Monday, June 16, 2008



जब हमे इस केव के बारे मे पता चला तो हमे जरा आश्चर्य भी हुआ था कि गोवा मे गुफा और वो भी पांडवों की तो ये तय हुआ किसी दिन केव यानी गुफा को देखने भी जायेंगे ये पांडव केव्ज रिवोना मे स्थित है और रिवोना panjim से ७०-७५ कि .मी दूर है पर मडगांव से पास है करीब ३०-४० कि.मी.

तो एक दिन चल दिए हम लोग रिवोना मे पांडव केव्ज देखने और ये ७० कि.मी.तय करने मे करीब डेढ़ से दो घंटे लग जाते है वैसे अगर कार का चालक ज्यादा तेज हो तो भी करीब-करीब इतना ही समय लगता है क्यूंकि रिवोना कि सड़क जरा पतली है और चूँकि उधर mines है इसलिए उस रास्ते पर ट्रक बहुत चलते हैअगर आप दोपहर मे उस रास्ते जायेंगे तो सड़क पर लोग कम ही दिखते है बस बीच-बीच मे कोई ट्रक आते-जाते दिखते है

खैर जब रिवोना पहुंचे तो पांडव केव के बारे मे लोगों से पूछा तो एक बुड्डे से आदमी ने मुख्य सड़क से नीचे जाने वाली पगडण्डी की ओर इशारा करते हुए कहा कि वहां पर पांडव केव्ज है उबड़-खाबड़ से सड़क पर जब कार को मोडा तो लगा की आगे तो रास्ता ही नही है पर उस आदमी ने कहा की यहीं आगे पांडव केव्ज है पर हम को तो बस एक पगडण्डी और जंगल ही दिख रहा था चलते-चलते हम लोगों ने उससे पूछा कितनी दूर है तो वो बोला बस मिनट का रास्ता है आप हमारे साथ चलिए

और हम लोग चल पड़े और जरा सी दूर चलने पर उसने एक पहाड़ की तरफ़ इशारा करके कहा की यही पांडव केव है आप इस छोटी सी सीढ़ी से ( पत्थर रखे थे बस) से चले जाइए और ये कहता हुआ वो आगे चला गयाऔर हम उन दो पत्थर से बनी सीढ़ी पर चढ़कर पहुँच गए पांडव केव्ज मेइस गुफा के बारे मे ज्यादा नही जानते है क्यूंकि ना तो गुफा के आस-पास कुछ लिखा था और ना ही लोगों को ज्यादा पता हैपर कुछ लोग ये मानते है कि यहां पर बने ऊँचे स्थान पर बैठ कर बौद्ध गुरु शिक्षा दिया करते थे


इस केव के न्दर एक ऊँचा सा स्थान बना हुआ है जिसे बैठने के लिए इस्तेमाल किया जाता होगा इस गुफा के अन्दर जाने पर इसकी छत कुछ पीली लाल और सफ़ेद सी दिखी. गुफा के बाहर से अन्दर कुछ इस तरह दिखता है(जैसे ये ऊपर बायीं ओर वाली फोटो )गुफा के अन्दर से बाहर सिर्फ़ पेड़-पौधे ही दिखते है (इस नीचे दायीं वाली फोटो की तरह )

इस गुफा के बगल से -१० सीढियां खड़ी -खड़ी और कुछ टूटी हुई से चढ़कर ऊपर जाते है तो ऐसा लगता है मानो
किसी पहाड़ पर गए हो और वहां एक घाटी सी दिखाई देती है

जरा इस आखिरी फोटो को ध्यान से देखें तो आपको कुछ आकृति सी नजर आएगीचलिए हम ही बता देते है इस फोटो मे अगर आप ध्यान से देखें तो एक skull जैसा दिखता हैहो सकता है कोई ...................? जब फोटो खींची थी तब तो ध्यान नही गया था पर बाद मे फोटो देखने पर ऐसा लगा। :)


ऐसी ही एक दो और गुफाएं भी है गोवा मे आगे हम उनका भी जिक्र करेंगे। ।हालांकि इस गुफा पर पहुंचकर लगता है कि क्या इतनी दूर इसे देखने आना ठीक थातो हम यही कहेंगे कि चूँकि हम यहां रह रहे है और हमे समय की कोई कमी नही है इसलिए हम सिर्फ़ इसे ही देखने इतनी दूर जा सकते है

नोट-- वैसे जब भी जाएं तो सिर्फ़ इस गुफा को देखने ना जाए बल्कि उसी रास्ते मे palacio de deao भी पड़ता है और कुछ और जगहें भी देखने के लिए है

7 Comments:

  1. Gyandutt Pandey said...
    विचित्र है यह देश और विचित्र थे पाण्डव - कहां नहीं गये?! यहां लक्षागिर है - जहां उनके दाह का यत्न हुआ था। झाबुआ के पास है पंचपिपलिया - मुझे बताया गया कि भीम को हिडिम्बा वहां मिली थी। अगर पाण्डवों को वनवास-अज्ञातवास न हुआ होता तो ये स्थान कभी एक सूत्र में बंध न पाते!
    अभिषेक ओझा said...
    अब जाने की जरुरत भी क्या है वैसे ही आपने इतनी अच्छी सैर करा ही दी है :-)
    नीरज गोस्वामी said...
    ममता जी
    जरूरी नहीं होता की आप जिसे खोजने जायें वो स्थान बेहद खूबसूरत हो, खोज आनंद के लिए की जाती है और आप के वर्णन से लगता है की आप ने खूब आनंद लिया है इस यात्रा का. गोवा के बारे में ये नयी जानकारी दी है आप ने जिसके बारे पहले ना कभी सुना न पढा. बधाई.
    नीरज
    Udan Tashtari said...
    निश्चित ही आनन्द आया होगा. जब हमें पढ़कर और तस्वीर देखकर आ गया तो आप तो हो आईं. बहुत आभार इस जानकारी के लिए.
    DR.ANURAG said...
    jaankari ke liye shukriya...par kuch log yaahn hamare shahar meerut ke najdeek hastinapur me dabe ek mahal ko pandvo se juda batate hai....par aapki tasveere bhi badhiya rahi.
    Manish Kumar said...
    पचमढ़ी में भी एक पांडव गुफा है। कहते हैं कि पाण्डव अपने १ वर्ष के अज्ञातवास के समय यहाँ आकर रहे थे । चट्टानों को काटकर बनायी गई पाँच गुफाओं यानि मढ़ी के नाम पर उस जगह का नाम पचमढ़ी पड़ा ..
    वैसे शुक्रिया यहाँ इन गुफाओं के बारे में बताने के लिए।
    माया ಮಾಯಾ மாயா માયાমাযা said...
    बहुत सुंदर लेख है

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