Saturday, June 28, 2008

अरे हम गप्प नही मार रहे है बल्कि सच कह रहे है। अब आजकल तो हर काम इन्टरनेट से जुड़ गया है और लोग हर दम इन्टरनेट से जुड़े रहना चाहते है। वो चाहे घर हो या दफ्तर। पर कार में इन्टरनेट करने में समस्या आती है न। आती है कि नही । तो अब ऐसी कार जिसमे इन्टरनेट कनेक्शन हो और जिससे ड्राइव करते हुए भी इन्टरनेट करा जा सके। कुछ ऐसी ही कार

अमेरिका की ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनी Chrysler
बनाने की सोच रही है।

इस कंपनी का कहना है की UConnect Web system से वायरलेस कनेक्शन के जरिये कार में नेट किया जा सकेगा।
और इस कनेक्शन के जरिये इन्टरनेट से कोई भी चलती गाड़ी में अपने e mail चेक कर सकता है।फोटो और music डाउनलोड कर सकता है और तो और गेम भी खेल सकता है। अरे एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जायेगा।

अब देखना है कि कार में इन्टरनेट कनेक्शन होने से लोगों को परेशानी होती है या नही। और इसके कुछ फायदे है या नही।

Friday, June 27, 2008

है न आश्चर्य वाली बात कि विम्बलडन मे भी मैच fix होते है।अभी तक तो क्रिकेट के बारे मे ही सुना था पर अब

विम्बलडन भी इससे अछूता नही रहा
। पिछले साल हुए विम्बलडन खेलों मे ८ मैच fix किए गए थे।जिसमे से ४ पुरूष एकल खिताब के लिए खेले गए थे। और पिछले साल जिन १८ खिलाड़ियों ने ये मैच फिक्सिंग कि थी वो इस साल के विम्बलडन मे भी पुरूष एकल मुकाबले मे भाग लेने के लिए लन्दन पहुंचे है जिसमे रशिया ,अर्जेंटीना ,इटली,और ऑस्ट्रिया के खिलाड़ी है। विस्तार मे आप ख़बर यहाँ पढ़ सकते है।


महिला टेनिस खिलाड़ी मार्टिना नवरातिलोवा ने कहा है कि जिन खिलाड़ियों ने मैच फिक्सिंग कि है उनके खेलने पर जिंदगी भर का बैन लगाना चाहिए । नवरातिलोवा का कहना है कि ऐसे खिलाड़ियों पर बैन लगाना खेल की गरिमा को बनाए रखने के लिए जरुरी है।

Thursday, June 26, 2008

अभी तक

बाजी .कॉम
और अन्य साईट के बारे मे सुना था जहाँ हम और आप किसी भी वस्तु वो चाहे कपड़े हो किताबें हो कैमरा हो फ़ोन हो उन्हें नीलाम कर सकते है । प्रोडक्ट को साईट पर लगाया और खरीदने वाले बोली लगानी शुरू कर देते है। आम तौर पर एक प्रोडक्ट को एक हफ्ते के लिए साईट पर लगाया जाता है।

पर अब जमाना बदल रहा है और नीलम होने वाली चीजें भी
।अब इन्टरनेट पर लोग जिंदगी भी auction कर सकते है और खरीदने वाले और बोली लगाने वाले भी इन्टरनेट पर मिल जाते है। :)

और कमाल की बात है
कि Ian Ushers के घर,दोस्त,और उसकी नौकरी की बोली लगाने वाले आपस मे लड़ रहे है औए सिर्फ़ रविवार के दिन ही ४० लोगों ने बोली लगाई ६५०,००० डॉलर की।

और Ian Ushers ने ये auction इसलिए किया क्यूंकि उसकी पत्नी उससे अलग हो गई है। और वो अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करना चाहता है। वाह क्या आईडिया है :)


यकीन ना आए तो ये ख़बर पढ़ लीजिये।
यकीन आया न कि हम यूँ ही नही कह रहे थे । :)

Wednesday, June 25, 2008

पिछले दस दिनों से हर तरफ़ १९८३ वर्ल्ड कप की धूम सी मची है । हर टी.वी.चैनल पर रोज १९८३ की विश्व विजेता टीम के किसी न किसी खिलाडी से बात करते रहते है। आख़िर

२५ साल यानी वर्ल्ड कप की सिल्वर जुबली
जो है। कल बी.सी.सी.आई. ने सभी वर्ल्ड कप विजेताओं का सम्मान किया और सभी खिलाड़ियों ने वो चाहे रोजर बिन्नी हो या रवि शास्त्री हो या फ़िर लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर हो या मोहिंदर अमरनाथ हो और चाहे उस विजेता टीम के कप्तान कपिल देव हो सभी ने २५ साल पहले हुए उस खेल को और उस लम्हे को अपने-अपने अंदाज मे याद किया।


दिल्ली मे ८२ asiad games के दौरान कलर टी.वी.खूब बाजार मे आ गए थे। ८२ मे ही हम लोगों ने भी कलर टी.वी.खरीदा था।उस समय तो asiad का चस्का था पर जब १९८३ मे लन्दन मे वर्ल्ड कप शुरू हुआ तब भारत के लोगों मे जोश तो था पर ये कोई नही जानता था की भारतीय टीम जीत जायेगी।उस जमाने मे तो रेडियो पर ही कमेंट्री सुनते आए थे और टी.वी.पर क्रिकेट देखने का मजा ही कुछ और था


और चूँकि
फाइनल मैच का प्रसारण लन्दन के लॉर्ड्स स्टेडियम
से दूरदर्शन कर रहा था और हम लोग अपने कुछ दोस्तों के साथ घर पर इस मैच को देख रहे थे।जब भारत ने पहले बल्लेबाजी करना शुरू किया और एक के बाद एक विकेट गिरने लगे थे। तब जब भी कोई विकेट गिरता तो पहले तो हर कोई जोर से आह भरता (की अब तो मैच हारे) और जब तक दूसरा बल्लेबाज आता तब तक हर आदमी आउट होने वाले खिलाड़ी के लिए दसियों तरह की बातें करने लगता की उसने ये शॉट ठीक नही खेला या उसे ऐसे घुमा कर मारना चाहिए थे।और west indies के बॉलर की भी बुराई की जाती की जान बूझ कर ऐसी बॉलिंग कर रहा है जिस से रन न बने सके। और खिलाड़ियों को एक तरह से गरियाया भी जाता रहा । और जब ६० ओवर के गेम मे ५४. ओवर मे केवल १८३ रन बना कर भारतीय टीम आउट हो गई तब तो हम सबकी रही-सही आशा भी जाती रही थी क्यूंकि १८३ रन मैच जीतने के लिए काफ़ी नही थे।और वो भी २ बार वर्ल्ड चैम्पियन रही west indies टीम से।

