Sunday, June 22, 2008




क्या आप इसे पहचानते है अरे क्या कहा आपने इसे नही पहचाना चलिए कुछ हिंट दे देते है. साहब ,बीबी और गुलाम मे इसने वहीदा रहमान को तंग किया था तो परिचय मे जया भादुरी को और भंसाली वाली देवदास मे ऐश्वर्या राय को तंग किया था गुन-गुन करते हुए। आज सुबह बालकनी की खिड़की से अन्दर गए थे और हमने बिना समय गंवाए झट से मोबाइल से फोटो खींची और फट से esnip से गाने लोड किए और आपके सामने पेश है।
अब हमने सोचा कि जब भँवरे की फोटो लगा ही रहे है तो अंडमान वाले भँवरे की भी लगा ही देदाहिनी ओर पौधों के बीच जो भँवरे की फोटो है वो अंडमान की है

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11 Comments:

  1. डा० अमर कुमार said...
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    डा० अमर कुमार said...
    ' गुनगुना रहे हैं भँवरें , खिल रही कली कली '
    ' दिल का भँवर करे पुकार, प्यार का राग सुनो '
    ' भँवरे ने खिलाया फूल. फूल को ले गया राजकुँवर '
    भी शामिल किया जा सकता था । है कि नहीं ?
    बीते दिन याद दिलाने का शुक्रिया, ममता !
    रंजू ranju said...
    गुन गुन भंवरा के साथ सुंदर गीत बहुत अच्छा ..गाने तो कई याद आ गए ..वैसे यह मेरा मनपसंद है भंवरा बड़ा नादान हाय ..:)
    Gyandutt Pandey said...
    वाह, निर्द्वन्द घूमने वाला भ्रमर शीशे से चकमा खा रहा है!
    दिनेशराय द्विवेदी said...
    ओ भंवरे धीरे से जाना बगियन में...
    एक और मधुर गीत है।
    महेंद्र मिश्रा said...
    apka madhur geet achcha laga sath hi dwadi ji ki teep bhi sateek fit baith rahi hai .dhere se jana bagiyan me........dhanyawaad.
    mamta said...
    आप सबका शुक्रिया।

    अमर जी और दिनेश जी अगली बार ध्यान रक्खेंगे ।
    Udan Tashtari said...
    भौंरा राम भी गीत सुनते हुए उड़ रहे हैं, ऐसा लगा. :)
    mehek said...
    :);)sundar tasveerein,bhara bada nadan hai,bagiyan ka mehman hai:);)sundar geet
    Lavanyam - Antarman said...
    भँवरे ने खिलाया फूल. फूल को ले गया राजकुँवर --
    Prem -Rog wala ye Geet, Papaji ka likha hua hai :)
    apki lee huee dono Bhanwaron ki foto dekh ker muskurane lage --
    Geet bahut badhiya hai -
    Sahib Bibi Gulam haal hee mei dekhi aur maja aa gaya - Guru Dutt ji great Director aur artist the -
    Geeta Dutt ki aawaz ka jadoo, aaj bhee kayam hai -
    मीनाक्षी said...
    ममता जी, आपके कलाकार मन की जितनी तारीफ की जाए कम है..उड़ते भँवरें को कैद करके संगीत के सुरों को आज़ाद कर दिया.... बहुत अच्छा लगा...

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