कल यहां गोवा के लोकल अखबार मे ये खबर छपी थी।पर कल हम इसे अपने ब्लोग पर नही लगा पाए थे इसलिए आज इसे पोस्ट कर रहे है। यूं तो ये बड़ी ही अजीबोगरीब खबर है पर फिर भी हमने सोचा की आप लोगों तक इसे पहुंचाया जाये।
वाकई, सोचने वाला रिपोर्टर चाहिये, उसे अपने आस-पास ही इतनी खबर मिल जायेंगी कि उसे घूमने-फिरने की जरुरत ही नही पडेगी। वैसे भी जब धोनी के हेयर स्टाईल की खबर--और फिर बडे बाल कटने की खबर--हो सकती है तो एक आम आदमी पर बाल काटने पर जेब भारी करने की भी खबर हो सकती है।
आप लोग भी सोच रहे होंगे कि हम भी कहाँ सुबह-सुबह चमगादड़ (bats)की बात ले बैठे है । पर क्या करें । यहाँ गोवा मे इन सब जीवों से फ़िर से मुलाकात जो हो गई है । :) अब है तो ये सवाल थोड़ा बेतुका पर क्या करें । असल मे यहाँ हमारे घर मे जो पेड़ है जिसमे कु छ चमगादड़ भी रहते है । वैसे पेड़ मे लटके हुए ये काफ़ी अच्छे लग रहे है । ( वैसे भी फोटो तो दिन में खींची है और ये एक साल पुरानी फोटो है । अरे मतलब की अब ये चमगादड़ भी बड़े हो गए है । ) दिन भर तो नही पर हाँ शाम को जैसे ही अँधेरा होने लगता है कि ये पेड़ से निकल कर चारों ओर उड़ने लगते है । और कभी-कभी काफ़ी नीचे-नीचे उड़ते है । कई बार तो ऐसा लगता है कि सिर छूते हुए ही उड़ रहे है । तो इस डर से की कहीं ये सिर के बाल ना नोच ले ,हम झट से सिर को हाथ से ढक लेते है । हम लोग रोज शाम को बाहर बैठते है पर जैसे ही चमगादड़ उड़ने लगते है तो हम लोग घर के अन्दर आ जाते है । वो क्या है कि हमेशा से सुनते आ रहे है कि अगर चमगादड़ सिर पर बैठ जाए तो वहां से बाल नोच लेता है । इसीलिए चमगादड़ को देखते ही हम घर मे आ जाते है ...
सपने में क्या कभी ऐसा ख्याल भी नहीं आया था कि राखी पर भइया हम लोगों के साथ नहीं होंगें । जब से होश संभाला है हमेशा भइया की कलाई पर राखी बांधते आये है । बचपन से हर राखी पर भइया हम सभी बहनों को कोई ना कोई सरप्राइज़ देते ही रहते थे । कभी राखी के दिन हम सबको राखी बाँधने के लिये इंतज़ार करवाना, तो कभी गिफ़्ट देने में तंग करना । और हमारा हर रक्षा बंधन पर रोना (शगुनुआ के तौर पर ) । कभी गिफ्ट के लिए तो कभी रक्षा बंधन का गाना गाते हुए । पिछले साल २०२० में कोरोना की वजह से राखी पर हम सब भाई बहन मिल नहीं पाये थे पर वीडियो कॉल के ज़रिये हम सभी ने राखी मनाई थी । पर क्या पता था कि ये हम बहनों की भईया के साथ में आख़िरी राखी है । जहां पहले हर राखी हम सब बहनें अपने अपने पसंदीदा रक्षाबंधन के गाने गाते थे भईया मेरे राखी के बंधन को निभाना बहनों ने भाई की कलाई पे प्यार बांधा है मेरे भईया मेरे चंदा मेरे अनमोल रत्न ये राखी बंधन है ऐसा आज भी हम बहनें तो एक साथ इकट्ठा हुए है पर तुम हम लोगों के साथ नहीं हो । आज इस रक्षा ब...
आज बस यूं ही मौसम को देख कर हमे भी एक बचपन की कुछ कविताएं याद आ गई।थोडी बेसिर पैर की है पर बचपन मे इन्हे जोर-जोर से बोलने मे बड़ा मजा आता था। वैसे ये पहली लाला जी वाली कविता तो हिन्दी की किताब मे सचित्र पढी थी। लालाजी ने केला खाया केला खाकर मुंह बिचकाया। मुंह बिचकाकर तोंद फुलाई तोंद फुलाकर छड़ी उठाई। छड़ी उठाकर कदम बढ़ाया कदम के नीचे छिलका आया । लालाजी गिरे धड़ाम से बच्चों ने बजाई ताली। चलिए एक और ऐसी ही छोटी सी मस्ती भरी कविता पढिये। मोटू सेठ सड़क पर लेट गाड़ी आई फट गया पेट गाड़ी का नम्बर ट्वेन्टी एट (२८) गाडी पहुँची इंडिया गेट इंडिया गेट पर दो सिपाही मोटू मल की करी पिटाई। लगे हाथ इसे भी पढ़ लीजिये। मोटे लाला पिलपिले धम्म कुंयें मे गिर पडे लुटिया हाथ से छूट गई रस्सी खट से टूट गई।
Comments
घुघूती बासूती
नीरज जी सही कहा है आपने।
फिर तो बाँसुरी कैसे बजेगी जब बाँस ही नहीं होगा...
या एक दूसरा रास्ता भी है जो धर्म परिवर्तन की राह से हो कर गुज़रता है