना है कंगारूओं

आज सिडनी मे खेले गए दूसरे टेस्ट मैच मे ऑस्ट्रेलिया ने टीम इंडिया को हरा कर २-० की बढ़त तो हासिल कर ली है पर क्या ये बढ़त ऑस्ट्रेलिया जैसी चैम्पियन टीम को उसके अच्छे खेल की बदौलत मिली ?शर्म आनी चाहिऐ इन कंगारूओं को जो ऐसी जीत पर खुश हो रहे है। पर अफ़सोस इस बात का है टीम इंडिया ने कोई खास अच्छा प्रदर्शन नही किया। इस मैच को भारत से जीतने के लिए ऑस्ट्रेलिया की टीम ने साम , दाम , दंड , भेद , इन सभी का भरपूर सहारा लिया। फिर वो भले ही ग्यारह की बजाय तेरह खिलाडी ही क्यों न हो ११ खिलाडी +२ एम्पायर बकनर और बेन्सन । एम्पायर भी ऐसे जिन्हें पहले से ही कह दिया गया था की कुछ भी हो जाये बस ऑस्ट्रेलिया के खिलाडियों को आउट नही देना है और भारतीय खिलाडियों को जबरदस्ती ही आउट देना है।वरना symonds जो की ३५-३६ के आस-पास आउट हुए थे उन्हें एम्पायर ने आउट नही दिया और जिसका नतीजा ये हुआ की symonds ने शतक बना लिया था ,वहीं द्रविड़ और गांगुली को गलत आउट दे कर भारत को मैच ही हरवा दिया। तीसरे दिन के खेल के बाद लग रहा था कि भारत ये मैच ड्रा करवा लेगा पर भारत को हार ही मिली। और इसका सबूत तो हम ...

शब्दों का फेर

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आज दोपहर डेढ़ बजे ज़ी न्यूज़ ने एक ताजा खबर दिखाई जिसमे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी बी.जे.पी.के द्वारा की गयी कल की घोषणा पर बोल रहे थे कि बी.जे.पी.को मोदी से खतरा है इसीलिए बी.जे.पी.ने कल लाल कृष्ण अडवानी को प्रधानमंत्री के पद का उम्मीदवार घोषित किया । ज़ी न्यूज़ मे कुछ इस तरह की ताजा खबर दिखाई जा रही थी। जरा गौर फरमाएं। अब बेचारे अडवानी जी प्रधानमंत्री बनते-बनते पीए बन गए। :) चलिए लगे हाथ एक और हिन्दी का नमूना दिखा देते है। ये बोर्ड बंगलोर के टीपू सुलतान के महल के बाहर बने बगीचे मे लगा है। यहां पर अगर हिन्दी गलत है तो एक बार को समझा भी जा सकता है पर ज़ी न्यूज़ पर गलती होना वो अभी ऐसी। पता नही अडवानी जी और बी.जे.पी के लोगों के दिलों पर क्या बीत रही होगी। :)

राखी के नाटक

नच बलिये जो कि स्टार प्लस पर आता है उसमे जब शो शुरू हुआ था तो दस जोडियाँ थी पर हर हफ्ते एक-एक जोड़ी बाहर होती गयी। और अब आख़िर चार जोडियाँ बची है । इस बार के नच बलिये मे राखी सावंत भी भाग ले रही है तो कुछ न कुछ तमाशा तो होना ही था। अब राखी सावंत हो और कोई बात न हो ऐसा कहाँ हो सकता है। राखी सावंत पहले दिन से लोगों का ध्यान अपनी और करने के लिए हर बार कुछ करती है। पहले दिन तो उसने कश्मीरा(वैसे हम न तो कश्मीरा और न ही राखी को पसंद करते है ) के लिए कहा था कि वो नही चाहती है कि राखी शो मे आगे बढे। फिर हर बार नाचने के बाद भी वो कोई न कोई बात जरुर कहती है। यहां तक की एक बार शो के होस्ट हुसैन ने भी कहा था कि आप हर बार कहती है कि ऐसा आपने पहले कभी नही किया है। जबकि सभी जानते है कि वो एक डांसर है और काफी समय से स्टेज शो ( डांस) करती आ रही है और कुछ फिल्मों मे भी डांस किया है । पर फिर भी और हर बार एक नयी बात कहती है। राखी सावंत जो पहले दिन से ही कुछ न कुछ नाटक करती आ रही है नच बलिये मे पहली बार ख़तरे मे आई है । अब राखी सावंत ख़तरे मे हो और वो कुछ न करे ऐ...