जब तक
west indies की टीम
खेलने के लिए आती तय हुआ कि एक-एक चाय पिया जाए क्यूंकि लन्दन और भारत के समय मे अन्तर जो था कुछ तो रात का असर और कुछ भारत का खेल देख कर हर कोई सुस्त सा हो गया था।

खैर चाय पीते-पीते मैच शुरू हुआ । west indies जिसमे विवयन रिचर्ड ,माल्कम मार्शल,एंडी रॉबर्ट,जैसे खिलाड़ी थे। माल्कम मार्शल देखने मे बिल्कुल जाएंट जैसा लगता था और जब बौलिंग करता था तो लगता था की बल्लेबाज का मुंह ही टूट जायेगा। और जब west indies टीम बैटिंग करने आई तो हर कोई दम साधे मैच देख रहा था क्यूंकि उस समय west indies की टीम बहुत अच्छी मानी जाती थी और २ बार विश्व विजेता रह चुकी थी।और अंत का सबको थोड़ा अंदाजा भी था कि भारत हारने वाला है।

खैर मैच शुरू हुआ और
जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा मैच रोमांचक होता गया
। जब west indies का खिलाडी आउट होता तो अंपायर की उंगली उठने के साथ ही सारे लोग जोर से चिल्लाते आउट। और ये शोर जिस-जिस घर मे टी.वी.था वहां से सुना जा सकता था।और एक तरह का डिस्कशन शुरू हो जाता पर जैसे ही मैच शुरू होता हर कोई बस अपनी आँख गडा देता टी.वी.पर। और जब भारत के मोहिंदर अमरनाथ ने आखिरी west indies खिलाडी को आउट किया उस समय तो हमारे घर मे जैसे जश्न का माहौल हो गया था ।क्यूंकि भारतीय टीम जीत गई थी और वो भी ४३ रन से west indies जैसी टीम को हराकर।

और उसके बाद सभी भारतीय खिलाड़ी लॉर्ड्स के स्टेडियम मे बनी बालकनी मे आए थे और शैम्पेन को खोल कर चारों ओर स्प्रे भी किया थाखिलाडियों और बालकनी के नीचे खड़ी जनता पर भीवो एक अजब ही नजारा थाजब कपिल देव ने ट्रॉफी उठाई थी तो ऐसा लगा था मानो हर हिन्दुस्तानी ने लॉर्ड्स पर खेला हो और मैच जीता हो। दिल्ली मे तो पटाखे भी चलाये गए थे।और भारत के जीतने की खुशी मे उतनी रात मे ही हमने हलवा बनाया था और हम सभी दोस्तों ने खाया था और उसके बाद भी बड़ी देर तक मैच का डिस्कशन होता रहा था क्यूंकि सबकी नींद जो उड़ गई थी। :)

तो आइये एक बार फ़िर से १९८३ के वर्ल्ड कप की एक झलक देख ली जाए




Tuesday, June 24, 2008

१८ जून को हर साल गोवा मे क्रांति दिवस के रूप मे मनाया जाता है। क्यूंकि १८ .६.१९४६ मे डॉक्टर राम मनोहर लोहिया ने गोवा के लोगों को पुर्तगालियों के ख़िलाफ़ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया१८ जून को गोवा की आजादी की लडाई के

इतिहास मे स्वर्ण अक्षरों
से लिखा गया है१८ जून १९४६ को डॉक्टर राम मनोहर लोहिया जी ने गोवा के लोगों को एकजुट होने और पुर्तगाली शासन के ख़िलाफ़ लड़ने का संदेश दिया था१८ जून को हुई इस क्रांति के जोशीले भाषण ने आजादी की लड़ाई को मजबूत किया और आगे बढाया इस साल भी गोवा मे revolution day के दिन अलग-अलग जगहों जैसे पंजिम, मडगांव और वास्को मे समारोह का आयोजन किया गया।पंजिम के आजाद मैदान मे गोवा के गवर्नर श्री एस.सी.जमीर गोवा के मुख्यमंत्री और गोवा सरकार के अधिकारियों और जनता ने इस समारोह मे भाग लिया। इस साल ४१ स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर गवर्नर ने सबसे पहले आजादी की इस लड़ाई मे शहीद हुए सेनानियों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए ।२१ गन से सलामी दी गई। उसके बाद मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानियों ने भी शहीद स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर शहीदों को अपनी श्रधांजलि दी।
गवर्नर ने अपने भाषण मे कहा की आजादी का सबसे बड़ा फायदा है की किसी भी व्यक्ति को अपनी बात कहने की आजादी होती है।
और गवर्नर के भाषण का बिल्कुल सही उपयोग गोवा दमन और दियू स्वतंत्रता सेनानी एसोसिअशन के अध्यक्ष जयद्रथ शोदंकर ने किया और उन्होंने एक के बाद एक अपनी शिकायतें बतानी शुरू की कि किस तरह से स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों suffer करना पड़ रहा है। स्वतंत्रता सेनानी जो इस समरोह मे भाग लेने आए थे उन्होंने अपने भाषण मे बहुत नाराजगी दिखाई और कहा क्यूंकि तो उनके परिवार और बच्चों को सरकारी नौकरी मिली है और ही उन्हें और किसी तरह का बेनिफिट मिला है। जबकि हाल ही मे ५०० लोग पंचायती राज मे और ४०० लोग स्वस्थ्य मंत्रालय गोवा मे भरती किए गए है। पर उसमे एक भी स्वतंत्रता सेनानी के परिवार का सदस्य नही है। पूरी ख़बर यहाँ पढिये।
शहीदों की याद मे गोवा पुलिस द्वारा जो धुन बजाई जाती उसका नाम दीवाली हैऔर धुन के आख़िर मे दो बिगुल बजाने वाले (लोन बग्लर ) पार्क के पास बनी ईमारत की खिड़की से बिगुल बजाते हैइस सबसेऊपर वाली फोटो को जूम करके देखने पर आपको वो खिड़की मे दिख सकता है
इन ४१ सम्मानित किए गए स्वतंत्रता सेनानी मे मिस
लिबिया लोबो सरदेसाई
भी थी ।लिबिया जी १९४९-५० गोवा यूथ लीग की मेंबर थी और १९५५ -६१ तक कैसल रॉक (जो आज का बेलगाम है ) से अंडर ग्राउंड रेडियो स्टेशन voice of freedom के नाम से चलाती थी उस समय गोवा के आखिरी गवर्नर जनरल को आत्म समर्पण करने को कहा और चेतावनी दी कि अगर ऐसा नही किया तो लिबरेशन फोर्स (भारतीय सेना) गोवा मे प्रवेश कर जायेगीये संदेश हर १० मिनट के अंतराल पर लिबिया जी के द्वारा उनके रेडियो स्टेशन से प्रसारित किया जाता रहा था१७.१२.११९६१ मे गुलाम गोवा के लिए उनके रेडियो स्टेशन का ये आखिरी प्रसारण था

