Saturday, April 26, 2008
क्रिकेट जिसे अभी तक तो सभी लोग जेंतिलमैंस गेम कहते आए है पर अब क्रिकेट का रूप बदलता जा रहा है।पहले क्रिकेट मे सिर्फ़ खेल को प्राथमिकता दी जाती थी पर अब खेल को कम मनोरंजन को ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है।अब ६०-७० के दशक मे सिर्फ़ टेस्ट मैच जो ५ दिन तक चलते थे होता थे और सिर्फ़ सर्दियों मे ही होते थे और क्रिकेट के उन ५ दिनों मे लोग सब कुछ भूल जाते थे। धीरे-धीरे ५ दिवसीय टेस्ट मैच के साथ-साथ वन डे मैच की शुरुआत हुई। और लोगों को मजा भी आने लगा क्यूंकि वन डे मे एक ही दिन मे जीत-हार का फ़ैसला हो जाता है । और खेल मे रोमांच भी बना रहता है। क्रिकेट मे हार जीत तो होती पहले भी होती ही थी पर आजकल तो हार-जीत के साथ-साथ गाली-गलौज होना आम सी बात हो गई है।
और अब वन डे से आगे t20 मैच आ गया । जिसमे वन डे से कहीं ज्यादा रोमांच होता है।और t20 मे एक और नई शुरुआत हुई चीयर गर्ल की जिन्हें बाकायदा विदेशों से लाया गया है पर अभी तक ये समझ नही आया की ये चीयर गर्ल टीम को चीयर करती है या जनता को या वो ख़ुद अपने आप को चीयर करती है । :) क्यूंकि खिलाड़ियों को चीयर करने के लिए तो मैदान मे मौजूद जनता ही काफ़ी होती है और जनता को चीयर करने के लिए खिलाडियों को बस अपने बल्ले का कमाल दिखाना होता है। अब पवार जी क्रिकेट को भी फ़ुटबाल की तरह का खेल बनाना चाह रहे है।अभी कल ही महाराष्ट्र की सरकार और जनता को चीयर गर्ल और उनके डांस और कपडों पर ऐतराज था पर क्या उन्हें ये नही पता की इन चीयर गर्ल को लाने वाले भी पवार ही है (महराष्ट्र के )। हर मैच के शुरू मे टी.वी.वाले चीयर गर्ल से जरुर बात करते है की उन्हें कौन सा खिलाड़ी पसंद है या वो किस तरह से अपनी टीम को चीयर करेंगी। अब पवार जी इन चीयर गर्ल को क्रिकेट की शान बढ़ाने के लिए लाये है और शत्रुघ्न सिन्हा इन्हे नचानियाँ कह कर इनका अपमान कर रहे है। अरे शत्रु जी लगता है पवार जी ने आपकी ये बात नही सुनी है वरना वो आपको आपके ही अंदाज मे खामोश कह देते।
अब कल के मैच के बाद तो ये कहना ठीक होगा कि भज्जी को गुस्सा क्यों आता है। अभी तक तो भज्जी और श्रीसंत विदेशी खिलाडियों से लड़ते थेऔर उन्हें क्रिकेट बोर्ड बचाता था पर अब जब ये दोनों ही आपस मे भिड़ गए तो बोर्ड क्या करेगा। पहले भी ये लोग मैदान मे गुस्सा दिखाते थे और गाली-गलौज भी करते थे पर अब तो अपने ही खिलाड़ियों को थप्पड़ और चांटे भी मारने लगे है। जिस तरह वन डे से t20 मे तरक्की हुई उसी तरह से गाली से चांटे की तरक्की हुई है।क्या खूब उदाहरण पेश किया है भारतीय क्रिकेट टीम का। कल साईमंड और गिलक्रिस्ट और पोंटिंग को इन दोनों महान भारतीय खिलाडियों ने खुश होने का मौका दे दिया। हारना तो किसी को भी बर्दाश्त नही होता है पर हार के बाद ऐसी हरकत करना तो बस उसी कहावत जैसा है खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे जैसा।
अब इस IPL के बाद क्रिकेट जेंतिलमैंस गेम कहा जायेगा या नही ये देखने की बात है।
6 Comments:
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- Gyandutt Pandey said...
April 26, 2008 at 12:00 PMWWF क्रिकेट!- Suresh Chiplunkar said...
April 26, 2008 at 12:57 PMभज्जी और श्रीसन्थ क्रिकेट में कुछ नहीं कर पा रहे, नालायक बाहर लड़कर ही मीडिया कवरेज ले रहे हैं… दोनों को ही लात मारकर टीम से बाहर करना चाहिये… एक पागल है दूसरा जोकर्…- राज भाटिय़ा said...
April 26, 2008 at 7:15 PMसभी बिके हे जनता को थोडी सी भी अकल हो तो क्रिकेट का वायकाट करे,अरे हमारे पास पेट भरने को अनाज नही किसान आत्म्हत्याए कर रहा हे ओर देश के नेता हमे क्रिकेट मे रिझा रहे हे,आधी जनता सडको पर सोती हे, पहले देश के वासियो का सोचे फ़िर वासी क्रिकेट का सोचे गे.- Manish said...
April 27, 2008 at 11:11 AMचलिए भज्जी की तो छुट्टी हो गई। वैसे आप किस टीम को सपोर्ट कर रही हैं?- mahendra mishra said...
April 27, 2008 at 5:32 PMलगता है कि यह भज्जी कि पुरानी आदत है हर जगह विवादग्रस्त हो रहे है आखिर इनमे कोई कमी होगी- mahendra mishra said...
April 27, 2008 at 5:35 PMवैसे ज्ञान जी की टीप सटीक लगती है