वाह रे ड्रेस

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जरा इस ड्रेस पर गौर फरमाइए।कहिये कैसी लगी ये ड्रेस। :) ये सारी ड्रेस चोकलेट से बनी है। और हाँ इन्हें देखने के लिए क्लिक करना न भूले।

ये भी एक खबर है ...

कल यहां गोवा के लोकल अखबार मे ये खबर छपी थी।पर कल हम इसे अपने ब्लोग पर नही लगा पाए थे इसलिए आज इसे पोस्ट कर रहे है। यूं तो ये बड़ी ही अजीबोगरीब खबर है पर फिर भी हमने सोचा की आप लोगों तक इस े पहुंचाया जाये।

प्रशांत बन गए इंडियन आइडल

कल रात दार्जिलिंग के प्रशांत ने शिलोंग के अमित पाल को एस.एम.एस.के जरिये होने वाली वोटों की गिनती मे पीछे छोड़ दिया और सिपोय प्रशांत बन गए तीसरे इंडियन आइडल। सात करोड़ वोट बाप रे ऐसा लगता है की लोग सारे काम-धंधे छोड़ कर सिर्फ एस.एम.एस ही करने मे लगे थे। जहाँ तक हमे याद है इतने ज्यादा वोट तो हिंदुस्तान की जनता ने ताज महल के लिए भी नही किया था।यहां देश से बड़ा राज्य हो गया लगता है क्यूंकि जिस तरह से दार्जिलिंग और शिलोंग के लोगों ने वोट किया है ये सात करोड़ वोट यही सच्चाई बताते है। पर ज़ी के शो सा.रे.गा.मा.पा. के विश्व युद्ध से छत्तीसगढ़ की सुमेधा शो से बाहर हो गयी इसलिये नही की वो खराब गाती थी ( वो सबसे अच्छा गाती थी) बल्कि इसलिये बाहर हो गयी क्यूंकि उन्हें छत्तीसगढ़ से वोट नही मिले और जैसा की उनके पिता ने कहा की छत्तीसगढ़ मे ६५ जगहों पर ज़ी टी.वी.नही आता है और लोग नही जानते है की ज़ी पर ऐसा कोई शो हो रहा है। हारने या जीतने पर लोग देश की जनता का नही अपने प्रदेश की जनता को ही श्रेय देते है। पर कोई ये तो बताये की आख़िर वो टॉप फाइव तक कैसे पहुंची ? वैसे एस.एम.एस करने की जैसी दीवा...

राम का नाम बदनाम ना करो

ये पंक्तियाँ देव आनंद की फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा के गाने की है जो उस समय उस फिल्म मे तो हिप्पियों के संदर्भ मे गाया गया था पर आज राम सेतु विवाद को पढ़-सुनकर भी यही कहने को मन कहता है। राम का अस्तित्त्व था या नही ये बहस अभी और ना जाने कितने दिन चलेगी। पर क्या ऐसा कह देने भर से राम का अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा। और बहस चले भी क्यों ना आख़िर राजनीति मे तो हर कुछ जायज है।क्यूंकि सरकार और विरोधी पक्ष का यही तो काम है लोगों की भावनाओं से खेलना। जब देखो तब एक शगूफा छोड़ देती है। अगर सरकार चाहेगी तो राम सेतु की जगह सेतुसमुन्द्रम शुरू होकर ही रहेगा चाहे कोई कुछ भी कहता रहे। आजकल तो हर कोई राम के अस्तित्व को नकार सा रहा है। कल करूणानिधि और शरद यादव भी ऐसी ही कुछ बातें कर रहे थे।पर आख़िर राम के अस्तित्व पर इतना ज्यादा विवाद होना कहां तक तर्क संगत है। क्या लोगों की भावनाओं की कोई कीमत नही है। राम थे या नही ये कौन निर्धारित करेगा ? ये नेता जिनमे से आधे से ज्यादा लोगों के नाम मे कहीँ ना कहीँ राम शब्द आता है।और नवरात्रि हो या दशहरा हो ये नेता राम की पूजा करते हुए ही दिखते है। क्यों? जब राम ही नही तो...