इस क्रांति दिवस के दौरान उनसे मिलने और बात करने का मौका मिला और तब उन्होंने बताया कि जब भारतीय सेना ने गोवा को आजाद करवा लिया था तब भारतीय सेना के प्रमुख जनरल चौधरी ने लिबिया जी से पूछा था कि अब क्या चाहती हैतो इस पर लिबिया जी ने कहा कि वो आजाद गोवा का पहला प्रसारण भी ख़ुद ही करना चाहती है और इसके लिए उन्हें प्लेन मे बैठ कर broadcast करने की इजाजत दी गई और१७ .१२.१९६१ को प्लेन से ही लिबिया जी ने गोवा के लोगों को आजादी का संदेश दियाआजकल लिबिया जी गोवा मे वकालत कर रही है

नोट--पंजिम के मेन मार्केट का नाम १८ जून रोड हैतो अब जब आप गोवा आए तो १८ जून पर शौपिंग जरुर करियेगा । :)

Monday, June 23, 2008

तनिश्कर स्पाईस फार्म पंजिम से करीब ७० कि.मी.दूर है पर मडगांव से ४० -४५ कि.मी.दूर है।सांगे (sanguem) से आगे जाने पर नेत्रोली (netravalim)नाम की जगह है ये तनिश्कर फार्म वहीं पर है।ये पूरी तरह से ओर्गानिक फार्म है . और इस फार्म को गोवा सरकार से award भी मिल चुका है। यहां पर फार्म हाउस के साथ-साथ गोवा के बिल्कुल पुराने तरह का घर भी देखने को मिलता है। जो २०० साल पुराना है और मिटटी का बना है।इस घर मे और स्पाईस फार्म को घुमाने के लिए अलग -अलग रेट होता है। जैसे अग सीजन है तो ३०० से ५०० रूपये एक व्यक्ति के लिए जिसमे एक welcome drink देते है और इसके अलावा लंच और चलते समय उन्ही के फार्म हाउस के मसालों का एक छोटा सा गिफ्ट पैक भी देते है। आम तौर पर लोग पैकेज टूर लेकर जाते है।(जिसमे घर,स्पाईस फार्म,bubble pond, और ट्रैकिंग होता है और इसके लिए ३-४ घंटे से ज्यादा लगते है ) और लंच के लिए पहले से बताना पड़ता है. अगर लंच नही है तो १५० रूपये प्रति व्यक्ति लेते है।

हम लोग चूँकि डेढ़ बजे पहुंचे थे इसलि लंच हम लोगों ने नही लिया और १५० रूपये वाला टूर लिया जिसमे करीब ४५ मिनट मे उसने सब कुछ दिखाया । शुरुआत मे सबसे पहले हम लोगों ने फार्म हाउस घूमा जिसमे उसने वनिला का पेड़ दिखाया और उसके बारे मे बताया की किस तरह से वनिला प्लांटेशन किया जाता है. जिसे आप नीचे दिए विडियो मे देख सकते है। विडियो बस एक मिनट का है।

वनिला से आगे बढ़ने पर एक के बाद एक सारे मसालों के पेड़ जैसे लौंग,इलाईची,दालचीनी ,कालीमिर्च(सफ़ेद ,काली और लाल ),जावित्री और जायफल वगैरा दिखाया ।स्पाईस फार्म घुमाते हुए चिन्मय बड़ी ही रोचक बातें बताता जाता है। स्पाईस फार्म मे घूमते हुए हमने पूछा की यहां सांप नही है तो उसने बड़े मजे से कहा की ४-५ तरह के है जिसमे सिर्फ़ २ विषैले है बाकी सब दोस्त की तरह रहते है।उसने ये भी बताया की सांप इसलिए जरुरी है वरना बड़े चूहे (घूस) पेडों को नुकसान पहुँचाते है। और सांप,बिच्छू घर मे ना आए इसलिए उसने doggi और बिल्ली पाल रक्खी है।

अच्छा एक बात बताइये क्या आप जानते है कि जायफल और जावित्री एक फल से बनते है .भई हम तो नही जानते थे पर अब जान गए है। :) चिन्मय ने ये भी बताया कीकभी -कभी कुछ पुराने पेड़ जैसे ६० साल पहले लगाए गए जायफल के एक पेड़ से उसे १-३ लाख रूपये की आमदनी होती है.(वैसे पेड़ लगाने के तीसरे साल बाद से ही फल देने लगता है ।)जैसे इस फोटो मे कच्चा और पका जावित्री और जायफल दिखा रहा है।
चिन्मय ने ये भी बताया की दालचीनी और तेजपत्ता एक ही पेड़ मे होते है।
चिन्मय अपनी माँ और छोटे भाई-बहन के साथ यहां इस २०० साल पुराने मिट्टे के बने घर मे रहता है। चिन्मय ने बी.com किया है और पिता की मृत्यु के बाद वही अपने फार्म हाउस की देख भाल करता है.चिन्मय के साथ पूरा फार्म हाउस घूमने के बाद हम लोगों ने घर देखा। बिल्कुल हम लोगों के गाँव-घर जैसा हमने अपनी चंदौली का घर मे जिक्र किया था। आँगन के बीच मे तुलसी का पौधा जिस पर सुबह नहा कर जल चढाया जाता है। आँगन के चारों और बरामदा जहाँ पर बिल्ली और उसके बच्चे बैठे थे। इस फोटो मे चिन्मय की माँ और बहन है और पीछे अलग-अलग तरह के मसालों और फलों से भरे बोरे दिख रहे है।

इस घर की रसोई मे मिटटी का चूल्हा है और गैस का भी।और रसोई मे एक तारफ भगवान् का मन्दिर भी है। dinning room की छत मे दिन मे रोशनी के लिए ऐसा इंतजाम है और रात मे तो खैर लाईट ही जलती है। और जब पैकेज टूर पर जाते है तो इस चूल्हे पर बना पारंपरिक गोअन खाना (शाकाहारी और माँसाहारी )खाने को मिलता है। जो उस दिन हमने मिस कर दिया था।:(
और हाँ यहां पर कुछ कॉटेज भी है जहाँ रुका भी जा सकता है। बिल्कुल शांत और जंगल के बीच रहने का मजा लिया जा सकता है। कॉटेज का किराया भी सीजन के हिसाब से होता है। वैसे स्पाईस फार्म देखने का सबसे अच्छा समय नवम्बर से फरवरी होता है।इसके अलावा वहां एक bubble pond भी है जिसके बारे मे अगली बार क्यूंकि आज की पोस्ट वैसे ही बहुत लम्बी हो गई है। :)

