Wednesday, November 7, 2007
कल यहां गोवा के लोकल अखबार मे ये खबर छपी थी।पर कल हम इसे अपने ब्लोग पर नही लगा पाए थे इसलिए आज इसे पोस्ट कर रहे है। यूं तो ये बड़ी ही अजीबोगरीब खबर है पर फिर भी हमने सोचा की आप लोगों तक इसे पहुंचाया जाये।
Labels: ख़बरों की खबर, व्यंग्यात्मक
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घुघूती बासूती
नीरज जी सही कहा है आपने।
फिर तो बाँसुरी कैसे बजेगी जब बाँस ही नहीं होगा...
या एक दूसरा रास्ता भी है जो धर्म परिवर्तन की राह से हो कर गुज़रता है