गर्दिश मे सितारे

आज तो मुकेश का गाया हुआ गाना याद आ गया गर्दिश मे हों तारे , ना घबराना प्यारे आजकल फिल्म इंडस्ट्री की हालत कुछ ऐसी ही हो रही है जिसके तारे और सितारे दोनो ही गर्दिश मे है।इंडस्ट्री के तारे इसलिये गर्दिश मे है क्यूंकि ज्यादातर फ़िल्में फ्लॉप हो जाती है और सितारे गर्दिश मे है ये तो हम सभी जानते है मतलब जहाँ कभी संजय दत्त जेल के अन्दर जाते है तो कभी सलमान खान । खैर संजय दत्त तो फिलहाल जेल से बाहर आ गए है पर सलमान खान कितने दिन जेल मे रहेंगे ,ये कहना मुश्किल है। संजय दत्त तो तेईस दिन मे जेल से बाहर आ गए पर सलमान खान का तो फिलहाल कोई सीन नजर नही आ रहा है।बाक़ी तो ऊपर वाला जाने। सितारों के जेल जाने मे निर्माता का तो जो नुकसान होता है वो अब २-४ करोड़ नही बल्कि १००-२०० करोड़ का होता है। अब वो क्या है ना की आजकल लाखों मे तो कोई फिल्म बनती ही नही है।वो भी इतने बडे सितारों के साथ तो छोटी-मोती फिल्म बनना नामुमकिन है। मामूली से मामूली पिटे हुए निर्माता अतुल अग्निहोत्री जैसे जब २० करोड़ की फिल्म बना सकते है तो बडे निर्माताओं का क्या कहना। अब अगर संजय दत्त पर फिल्म वालों का ५०-६...

बैंकों के चोंचले और ग्राहक की मुसीबत

कभी -कभी अपने ही रूपये-पैसे के लिए बैंक को इतना हिसाब देना पड़ता है कि लगता है आख़िर ये बैंक हमारी सुविधा के लिए है या परेशानी खड़े करने के लिए। आजकल तो अगर बैंक से किसी तरह की जानकारी अगर फ़ोन पर हासिल करना हो तो समझ लीजिये कि आप का कम से कम आधा घंटा तो गया और उसपर भी अगर पूरी जानकारी मिल जाये तब तो जरुर आपका दिन और समय अच्छा है। कुछ सालों पहले तक तो ऐसा नही था हर जानकारी फ़ोन पर मिल जाती थी और ऐसा बैंक दावा भी करता था। और दावा सही भी था पर आजकल ऐसा दावा ग्राहक के लिए मुसीबत बन कर आता है। ये मल्टी - नेशनल बैंक तो इसकी जीती जागती तस्वीर है। अब आप ये भी कह सकते है कि भाई मल्टी नेशनल मे खाता ही क्यों खोला जब अपने नेशनल बैंक है। तो हम ये बता दे कि एम.एन .सी.मे खाता उस समय खोला था जब ये बैंक नए-नए थे और उस समय अपने नेशनल बैंकों मे ए.टी.एम.की सुविधा नही थी और हर बार पैसा लेने और जमा करने के लिए लाइन मे खड़ा होना पड़ता था जो इन एम.एन.सी.बैंकों मे नही था । और दूसरे ए.टी.एम.मे समय की पाबंदी नही होती है कि दो बजे के बाद पैसा ही नही निकाल सकते ,जब चाहे जहाँ चाहे पैसा निकाल सकते है। हमे...

