Tuesday, June 10, 2008

अभी हाल मे ही गोवा मे मराठी और इंग्लिश की कक्षा दस की इतिहास और सोशल साईंस की किताब छप कर आई है और जिसे शिक्षा विद प्रोफेसर सुरेश अमोनकर ने तुरंत ही इस किताब को वापस लेने को कहा है। क्यों तो इस लिंक को पढिये और navhind times मे विस्तार मे छपी इस ख़बर को भी पढिये।

इतना ही नही आज ही अखबार मे ख़बर है कि केरल की क्लास ५ और ७ की इतिहास की किताब मे भी महात्मा गांधी को अपमान जनक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

7 Comments:

  1. mehek said...
    omg,if the study text books only r printed without prior vigilance,and wrong history is tought to pupils,what the future generation will think about the prestigious past? bahut choukanna rehna hoga shikshan samiti ko kitab chappne mein
    Priyankar said...
    जब 'गुणवत्ता' और 'वस्तुनिष्ठता' से मुंह फेरकर तदर्थवाद और चापलूसी की राह पर चल पड़ते हैं तो ऐसी ही पाठ्य-पुस्तकें तैयार होती हैं . 'क्वालिटी' और 'ऑब्जेक्टिविटी' अच्छी पाठ्य-सामग्री तैयार करने के लिए अनिवार्य हैं .
    बाल किशन said...
    प्रियंकर जी से पूर्ण सहमत हूँ.
    बहुत ही दुखद और शर्मनाक घटनाक्रम.
    संजय बेंगाणी said...
    तो गाँधीजी नस्लवादी थे? :) जय हो....
    सोनाली सिंह said...
    प्रियंकर जी ने बिल्कुल सही कहा। उनके विचारों से
    हम भी पूरी तरह से सहमत हैं।
    DR.ANURAG said...
    sachmuch dukhad hai.priyankar ji se puri tarah sahmat hun...
    Udan Tashtari said...
    प्रियंकर भाई पूरी बात कह गये.

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