ये जो घोडा और सवार है ये १५० साल पुराना है ।
घर के बाहर मधुमक्खी भी पाल रक्खी है जिनका शहद निकल कर बाजार मे बेचते है। इसका भी विडियो २ मिनट का है पर है interesting।


पहला वीडियो honey bee का है और दूसरा वीडियो वनिला का है।


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Sunday, June 22, 2008




क्या आप इसे पहचानते है अरे क्या कहा आपने इसे नही पहचाना चलिए कुछ हिंट दे देते है. साहब ,बीबी और गुलाम मे इसने वहीदा रहमान को तंग किया था तो परिचय मे जया भादुरी को और भंसाली वाली देवदास मे ऐश्वर्या राय को तंग किया था गुन-गुन करते हुए। आज सुबह बालकनी की खिड़की से अन्दर गए थे और हमने बिना समय गंवाए झट से मोबाइल से फोटो खींची और फट से esnip से गाने लोड किए और आपके सामने पेश है।
अब हमने सोचा कि जब भँवरे की फोटो लगा ही रहे है तो अंडमान वाले भँवरे की भी लगा ही देदाहिनी ओर पौधों के बीच जो भँवरे की फोटो है वो अंडमान की है

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Saturday, June 21, 2008

आजकल बारिश हर जगह जोरों पर है और गोवा मे तो बारिश एक बार शुरू हो जाए तो फ़िर सूरज देवता कहाँ है ढूँढने से भी पता नही चलता है। और जब सूरज देवता दिख जाते है तब जरा राहत महसूस होती है । बारिश मे क्या अच्छा घर और क्या ख़राब घर हर घर मे सीलन और खपरैल की छतों से पानी का चूना आम बात हो जाती है।जब यहाँ लगातार बारिश होने लगती है तो लगता है कि बारिश कुछ देर रुक जाए।वैसे जब से बारिश दिल्ली और बंगाल की तरफ़ हो रही है तब से यहाँ गोवा मे बारिश कुछ कम हो रही है ।

आजकल गोवा मे ऐसी बारिश हो रही है जैसे सियार का ब्याह हो रहा होभई हमने तो अपने बचपन ये जुमला खूब सुना हैजब हम लोग छोटे थे और जब धूप होते हुए बारिश होती थी तो लोगों को यही कहते सुना थाऔर उसके बाद इन्द्रधनुष भी दिखता था। (तब अक्सर इन्द्रधनुष दिख जाता था ) अब ऐसा क्यूँ कहा जाता था ये पता नही हैअरे आप लोगों ने नही सुना है कमाल है जब सूरज देवता दिख रहे हो और बादल कम दिख रहे हो और खिली धूप मे बस थोडी देर के लिए जोर दार बारिश हो तो उसे सियार का ब्याह होना कहते हैतो यहाँ गोवा मे ऐसी ही बारिश हो रही हैजो फॉर चेंज अच्छी लग रही है । :)

बारिश मे जहाँ गोवा बेहद खुबसूरत नजर आता है वहीं बारिश अपने साथ ढेरों तरह के कीडे-मकोडे भी लेकर आती है। हमारे घर मे ही snail (घोंघा) centipede लाल और काले रंग के होते है और इन्हे यहाँ राम जी की सवारी कहा जाता है) हर समय घूमते नजर आ जाते है ।वैसे गोवा मे snail छोटे-छोटे ही दिखते है अंडमान की तुलना मे। और तो और दीवार पर दरवाजे पर भी मजे से ये snail घूमते रहते है. और बाकी तो घर के बाहर ही रहते है जैसे जोंक,साँप,मेढक,बिच्छू वगैरा।(गनीमत है अभी तक इन सबके ज्यादा दर्शन नही हुए है )

snail से याद आया यहाँ पर snail फ़िर भी छोटे होते है पर अंडमान मे तो बहुत बड़े-बड़े snail होते थे जो की रात भर मे किसी भी पेड़ पर एक तरह से अटैक करके पूरा पेड़ ही साफ (खा) कर जाते थे। अंडमान मे हमारे घर मे पपीते के कई पेड़ थे और हर पेड़ पर जितने पपीते होते थे उससे कहीं ज्यादा snail होते थे।खैर बाद मे इन snails को दवा डाल कर मारना पड़ा क्यूंकि एक के बाद एक पेड़ वो खाते जो जा रहे थे।अंडमान मे snail के लिए कहते थे की जब जापानी लोग अंडमान आए थे तब जापानी लोग ही snail लाये थे खाने के लिए क्यूंकि snail से उन्हें प्रोटीन मिलता था।और उसके बाद जापानी तो चले गए मगर snail वही अंडमान मे रह गए थे।देखिये किस तरह ये सारे snail एकसाथ दीवार पर चढ़ रहे है।

snail और कीडे ही नही बल्कि बारिश मे यहाँ पर दीवारों पर सड़क पर और तो और कपडों पर भी खूब फंगस लगता है।पिछले साल तो बारिश के साथ हमारा तजुर्बा यही रहा था । घर की दीवार और छत तक कुछ हरी-हरी सी हो गई थी । अब इस बार देखें क्या होता है।

वैसे एक बात है बारिश मे ड्राइव पर जाने और गोवा मे घूमने का जो मजा है उसका कोई जवाब नही है। :)
अब बारिश मे सियार का ब्याह हो या हो हम तो कहेंगे की बारिश अच्छी भी है और बुरी भी है।आपका क्या ख़्याल है बारिश के बारे मे

Friday, June 20, 2008

आज की हमारी ये पोस्ट ज्ञान जी की टिप्पणी से जुड़ी हुई हैकल ज्ञान जी ने समीर जी की पोस्ट पर टिप्पणी की थी। और फ़िर जब ndtv पर ये न्यूज़ देखी थी।तो अचानक ही इस पर पोस्ट लिखने की सोची। अमेरिका मे अब एअरपोर्ट पर स्कैनर मशीन लगाई जा रही है जिससे किसी भी तरह की दुर्घटना को रोका जा सके। इससे पहले मार्च मे लन्दन मे भी ऐसी ही मशीन thruvision नाम की एक कंपनी ने बनाई है । इस नई टेक्नोलॉजी का नाम t5000 system है।इसमे लगे कैमरा की मदद से कपडों मे छिपाए गए हथियार ,drugs,वगैरा के बारे मे पता लगाया जा सकता है। ओह हो अब क्या हम ही सारी ख़बर बताएँगे। अरे पहले आप इसे पढिये तो सही।