हम भी बच गए बाल-बाल

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१४ अगस्त को जब नोकिया ने ये सूचना जारी की कि जिन मोबाइल फ़ोन मे bl-5c.बैटरी है उन्हें चार्ज करने पर फटने का खतरा है। तो जाहिर है नोकिया फ़ोन इस्तेमाल करने वाला हर व्यक्ति घबरा गया तो भला हम कैसे इस से बच सकते थे। टी.वी.पर शाम को ही ये खबर हर चैनल ब्रेकिंग न्यूज़ कह कर दिखा रहा था। हमने भी न्यूज़ देखी और फौरन अपने बेटे और पतिदेव को अपने-अपने मोबाइल की बैटरी चेक करने को कही। गनीमत है कि उन लोगों के नोकिया फ़ोन मे bl-5c.बैटरी नही थी। ऐसा सुनकर हम निश्चिंत हो गए की चलो बला टली। कहीँ आप ये तो नही सोच रहे कि जब कुछ हुआ ही नही तब है तब हम भी बच गए का क्या मतलब। बताते है बताते है। वो क्या है ना की हमने सबसे तो कह दिया की अपने फ़ोन की बैटरी चेक करो पर खुद अपने ही फ़ोन क ी बैटरी चेक नही की थी। असल मे हम goa का नंबर इस्तेमाल कर रहे है और हमारे सिम कार्ड मे कुछ प्रॉब्लम आ गयी थी तो हमने अपना सिम कार्ड goa भेजा हुआ था ।अब ये मत कहिये कि भाई इतने से काम के लिए कार्ड को goa क्यूँ भेजा। तो वो इसलिये कि यहां पर सब कहते है कि जहाँ का कार्ड है वहीँ से ठीक कराइये। और चूंकि इधर पिछले एक हफ्...

स्वतन्त्रता दिवस यानी आजादी

स्वतंत्रता = आजादी(फ्रीडम) दिवस = दिन स्वतंत्रता दिवस अर्थात आजादी का दिन । इन दो शब्दों के महत्त्व को हर कोई जानता है और समझता है। पर हरेक के लिए आजादी का अर्थ शायद अलग -अलग हो सकता है। पर यहां हम कोई और नही अपने देश की आजादी की ही बात कर रहे है। कल देश को आजाद हुए पूरे साठ साल हो जायेंगे। पर इन पिछले साठ सालों मे देश ने कहीं विकास किया है तो कहीं पहले की तरह ही पिछड़ा हुआ है।पिछले साठ सालों मे बहुत कुछ बदला है और आजादी का अर्थ भी अब कुछ बदलता सा लग रहा है। जब हम लोग छोटे थे तो स्वतंत्रता दिवस का मतलब होता था स्कूल मे पन्द्रह अगस्त को ध्वजारोहन ,परेड,देशभक्ति के गीत ,कई बार खेल प्रतियोगिताएं भी होती थी। और इस सब तैयारी के लिए सारा स्कूल जुटा रहता था। जहाँ देखो बस हर तरफ लोग प्रैक्टिस करते ही नजर आते थे ,पी.टी.टीचर खुले मैदान मे बच्चों को अभ्यास कराते तो music टीचर बच्चों को गाने की प्रैक्टिस कराती तो किसी और क्लास रूम मे टीचर डान्स की प्रैक्टिस कराती होती थी। कुछ बच्चे फैंसी ड्रेस की तैयारी करते थे। हर किसी को १५ अगस्त की सुबह का इन्तजार रहता और हर कोई समय से पहले ही (वो बच्चे भी जो द...

महँगाई के बदलते तेवर

पहले जब हम लोग छोटे थे और जब कभी पापा मम्मी या बाबूजी को हम लोग ये कहते सुनते थे की अरे आजकल महँगाई बहुत बढ गयी है। हम लोगों के ज़माने मे तो बहुत सस्ता था । तो ये सुनकर कुछ समझ नही आता था की भला इतना भी क्या महंगा और सस्ता हो गया । तो कई बार हम लोग उनसे पूछते थे कि आख़िर आप लोगों के समय मे हर चीज इतनी सस्ती कैसे थी तो बाबूजी कहते की जैसे उस ज़माने मे देसी घी बहुत सस्ता होता था शायद एक- दो रूपये किलो तो हम लोगों को विश्वास नही होता था कि घी और वो भी देसी घी भला इतना सस्ता कैसे हो सकता है।पर अब जब हम सोचते है तो लगता है कि वाकई हमारे देखते-देखते महँगाई के तेवर कितने बदले-बदले से है आज।पहले जिन बातों पर विश्वास नही होता था अब उन पर यकीन आने लगा है कि हाँ फलां साल (अस्सी और नब्बे के दशक )मे सब चीजे कितनी सस्ती होती थी। और अब कैसे हर चीज के दाम आसमान छूने लगे है।। बाबूजी तो अक्सर कहते थे कि तुम लोग तो नकली देसी घी खा कर बडे हो रहे हो हम लोगों ने तो खालिस देसी घी ही खाया है।वैसे पहले तो घरों मे सब्जी या मीट देसी घी मे ही बनाया जाता था । आज की तरह refind oil मे नही। पर कमाल की बात ...