Saturday, August 30, 2008

आम तौर पर हम इलाहाबाद प्रयाग राज ट्रेन से जाते है पर इस बार सोचा की क्यूँ न डिबरू गढ़ राजधानी से दिल्ली से इलाहाबाद जाया जाए। इसका सबसे बड़ा फायदा था कि ये ट्रेन दिन मे २ बजे दिल्ली से चल कर रात साढे आठ- नौ तक इलाहाबाद पहुँच जाती है। चूँकि ५ बजे वाली राजधानी रात मे १२-१२.३० बजे पहुँचती है इसलिए २ बजे वाली राजधानी का आप्शन ठीक लगा । तो सबसे पहले नेट पर टिकट बुक करने चले तो पहले तो irctc की साईट ने परेशान किया। पहले साईट नही खुल रही थी फ़िर जैसे ही ऑनलाइन पेमेंट की कि irctc की साईट ब्लॉक हो गई। अब फ़िर बैंक को फ़ोन किया की पेमेंट रोक दे और फ़िर irctc को फ़ोन किया तो वहां के कस्टमर केयर से कहा गया की टिकट बुक नही हुआ है और पेमेंट वापिस बैंक मे भेज दी जायेगी। irctc वालों ने कहा की साईट मे कुछ गड़बड़ है और २-३ दिन बाद साईट ठीक होगी तो उस दिन टिकट बुक करने का इरादा छोड़ दिया।

२ दिन बाद यानी १८ की सुबह-सुबह नेट पर टिकट बुक किया और इलाहाबाद का २२ अगस्त की राजधानी काटिकट वेटिंग लिस्ट मे मिला पर लौटने का इलाहाबाद से प्रयाग राज का कन्फर्म टिकट मिल गया था इसलिए खुश भी हुए । १९ को यूँ ही फ़ोन से जब राजधानी का p.n.r. नम्बर चेक किया तो बताया गया कि chart तैयार हो चुका है और वेटिंग टिकट कन्फर्म हो गया है।हाँ मन मे ये जरुर सवाल उठा रहा था कि इतने पहले chart कैसे बन गया जबकि chart तो ट्रेन के dep. टाइम से ५-६ घंटे पहले बनता है पर चूँकि टिकट कन्फर्म बता रहा था तो बस हम तो खुश हो गए की चलो टिकट कन्फर्म हो गया और सबको बता भी दिया कोच और सीट नंबर। पर फ़िर जब २० को नेट पर देखा तब तो बहुत गुस्सा आया कुछ अपने पर और कुछ irctc की साईट पर क्यूंकि राजधानी का टिकट २२ की जगह १८ का हुआ था मतलब जिस दिन हम टिकट बुक कर रहे थे उसी दिन का रिज़र्वेशन हो गया था.१८ का और चूँकि २ दिन बीत गए थे इसलिए पूरे पैसे गए रेलवे के खाते मे। hi tech होने का नुक्सान भी होता है:)

पर यहीं पर सब ठीक हो जाता तो क्या बात थी। एक बार फ़िर २० को ऑनलाइन टिकट बुक करने चले तो एक बार फ़िर गड़बड़ होने से बच गई। जहाँ वो यात्रा की तारीख कन्फर्म करते है वहां २० लिखा था २२ की जगह . खैर तारिख सही की और फ़िर जैसे ही पेमेंट किया कि साईट फ़िर रुक गई । अब बैंक दिखा रहा था की पेमेंट हो गई और उधर टिकट नजर ही नही आ रहा था। पर खैर गनीमत ये रही की हमने irctc की साईट को बंद नही किया और ५ मिनट बाद टिकट दिख गया। और अबकी हमने खूब यानी ३-४- बार टिकट और तारीख वगैरा चेक किया।और तब जाकर चैन की साँस ली।