Thursday, June 19, 2008

अब लगडा आम ,दसहरी आम ,चौसा ,एल्फंजो,सफेदा आम तो आपने सुना है पर अब lalu mango के बारे मे भी जरा सुन लीजिये। ये lalu mango पटना बिहार के बाजार मे खूब बिक रहा है और लोग खूब खरीद भी रहे है। अरे हम मजाक नही कर रहे है । अब lalu एक ब्रांड बनते जा रहे है। बिहार मे तो जहाँ दिवाली मे lalu ब्रांड पटाखे बिके थे वहीं होली मे lalu ब्रांड गुलाल भी खूब बिके थे। और अब इस साल lalu ब्रांड आम आ गया है।

आमों पर बाकायदा lalu नाम का स्टिकर लगाया जा रहा है बिल्कुल एल्फंजो style मे और इसकी कीमत ३५ रूपये किलो है। आम बेचने वालों का कहना है कि जनता हमेशा कुछ नया चाहती है इसलिए दीघा आम का ही नया नाम lalu mango कर दिया है। और इससे आम खाने वाले भी खुश और आम बेचने वाले भी खुश।

लोगों के इस आम को खरीदने से ये भी साबित हो रहा है कि lalu अभी भी लोगों मे प्रिय है। ऐसा आम बेचने वालों का कहना है। ओह हो अभी भी यकीन नही हो रहा है तो आप ख़ुद इस ख़बर को पढ़ लीजिये ।

Wednesday, June 18, 2008

बहुत दिन पहले रेडियोनामा पर अन्नपूर्णा जी ने इस गाने का जिक्र किया था । और कल esnip पर ढूँढने पर ये गाना मिल गया ।इस गाने को सुनते हुए उस ज़माने मे लौट जाइए जब छुक-छुक गाड़ी धुआं उड़ाती हुई चलती थी।और हम और आप कितनी ही बार खिड़की से बाहर झांकते थे और बाहर झाँकने पर आँख मे कोयला पड़ता था और तब हाथ से आँख मलते हुए सिर अन्दर करके कुछ देर बैठते थे और थोडी देर बाद फ़िर सिर बाहर । :)
(तब ज्यादातर ट्रेन की खिड़कियों मे लोहे की rod नही लगी होती थी ) फ़िल्म सुबह का तारा (१९५४) के इस गाने मे तो भाभी को ना जाने कितनी मुसीबतों का सामना करना पड़ा जरा सुनिए ।

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Tuesday, June 17, 2008

अभी तक जोर-जोर से खर्राटे लेने से साथ वाले की नींद ही ख़राब होती थी पर इससे खर्राटे लेने वाले के ऊपर कोई दुष्प्रभाव नही पड़ता था । पर अब अगर आप जोर-जोर से खर्राटे लेते है तो जरा सावधान हो जाइए। क्यूंकि आज पेपर मे छपी ख़बर के मुताबिक जोर -जोर से खर्राटे लेने से याददाश्त पर असर पड़ सकता है। AIIMS के डॉक्टर के.के.हांडा का कहना है कि तकरीबन ६० प्रतिशत लोग जो जोर-जोर से खर्राटे लेते है वो OSA से ग्रस्त होते है। OSA यानी obstructive sleep apnoea । OSA मस्तिष्क के tissue को नुकसान पहुँचाती है । पूरी ख़बर इस लिंक पर जाकर पढे।

Monday, June 16, 2008



जब हमे इस केव के बारे मे पता चला तो हमे जरा आश्चर्य भी हुआ था कि गोवा मे गुफा और वो भी पांडवों की तो ये तय हुआ किसी दिन केव यानी गुफा को देखने भी जायेंगे ये पांडव केव्ज रिवोना मे स्थित है और रिवोना panjim से ७०-७५ कि .मी दूर है पर मडगांव से पास है करीब ३०-४० कि.मी.

तो एक दिन चल दिए हम लोग रिवोना मे पांडव केव्ज देखने और ये ७० कि.मी.तय करने मे करीब डेढ़ से दो घंटे लग जाते है वैसे अगर कार का चालक ज्यादा तेज हो तो भी करीब-करीब इतना ही समय लगता है क्यूंकि रिवोना कि सड़क जरा पतली है और चूँकि उधर mines है इसलिए उस रास्ते पर ट्रक बहुत चलते हैअगर आप दोपहर मे उस रास्ते जायेंगे तो सड़क पर लोग कम ही दिखते है बस बीच-बीच मे कोई ट्रक आते-जाते दिखते है

खैर जब रिवोना पहुंचे तो पांडव केव के बारे मे लोगों से पूछा तो एक बुड्डे से आदमी ने मुख्य सड़क से नीचे जाने वाली पगडण्डी की ओर इशारा करते हुए कहा कि वहां पर पांडव केव्ज है उबड़-खाबड़ से सड़क पर जब कार को मोडा तो लगा की आगे तो रास्ता ही नही है पर उस आदमी ने कहा की यहीं आगे पांडव केव्ज है पर हम को तो बस एक पगडण्डी और जंगल ही दिख रहा था चलते-चलते हम लोगों ने उससे पूछा कितनी दूर है तो वो बोला बस मिनट का रास्ता है आप हमारे साथ चलिए

और हम लोग चल पड़े और जरा सी दूर चलने पर उसने एक पहाड़ की तरफ़ इशारा करके कहा की यही पांडव केव है आप इस छोटी सी सीढ़ी से ( पत्थर रखे थे बस) से चले जाइए और ये कहता हुआ वो आगे चला गयाऔर हम उन दो पत्थर से बनी सीढ़ी पर चढ़कर पहुँच गए पांडव केव्ज मेइस गुफा के बारे मे ज्यादा नही जानते है क्यूंकि ना तो गुफा के आस-पास कुछ लिखा था और ना ही लोगों को ज्यादा पता हैपर कुछ लोग ये मानते है कि यहां पर बने ऊँचे स्थान पर बैठ कर बौद्ध गुरु शिक्षा दिया करते थे


इस केव के न्दर एक ऊँचा सा स्थान बना हुआ है जिसे बैठने के लिए इस्तेमाल किया जाता होगा इस गुफा के अन्दर जाने पर इसकी छत कुछ पीली लाल और सफ़ेद सी दिखी. गुफा के बाहर से अन्दर कुछ इस तरह दिखता है(जैसे ये ऊपर बायीं ओर वाली फोटो )गुफा के अन्दर से बाहर सिर्फ़ पेड़-पौधे ही दिखते है (इस नीचे दायीं वाली फोटो की तरह )

इस गुफा के बगल से -१० सीढियां खड़ी -खड़ी और कुछ टूटी हुई से चढ़कर ऊपर जाते है तो ऐसा लगता है मानो
किसी पहाड़ पर गए हो और वहां एक घाटी सी दिखाई देती है

