Tuesday, June 17, 2008

अभी तक जोर-जोर से खर्राटे लेने से साथ वाले की नींद ही ख़राब होती थी पर इससे खर्राटे लेने वाले के ऊपर कोई दुष्प्रभाव नही पड़ता था । पर अब अगर आप जोर-जोर से खर्राटे लेते है तो जरा सावधान हो जाइए। क्यूंकि आज पेपर मे छपी ख़बर के मुताबिक जोर -जोर से खर्राटे लेने से याददाश्त पर असर पड़ सकता है। AIIMS के डॉक्टर के.के.हांडा का कहना है कि तकरीबन ६० प्रतिशत लोग जो जोर-जोर से खर्राटे लेते है वो OSA से ग्रस्त होते है। OSA यानी obstructive sleep apnoea । OSA मस्तिष्क के tissue को नुकसान पहुँचाती है । पूरी ख़बर इस लिंक पर जाकर पढे।

8 Comments:

  1. कुश एक खूबसूरत ख्याल said...
    ऊड़ी बाबा!!! ये तो बड़ी गड़बड़ वाली बात है
    DR.ANURAG said...
    ek aor baat isse aapki memory par dushprbhaav padta hai....aor ye proven theory hai.
    रंजू ranju said...
    खतरनाक ख़बर है यह तो :) और जिनको निनी न आए तो ??
    david santos said...
    Hello, Mamta!
    I loved this post and this blog.
    Happy day
    अभिषेक ओझा said...
    हा हा.. कईयों को तो ये ख़बर पढ़ के ही नींद नहीं आएगी :-)
    Udan Tashtari said...
    अपने बस में कहाँ है खर्राटे लेना या न लेना. हमको तो एक मशीन दी जा रही हैं जिससे ऑक्सीजन मास्क लगा कर सोईये. खार्राटे का निदान हो जायेगा या फिर दुबले हो जाईये. मोटे लोंगों के साथ sleep apnoea की समस्या ज्यादा होती है.
    Gyandutt Pandey said...
    मेरी पत्नीजी कहती हैं मैं खर्राटे लेता हूं और मैं उन्हे एक्यूज करता हूं कि वे लेती है। खर्राटे का एक नफा तो है कि हम परस्पर झगड़ लेते हैं! :-)
    कंचन सिंह चौहान said...
    ye khabar aani hi chahiye thi..vo kya hai ki ham kaviyo ko to need aati nahi hai ye kharrate bharne vale...kavita bhi nahi likhne dete bahut disturb karte hai

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