पर अभी भी कुछ और झेलना बाकी था। खैर २२ अगस्त को २ बजे की राजधानी मे सवार हुए और ठीक २ बजे राजधानी चल भी दी अपनी ते रफ़्तार से । सभी लोग मस्त थे और आपस मे बात कर रहे थे की नौ बजे तक घर पहुँच जायेंगे। खैर ३ बजे लंच खा पीकर हम तो सो गए पर साढे तीन बजे नींद खुली तो देखा की ट्रेन एक पुलिया पर रुकी हुई है और बारिश हो रही थी।चूँकि कोई station नही था इसलिए पता नही चल रहा था कि कहाँ है। पहले १०-१५ मिनट तक तो कुछ पता नही चला फ़िर मालूम हुआ की गाड़ी के इंजन से एक साड़ टकरा कर कट कर मर गया है और साड़ के कटने की वजह इंजन ख़राब हो गया है।और दूसरा इंजन आने मे समय लगेगा। करीब २ घंटे तक हम लोग वहीं खड़े रहे फ़िर एक दूसरा इंजन आया तब ट्रेन चली तो पता चला की खुर्जा भी नही पहुंचे थे।ट्रेन कितनी देर रुकी थी ये आप इन दोनों फोटो को देख कर भी समझ जायेंगे क्यूंकि जब बहुत देर तक ट्रेन नही चली तो कुछ लोग बोर होकर चले गए थे। :)

खैर खुर्जा से जब राजधानी चली तो वो राजधानी कम रुकने वाली ट्रेन माने पैसेंजर ज्यादा हो गई थी । हर station पर २-४ मिनट के लिए खडी हो जाती।अब जब ट्रेन लेट हो तो ये तो झेलना ही था। खुर्जा से अलीगढ और tundala तो आया पर इटावा और तो कानपुर तो आने का नाम ही नही ले रहा था। ऐसा लग रहा था मानो ये दोनों station कहीं गायब हो गए है। और जब १० - १०.३० बजे कानपुर आया तब लगा कि चलो अब तो इलाहाबाद पहुँच ही जायेंगे। और सवा बारह बजे रात मे इलाहाबाद तो पहुंचे पर थक कर चूर हो गए थे बोरियत की वजह से।बाद मे हम सोचने लगे की इससे अच्छा तो ५ बजे की ही राजधानी ले लेते। पर जब झेलना लिखा था तो उससे कैसे बचते । :)

बाकी इलाहाबाद मे कैसा रहा फ़िर अगली पोस्ट मे लिखेंगे

Tuesday, August 26, 2008


इस बार बहुत साल बाद जन्माष्टमी पर हम इलाहाबाद मे है तो सोचा की क्यूँ न इलाहाबाद की जन्माष्टमी की झांकी की कुछ फोटो आप लोगों तक पहुंचाई जाए। अब वैसे तो जन्माष्टमी दो दिन हले ही मनाई गई थी पर इलाहाबाद के iskcon मन्दिर मे ९ दिन तक कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। अब इलाहाबाद मे iskcon और वो भी बलुआ घाट मे ये तो हमें पता ही नही था और अब तो बलुआ घाट कहाँ है याद ही नही है। खैर घर के बाकी लोगों को पता है तो कल हम और भाभी गए iskcon मन्दिर और वहां जाने के लिए तकरीबन पूरा चौक माने साउथ मलाका ,विवेक नन्द मार्ग,शिव चरण मार्ग,हटिया बांस मंडी होते हुए बलुआ घाट पहुंचे और आरती देखि थी



आरती के पहले भजन और फ़िर आरती शुरू हुई पहले अगर बत्ती से फ़िर एक दीपक फ़िर ५ दीपक ,उसके बाद शंख,वस्त्र ,फूल,चंवर,मोरपंख,वगैरा से भगवान् की आरती की गई।आरती के दौरान भजन हो रहा था और उस भजन पर लोग झूमते रहे नाचते रहे और कृष्ण भक्ति मे लीं रहे। इस फोटो मे भगवान् को 56 भोग का प्रसाद आप देख सकते है।



ये कुछ फोटो भाभी के कजिन के घर की है जिन्होंने जन्माष्टमी सजाई थी। यहाँ पर राधा और कृष्ण झूले पर बैठे थे और एक सिल्वर डोरी से हर कोई उन्हें झुला झूलता था और हमने भी भगवान् को झुला झुलाया था।



