Sunday, June 15, 2008

पिता के बारे मे जितना कहा और लिखा जाए वो कम है। पिता की छत्र छाया मे पल कर बड़े होना जिसमे संस्कार और संरक्षण के साथ-साथ प्यार भी खूब मिलता है ।


पापा जिनका हाथ पकड़
कर चलना सीखा
जिनकी उंगली पकड़ कर
आगे बढ़ना सीखा
याद नही कभी जब
आपने जोर से डांटा हो
पर रिक्शे पर अपने पैरों
पर बिठा कर घुमाने
ले जाना खूब याद है

आज फादर्स डे के दिन
हम सब भाई-बहनों की
ओर से पापा आपको
हैप्पी फादर्स डे
हम सबको गर्व है कि
हम आपके बच्चे है।


ब्लॉगर परिवार के सभी सदस्यों को फादर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएं

12 Comments:

  1. Manish said...
    पिताजी को हमने भी बधाई दी। जीवन में जो कुछ कर पाए हैं और जो सोच विकसित की है वो उनकी दी हुई नींव पर ही आधारित है। शुक्रिया इस प्यारी सी पोस्ट के लिए।
    mehek said...
    pita divas par ye kavita rupi bhav bahut achhe lage,aapko bhi father's day mubarak
    ajay kumar jha said...
    shukra hai ki pita diwas ko bhee chitthajagat mein jagah milee. aapkaa dhanyavaad.
    Gyandutt Pandey said...
    हमें तो ध्यान ही न था इस दिन का। लगता है बिटियां ही ध्यान रखती हैं इस दिन का!
    Lavanyam - Antarman said...
    बड़ी प्यारी यादें दीं आपने ममताजी और कविता भी -
    Happy Father's Day for your Papa & to Every one -
    Rgds,
    L
    डा० अमर कुमार said...
    बहुत ही सामयिक पोस्ट,
    इत्तेफ़ाक़ से मेरी बेटी इस वर्ष यहीं है,
    बेटियाँ, यानि कि खुशबू का झोंका ! न जाने आने वाले कल को किसकी
    बगिया महकायेंगी ? सो, फादर्स डे का सुरूर घर से निकल कर ब्लागर पर
    आ ही नहीं पाया । इस पोस्ट ने वह कसक पूरी कर दी ।

    सत्यवचन, ममता ! एक पिता अपने पुत्र को जिस तरह सँवारता है, और
    अपने बेटे का कद अपने से बड़ा देखना चाहता है, यह मिसाल कहाँ मिलेगा ?
    sanjay patel said...
    पिता के वजूद को प्रणाम ममता जी.
    दिनेशराय द्विवेदी said...
    आज पितृ दिवस पर न जाने क्यों अजीब सा लग रहा है। जो पिता मौजूद हैं उन्हें तो हम रोज स्मरण करते ही हैं, जो नहीं हैं उन्हें भी रोज स्मरण करते हैं। क्यों न करें? इस के लिए कोई एक विशेष दिन क्यों। वैसे भी मैं तो यह मानता हूँ कि हर संतान अपने माता-पिता का पुनर्जन्म होता है।
    फिर भी हम सब के साथ हैं, सब को पितृ दिवस पर शुभकामनाएँ।
    yunus said...
    हमने भी पिताजी को फोन करके बधाई दी । और ढेर सारी बातें कीं । बहुत बहुत अच्‍छा लगा ।
    महेंद्र मिश्रा said...
    पितृ दिवस पर शुभकामनाएँ,
    उन्मुक्त said...
    आपके पिता जी को हमारी तरफ से भी बधाई।
    कंचन सिंह चौहान said...
    पिता..... जीवन बगिया का छायादार वृक्ष....!

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