जरा इस आखिरी फोटो को ध्यान से देखें तो आपको कुछ आकृति सी नजर आएगीचलिए हम ही बता देते है इस फोटो मे अगर आप ध्यान से देखें तो एक skull जैसा दिखता हैहो सकता है कोई ...................? जब फोटो खींची थी तब तो ध्यान नही गया था पर बाद मे फोटो देखने पर ऐसा लगा। :)


ऐसी ही एक दो और गुफाएं भी है गोवा मे आगे हम उनका भी जिक्र करेंगे। ।हालांकि इस गुफा पर पहुंचकर लगता है कि क्या इतनी दूर इसे देखने आना ठीक थातो हम यही कहेंगे कि चूँकि हम यहां रह रहे है और हमे समय की कोई कमी नही है इसलिए हम सिर्फ़ इसे ही देखने इतनी दूर जा सकते है

नोट-- वैसे जब भी जाएं तो सिर्फ़ इस गुफा को देखने ना जाए बल्कि उसी रास्ते मे palacio de deao भी पड़ता है और कुछ और जगहें भी देखने के लिए है

Sunday, June 15, 2008

पिता के बारे मे जितना कहा और लिखा जाए वो कम है। पिता की छत्र छाया मे पल कर बड़े होना जिसमे संस्कार और संरक्षण के साथ-साथ प्यार भी खूब मिलता है ।


पापा जिनका हाथ पकड़
कर चलना सीखा
जिनकी उंगली पकड़ कर
आगे बढ़ना सीखा
याद नही कभी जब
आपने जोर से डांटा हो
पर रिक्शे पर अपने पैरों
पर बिठा कर घुमाने
ले जाना खूब याद है

आज फादर्स डे के दिन
हम सब भाई-बहनों की
ओर से पापा आपको
हैप्पी फादर्स डे
हम सबको गर्व है कि
हम आपके बच्चे है।


ब्लॉगर परिवार के सभी सदस्यों को फादर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएं

Saturday, June 14, 2008

अभी तक तो हम लोग नेट बैंकिंग के बारे मे जानते थे और करते थे पर अब कुछ महीनों बाद मोबाइल बैंकिंग भी कर सकेंगे। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने इस बात का संकेत दिया है। अब अपने मोबाइल से ही आप पैसा ट्रांसफर कर सकते है क्रेडिट कार्ड के बिल दे सकते है और अपने अकाउंट का बैलेंस देख सकते है।अब इस सब कामों के लिए ना तो आपको बैंक जाना होगा और ना ही आपको अपने कम्पूटर या लैपटॉप को ही खोलना पड़ेगा। हाँ पैसा निकालने के लिए जरुर जाना पड़ेगा। :)

मोबाइल बैंकिंग शुरू करने का एक कारण ये बताया गया है कि अपने देश मे २६ करोड़ से भी ज्यादा मोबाइल subscribers है जिनकी तुलना मे बैंक खाते कम है. नेट बैंकिंग की तरह मोबाइल बैंकिंग मे भी मोबाइल पिन (mpin)दिया जायेगा जिसमे कम से कम ४ digit नंबर होंगे ।इस लिंक पर जाकर मोबाइल बैंकिंग के बारे मे आप पूरी ख़बर पढ़ सकते है।

अब ये सफल होता है या नही ये तो आने वाला समय ही बताएगा।

Friday, June 13, 2008

अपनी साइकिल सीखन की दास्तान तो हम बता ही चुके है और आज हम अपने स्कूटर सीखने का किस्सा यहां लिख रहे है। घर मे सबसे छोटे होने की वजह से स्कूटर और कार सीखने की नौबत या यूं कहें की नंबर नही आ पाया ।उस समय इलाहाबाद मे लड़कियां स्कूटर कम ही चलती थी पर हाँ लूना बहुत चलाती थी जो साइकिलऔर स्कूटर का मिला-जुला सा रूप थामिला जुला इसलिए की अगर कहीं पेट्रोल ख़त्म हो जाता था तो पैडल मारकर भी चलाया जा सकता था। :) वैसे उन दिनों लूना बहुत प्रचलित थीपर लूना को हमने कभी स्कूटर के बराबर का नही माना। (लूना चलाने वालों से माफ़ी चाहते है )तो इसलिए चलाने का सवाल ही नही था


वो कहते है ना कि जिसने साइकिल चलाई हो उसे स्कूटर सीखने मे कोई दिक्कत नही आती हैपर ऐसा कुछ नही है स्कूटर सीखना भी कम मुश्किल काम नही हैकहाँ हलकी-फुलकी साइकिल और कहाँ भारी-भरकम स्कूटरपर एक बात सही है कि साइकिल चलने वाले जल्दी स्कूटर सीख लेते हैवैस्पा के लिए कहा जाता था कि वो हल्का स्कूटर है लेम्ब्रेटा के मुकाबलेऔर वैस्पा चलाने मे भी आसान और हल्काऔर हमारी किस्मत देखिये कि पतिदेव के पास वैस्पा स्कूटर था

खैर जब शादी हुई तब एक-डेढ़ साल बाद हमने स्कूटर सीखने की सोची और जब पतिदेव को बताया तो वो काफ़ी खुश हुए और तय हुआ कि छुट्टी के दिन वो हमे सिखायेंगेअब उस समय तो सिर्फ़ रविवार की ही छुट्टी होती थी इसलिए स्कूटर सीखने मे हमे एक महीना लग गयाछुट्टी के दिन कालोनी मे बने ग्राउंड मे हम मियां-बीबी मय स्कूटर पहुँच जाते और शुरू होती क्लासपहले दिन तो हैंडल की वजह से हाथ मे ही दर्द हो गया था तो अगले दिन गियर और एक्सीलेटर मे ही confuse हो जाते थेऔर आख़िर कार पतिदेव ने स्कूटर चलाना हमे सिखा ही दिया और हम ने भी इसी तरह धीरे-धीरे गलतियाँ करते- सुधारते स्कूटर सीख ही लिया था


स्कूटर तो हमने किसी तरह सीख लिया और दिल्ली मे चलाना भी शुरू किया पर सिर्फ़ अपने घर के आस-पास या घर के पास के बाजार तक ही जाते थे स्कूटर से क्यूंकि दिल्ली मे उस समय के हिसाब से बहुत भीड़ होती थी (पर आज के समय के मुकाबले मे बहुत कम भीड़ )और स्कूटर मे ये खतरा रहता था कि अगर किसी ने ठोंक दिया तब तो गए काम से। :)