जब तक हमारी अम्माजी थी (सास जी )वो हर साल जन्माष्टमी मे झांकी सजाती थी। और बहुत सुंदर सजाती थी। इसके लिए अम्मा जी रंग,रुई,बालू,खिलौने ,वगैरा का इस्तेमाल करती थी। तो आप लोगों की जन्माष्टमी कैसी रही।


फोटो और वीडियो तो बहुत है पर अपलोड होने मे समय लग रहा है इसलिए बाकी बाद ।

Thursday, August 21, 2008

और अगर नही सुने है तो आज यहाँ पर सुन लीजिये। इस आमिर फ़िल्म के गीतों मे सूफियाना अंदाज हमें तो बहुत पसंद आया है। और आशा है कि आपको भी पसंद आएगा। पसंद आए या ना आए बता जरुर दीजियेगा। :)
पहले दो गाने आमिर फ़िल्म के हैदोनों ही गाने अलग अंदाज और मूड के हैपर जिंदगी की हकीकत के बहुत करीब है

बाद के दोनों गाने फ़िल्म खुदा के लिए के हैहमे जितनी फ़िल्म पसंद आई थी उतनी ही इसके गाने भी


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आप सभी की शुभकामनाओं की वजह से पापा बिल्कुल ठीक है और इलाहाबाद मे है और हम भी कल इलाहाबाद जा रहे हैतो अगली पोस्ट हम इलाहाबाद से लिखेंगे

Monday, August 18, 2008

गोवा से दिल्ली आने का प्रोग्राम तो जून में ही बन गया था और इसीलिए हमने दिल्ली के लिए ५ जुलाई की फ्लाईट भी बुक की हुई थी । आम दिनों की तरह २५ जून की शाम को भी हम और पतिदेव उस वीकएंड में गोवा में होने वाले फ़िल्म फेस्टिवल के लिए फिल्में सेलेक्ट कर रहे थे । कि तभी हमारी जिज्जी का फ़ोन आया तो थोडी देर बात करने के बाद जिज्जी ने हमसे पूछा कि क्या तुम्हारी पापा से बात हुईतो हमने कहा नहीजिज्जी के इस तरह पूछने पर हमें थोड़ा अजीब सा डर लगा और हमने जिज्जी से पूछा क्यूँ ?

यूँ तो पापा से नियमित रूप से बात होती रहती थी और है पर २३-२४ जून को पापा से बात नही हुई थी और २५ जून को जब फ़ोन पर जिज्जी ने बताया की पापा की तबियत बहुत ख़राब हो गई है । हमें तो यकीन ही नही आया क्यूंकि दो दिन पहले ही पापा से बात हुई थी और उस समय बस उन्हें बुखार ही था।जिज्जी से बात करने के बाद भइया को इलाहाबाद फ़ोन किया और उन से पापा की तबियत का पता चला , तब तो कुछ देर के लिए समझ ही नही आया की क्या करें फ़िर हमने भइया से कहा कि हम इलाहाबाद आ जाते है । तब भइया ने कहा कि अगले दिन वो पापा को लेकर दिल्ली में AIIMS में एडमिट कराने के लिए लाने वाले है।इसलिए हम अभी न आए । AIIMS पहुँच कर भइया जैसा होगा वैसा बताएँगे । हम असमंजस की स्थिति मे थे और इससे पहले कि हम कुछ सोचते पतिदेव ने कहा कि तुम चली जाओ क्यूंकि एक हफ्ते बाद तो तुम जा ही रही थी।और उनकी ये बात हमें भी ठीक लगी सो तुंरत ही रात में अगले दिन की हमने फ्लाईट बुक करी और २६ जून को दिल्ली आ गए।

और जब AIIMS पहुंचकर पापा को देखा तो एकदम से होश ही उड़ गए थे ।पापा की इतनी ज्यादा तबियत ख़राब होगी और उनको हम ऐसी हालत में देखेंगे ये तो सपने में भी नही सोचा था। पापा को साँस लेने में बहुत ही ज्यादा तकलीफ हो रही थी । और वो ठीक से बोल भी नही पा रहे थे। हॉस्पिटल में पता चला की पापा को जबरदस्त chest infection और निमोनिया हो गया था। और kidney की प्रॉब्लम भी हो गई थी। पर AIIMS के डॉक्टरों डॉ.तिवारी (nefro) और डॉ. नवल किशोर (medi) और इनकी टीम ने (डॉ,उपाध्याय ,डॉ सहजल,वगैरा )जिस तरह से पापा का इलाज किया कि आज पापा हम सबके साथ है। AIIMS के इन डॉक्टरों की जितनी तारीफ की जाए और जितना भी शुक्रिया किया जाए वो कम है।क्यूंकि इन डॉक्टरों ने पापा को मौत के मुंह से वापस खींचा है। यहाँ पर डॉ.तिवारी की एक बात का जरुर जिक्र करना चाहेंगे जो उन्होंने कही थी की किसी भी मरीज के ठीक होने में इन ४ चीजों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है ) god , ) resource यानी डॉक्टर,परिवार आदि , ) will power, ) destiny


शुरू के २० दिन तो रोज लगता था कि आज का दिन निकल गया अब अगले दिन भी सब ठीक रहे पर हर रोज एक नई प्रॉब्लम हो जाती थी।कभी काउंट बढ़ जाता तो कभी यूरिया तो कभी hb कम हो जाता।तो कभी chest में पानी भर जाता तो कभी डाइलिसिस के लिए पापा को ले जाया जाता। पर चूँकि हम सभी भाई-बहन एक साथ थे और हर कोई एक-दूसरे को मॉरल सपोर्ट दे रहा था । और शायद इसी वजह से पापा के साथ-साथ हम सब भी उस मुसीबत की घड़ी को झेल पाये। पापा की बीमारी में हम सब भाई-बहन तो AIIMS में थे पर हम सभी के पति देवों ने और बच्चों ने भी हम सभी का बहुत साथ दिया क्यूंकि उस सवा महीने में हम में से किसी को भी घर-बार की कोई सुध नही थी। क्या गोवा क्या इलाहाबाद क्या लन्दन क्या लखनऊ और क्या दिल्ली सब कुछ बस AIIMS का प्राईवेट वार्ड नम्बर 401 ही हो गया था।

पापा की बीमारी के दौरान AIIMS में सवा महीना कैसे गुजरा ये सोच कर आज भी मन विचलित हो जाता है

Saturday, August 16, 2008

राखी का त्यौहार और इसके साथ जुड़ी यादें साल दर साल संजोते है।बचपन मे हर राखी मे भइया हम सब बहनों को कोई न कोई सरप्राइज जरुर देते थे । चूँकि हम घर मे सबसे छोटे है तो राखी बाँधने मे हमारा नंबर आख़िर मे आता था। तो जब बड़ी दीदी लोग भइया को राखी बांधती तो भइया दीदी लोगों को कोई कोई तोहफा देते थे और और जब हम राखी बांधते तो भइया ऐसे दिखाते थे मानो हमारे लिए कुछ भी नही लाये होंऔर जैसे ही हमारे आंसू टपकने को होते कि भइया चुपके से हमारे लिए लाया हुआ गिफ्ट हमें दे देते और हमारे चेहरे पर खुशी और हँसी दोनों फूट पड़ती थी। :)

भइया की कलाई पर राखी बांधते हुए हम ये गाना हमेशा गाते है और आज हम वही गाना अपने भइया के साथ -साथ आप सबके के लिए भी यहाँ पर लाये है। और इस भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना गाने के साथ-साथ राखी के कुछ और बहुत ही प्यारे गाने भी आप सुनिए ।

ब्लॉगर परिवार के सभी सदस्यों को राखी की बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं


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Thursday, August 14, 2008




आजादी के इकसठवें साल पर आज तक का ऑफर एक साल के साथ एक साल फ्री। :)

यकीन न आए तो जरा इन दो फोटो को देखें ।
इन दोनों फोटो मे राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के राष्ट्र के नाम पर दिए गए संदेश की समीक्षा की जा रही थी।












आज तक जिसे हमेशा नंबर वन चैनल का खिताब मिलता है उससे कम से कम ये उम्मीद तो नही की जा सकती है।और ये न्यूज़ काफ़ी देर तक दिखाई गई थी। अफ़सोस सबसे तेज हिन्दी चैनल का ये हाल है। :(