और अपने इसी डर की वजह से हमने बस कुछ ही दिन स्कूटर चलाया और उसके बाद स्कूटर चलाना बंद कर दिया और ये सोचा की स्कूटर चलाने से बेहतर है कार चलाना क्यूंकि कम से कम कार मे उतना खतरा तो नही है अरे भाई अगर कोई कार को ठोंकता भी है तो पहले तो कार डैमेज होगी तब कार चालक को नुकसान होगा। हालांकि आज कल तो कार के साथ-साथ चालक भी .... ।

और ऐसे नेक विचार आते ही हमने स्कूटर चलाना बिल्कुल ही बंद कर दिया हालांकि पतिदेव का कहना था की ये सब बेकार की बात है पर हमने भी ठान लिया था कि बेकार ही सही पर अब अगर हम कोई वाहन चलाएंगे तो वो सिर्फ़ कार ही। :)

Thursday, June 12, 2008

१० जून को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इस साल के राष्ट्रीय बालश्री पुरस्कार प्रदान किए। श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने श्रुति और गोरे को बालश्री award प्रदान किया। श्रुति और गोरे जुड़वाँ बहने है ये दोनों बहने कानपुर उत्तर प्रदेश की रहने वाली है। श्रुति और गोरे की उम्र १६ साल है। ये दोनों बहने बहुत सुंदर पेंटिंग्स करती है।और गाना भी अच्छा गाती है। पूरी ख़बर इस लिंक पर जाकर पढिये।

इन दोनों बहनों ने ये साबित कर दिया की अगर मन मे चाह हो तो जीवन मे कुछ भी हासिल किया जा सकता है।और अपनी मंजिल हासिल करने मे ना तो कोई बीमारी और ना ही समाज कोई बाधा खड़ी कर सकता हैश्रुति और गोरे के माता-पिता को भी श्रेय जाता है जिन्होंने अपनी बेटियों को जीवन से हारना नही बल्कि जीवन को जीतना सिखाया है

Wednesday, June 11, 2008

बिल्कुल ठीक पढ़ा है आपने पर क्या आपने कभी ढाई लाख का तरबूज देखा या सुना या खाया है। हमने तो इससे पहले तरबूज की इतनी बड़ी कीमत नही सुनी थी। इतने कीमती तरबूज को तो खाते हुए लगेगा कि तरबूज फल नही बल्कि अपना रुपया खा रहे है। :)

खैर ये तो रही हमारी बात तो चलिए आपको इस ढाई लाख के तरबूज के बारे मे भी कुछ बता दे। ये काले रंग का ८ किलो का Densuke watermelon माने तरबूज है।इसे जापान के उत्तरी द्वीप के hokkaido मे उगाया गया है। इसे जापान मे नीलामी के दौरान ६५०,००० येन मतलब ढाई लाख रूपये के आस-पास मे बेचा गया।

जापान मे तरबूज को लोग उपहार के तौर पर देते है ।अब अपने हिन्दोस्तान मे कोई तरबूज उपहार दे तो लोग उपहार देने वाले के सर पर ही तरबूज को फोड़ दे। :)
अरे आपको अभी भी हमारी बात पर यकीन नही आ रहा है तो इस लिंक को पढिये और इस काले तरबूज की फोटो देखिये और फ़िर बताइए कि क्या इससे पहले आपने ऐसा तरबूज देखा या सुना था। :)

Tuesday, June 10, 2008

अभी हाल मे ही गोवा मे मराठी और इंग्लिश की कक्षा दस की इतिहास और सोशल साईंस की किताब छप कर आई है और जिसे शिक्षा विद प्रोफेसर सुरेश अमोनकर ने तुरंत ही इस किताब को वापस लेने को कहा है। क्यों तो इस लिंक को पढिये और navhind times मे विस्तार मे छपी इस ख़बर को भी पढिये।

इतना ही नही आज ही अखबार मे ख़बर है कि केरल की क्लास ५ और ७ की इतिहास की किताब मे भी महात्मा गांधी को अपमान जनक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

Monday, June 9, 2008



गोवा मे beaches के अलावा भी इतनी सारी जगहें है देखने के लिए की अगर हर हफ्ते भी घूमने जाए तो कम पड़ जाए।हमने अपनी पोस्ट मे कहा भी था कि
यहां पर कुछ हेरिटेज हाउस है जिन्हें देखना भी अपने आप मे एक अनुभव ही है हेरिटेज हाउस की शुरुआत तो हम कर ही चुके है तो ऐसे ही एक और हेरिटेज हाउस को देखने के लिए हम लोग गए। पंजिम से करीब ४०-५० कि.मी दूर quepem ( quepem को केपे कहा जाता है। ) पर मडगाँव से बस १५ कि.मी.दूर यह हेरिटेज हाउस है, ये २०० साल पुराना है।यहां पर पहुँच कर एक बार को लगता है कि शायद ग़लत जगह आ गए है।क्यूंकि ये देखने मे museum जैसा कम बल्कि किसी का घर ज्यादा लगता है।और इस doggi को देख कर भी क्यूंकि किसी भी museum मे doggi स्वागत नही करता हैयहां पर दो गेट है पहले गेट के अन्दर दाखिल होते ही दाई तरफ़ जोस पाउलो की मूर्ति और बाई तरफ़ कुआँ दिखाई देता है । । यहां के हर घर मे कुआँ जरुर होता हैऔर जैसे ही दूसरे गेट से अन्दर दाखिल होते है कि एक छोटा सा प्यारा सा doggi भौंक-भौंक कर स्वागत करता है।पर और कोई भी कहीं दिखाई नही देता है। और जब इस हाउस की सीढियों को चढ़ कर ऊपर जाते है तब भी कोई नजर नही आता है पर सारा घर खुला रहता है। चारों और हरियाली और शान्ति और दरवाजे मे टंगे हुए सफ़ेद परदे हवा मे उड़ते हुए कुछ-कुछ घोस्टी हाउस जैसी फीलिंग भी देते है। अरे डरिये नही ऐसा कुछ नही है। :)

जैसे ही सीढ़ी से ऊपर जाते है की दाहिनी ओर इस घर का नक्शा बना है और इसके इतिहास के बारे मे लिखा है। ये घर कुशावती नदी के किनारे 1787 मे एक पुर्तगाली जोस पाउलो (jose paulo) ने जो की उस समय चर्च के dean और केपे शहर के founder थे ने बनाया थाये घर ११ हजार स्क्वायर फीट एरिया मे बना है जिसमे से एकड़ मे गार्डन हैचारों ओर खूबसूरत बगीचे और हरियाली देख कर मन खुश हो जाता है जब jose paulo ओल्ड गोवा से केपे रहने के लिए आए उस समय केपे मे जंगल था तो jose ने यहां रहने वाले लोगों को वहां पर चावल,नारियल और दूसरे फलों के पेड़ लगाने को कहा jose ने यहां पर रहने वाले के लिए एक बाजार ,हॉस्पिटल और ऐसी ही अन्य सुविधाएं बनाई थी।


इस हाउस को फ़िर से restore करने मे तीन साल का वक्त लगा .( २००२ से २००५ ) और अब ये एक museumहै ।और अब इस घर रुपी museum की देख भाल एक मैकेनिकल इन्जीनिर और उनका परिवार करता है । यहां प्रवेश पर कोई भी शुल्क नही देना पड़ता है। पर हाँ अगर आप कुछ दान करना चाहे तो कर सकते है।इस हाउस मे पुर्तगाली के साथ-साथ हिंदू संस्कृति की भी झलक मिलती हैघर मे जैसे ही प्रवेश करते है की ईसा मसीह की छोटी सी मूर्ति टंगी दिखती है बड़े-बड़े कमरे और हर कमरे का इतिहास कमरे की दीवार पर लिखा हुआ हैजिसे आराम से समय देकर पढ़ा जा सकता है. यहां पर एंटीक फर्निचर ,फोटो,सिक्के,स्टैंप ,किताबें वगैरा देखने को मिलते हैइस घर के ठीक सामने चर्च बना हुआ है और घर के बरामदे से चर्च देखा जा सकता है

यहां पर खिड़की शीशे या लकड़ी की नही बल्कि shell की बनी होती हैपुराने गोअन घरों मे खिड़की shell की बनी होती हैवैसे आम तौर पर कहीं भी आते-जाते ऐसी खिड़की देखी जा सकती हैऔर इस फोटो मे भी shell वाली खिड़की दिख रही हैजो की बहुत ख़ास बात है।अधिकांश museum मे चीजों को छूना मना होता है पर यहां के फर्निचर को छू सकते है पर हाँ थोडी सावधानी बरतनी पड़ती है कि कहीं कुछ टूट-फुट ना जाए। :)

इस museum की एक और खास बात है की यहां पर आपको बिल्कुल पारंपरिक गोअन खाना मिलता है पर उसके लिए पहले से बताना पड़ता है।वैसे आधे घंटे मे वो खाना खिला देते है पर हमने सिर्फ़ कॉफी पी थी क्यूंकि हम लोग सुबह गए थे और तब खाने का समय नही हुआ था। इस लिए हम लोगों ने कॉफी पी थी। पर कॉफी का स्वाद भी जरा हट के था।हल्का सा कडुवा या स्ट्रोंग भी कह सकते है






Sunday, June 8, 2008



आजकल गोवा मे चारों तरफ़ इतने अधिक गुलमोहर खिले है की उन्हें देख कर ये गाना याद आ गया। देवता फिल्म का ये गीत किशोर कुमार और लता की आवाज मे आप भी सुनिए । और हाँ गाने के साथ -साथ हम यहां एक गुलमोहर के फूलों से भरे पेड़ की फोटो भी लगा रहे है। तो बस संडे के दिन आनंद उठाइए इस गाने का।

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Saturday, June 7, 2008

चाहे कोई राजनैतिक पार्टी हो या कोई आन्दोलन कारी हो जिस किसी को भी आपना आक्रोश दिखाना होता है वो बंद , और चक्का जाम का सहारा लेता है। पिछले १४-१५ दिनों से आरक्षण के लिए राजस्थान मे गुज्जर आन्दोलन के चलते सारे रेलवे ट्रैक को गुज्जर आन्दोलन कारियों ने जाम कर रक्खा है। कितनी ही ट्रेन रद्द कर दी गई और कितनी ही ट्रेनों के रास्ते बदल दिए गए। और जब ये आन्दोलन और बढ़ा तो इसने दूसरे राज्यों मे भी अपना रूप दिखाया जैसे दिल्ली ,यू,पी,वगैरा मे जब ये आन्दोलन बढ़ा तो ना केवल रेलवे ट्रैक बल्कि सड़कों को भी बंद किया गया और चक्का जाम किया गया।

अभी गुज्जरों का आन्दोलन चल ही रहा था कि केन्द्र सरकार द्वारा की गई पेट्रोल ,डीजल ,और एल,पी,जी,गैस के दामों मे हुई बढोत्तरी और महंगाई को लेकर लेफ्ट ने आन्दोलन का एलान कर दिया। लेफ्ट पार्टी यू.पी.ए.सरकार मे पहले दिन से ही उनकी नीतियों के ख़िलाफ़ जब-तब रुठती रहती है और समर्थन वापसी की धमकी भी देती रहती है पर बस जनता के लिए ही वो सरकार का साथ दे रही है। इस तरह से धमकियाँ देते हुए लेफ्ट ने साल तो निकाल ही दिए है पर अब पेट्रोल के दामों के बढ़ने पर एक बार फ़िर लेफ्ट ने समर्थन वापसी की धमकी दे दी है। और सरकार को अपना आक्रोश दिखाने के लिए बंद का एलान कर दिया। २ दिन के इस बंद ने कोलकत्ता मे जन -जीवन को बिल्कुल ठप्प कर दिया था । अब जब लेफ्ट सरकार मे होते हुए सरकार के ख़िलाफ़ बंद का एलान करेगी तो बी.जे.पी.तो विपक्ष की पार्टी है उसने भी बंद का एलान कर दिया है

क्या आन्दोलन करने वाले ये नही सोचते है कि उनके इस आन्दोलन और बंद से जनता को कितनी परेशानी होती हैउन्होंने तो बंद का एलान किया और जो कोई सड़क पर निकला उसकी गाड़ी को तोड़ दियाराज्य की बसों को तोड़ना आग लगाना, ये कैसा आन्दोलन है जिसमे जनता को परेशानी और मुसीबत के सिवा कुछ नही मिलता हैकिसी का इम्तिहान होता है तो बंद के चलते वो समय पर इम्तिहान देने नही जा पाते क्यूंकि रास्ते बंद होते है । जब ट्रेन कैंसिल होती या या कोई फ्लाईट कैंसिल होती है तो उससे यात्रा करने वालों को कितनी मुसीबत होती है। महीनों पहले कराया गया रिजर्वेशन बेकार हो जाता है। जहाँ गंतव्य पर पहुँचना है वहां पहुँच नही सकते है। ट्रेन को रोक कर वो किसका भला करते है क्या कभी रोकी गई ट्रेन के यात्रियों से इन्होने पूछा है कि उन्हें इस तरह घंटों तक रोके जाने पर कैसा लग रहा है।

ट्रेन हो या सड़क जब भी चक्का जाम या रास्ता रोको होता है तो ना तो किसी सरकार को और ना ही आन्दोलन कारियों को कोई तकलीफ होती है अगर किसी को तकलीफ होती है या परेशानी होती है तो वो है आम आदमी जो हम और आप है।