९ बच्चों की मम्मी हमारी मौसी :)

अब बचपन के दिन तो हरेक के जीवन के सबसे सुखद और सुन्दर होते है ,इसमें तो कोई दो राय नहीं है। और बीते हुए दिन जब याद आते है तो कभी-कभी लगता है कि काश वो दिन फिर से दोबारा आ जाए। क्यूँ हम गलत तो नहीं कह रहे है ना। :)

आज अचानक हमे ये किस्सा याद आ गया । बात तो ७० के दशक की है । उस जमाने मे गर्मी की छुट्टियाँ बिताने के लिए कभी हम ननिहाल (फैजाबाद ) कभी ददिहाल (बनारस) या फिर अपनी छोटी मौसी के यहां (वो जहाँ भी रहती थी क्यूंकि मौसाजी का ट्रांसफर होता रहता था ) जाते थे , कभी ट्रेन से तो कभी कार से । और उस समय अक्सर ऐसा होता था कि अगर मौसी हम लोगों के यहां इलाहाबाद आती थी तो उनके वापिस लौटने पर हम लोग भी कुछ दिन के लिए उनके यहां चले जाते थे। या अगर हम लोग उनके यहां जाते थे तो हम लोगों के वापिस लौटने पर वो लोग हम लोगों के साथ इलाहाबाद आते थे । वैसे ये बड़ा ही रुटीन फीचर था। :)

ऐसी ही एक गर्मी की छुट्टी मे हम चारों बहने मौसी के यहां सीतापुर गए थे और जब कुछ दिन रहने के बाद वहां से इलाहाबाद वापिस लौटने लगे तो मौसी भी अपने पाँचों बच्चों के साथ हम लोगों के साथ चली। उस समय मौसी बहुत ज्यादा बड़ी नहीं थी । पर हाँ ५ बच्चे थे । अब उस ज़माने मे तो ४-५ बच्चे से कम होते भी तो नहीं थे। :)

सीतापुर से लखनऊ हम लोग मौसा जी की जीप से आये और फिर वहां से ट्रेन से इलाहाबाद के लिए चले।और सेकेंड क्लास के डिब्बे मे मौसी बच्चों समेत चढ़ गयी बच्चे और सामान जिसमे पानी की सुराही और खाने की टोकरी भी थी ,देख कर लोगों ने जगह देने मे जरा भी संकोच नहीं किया। तो हम बच्चों को शरारत सूझी और सबने तय किया कि सभी लोग मौसी को मम्मी कहेंगेबस फिर क्या था हम सबने मौसी को मम्मी कहना शुरू कर दिया । और मौसी भी मम्मी बन हम लोगों की बातें सुनती रही और फरमाइशें पूरी करती रही।कभी कोई पीने के लिए पानी मांगता तो कभी कोई पूरी खाने को मांगता । पर ट्रेन मे बैठे लोगों को मौसी की उम्र और ९ बच्चे देख कर कुछ अजीब लग रहा था (वैसे ९ बच्चे होना भी कोई अजीब बात नहीं थी तब :)और हम बच्चों की उम्र १६ से साल तक की थी:)

तो एक महिला ने जिससे ये बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने पहले मौसी से गाँव घर के बारे मे पूछा और फिर हम बच्चों की और इशारा करके उसने मौसी से पूछा बहनजी क्या ये सारे आपके बच्चे है ।

तो मौसी ने भी मुस्कारते हुए हाँ कहा।

तो वो महिला मौसी और हम बच्चों की उम्र का अंदाजा लगाने लगी और बोली बहनजी इतनी छोटी उम्र और इतने बड़े-बड़े बच्चे।

उस औरत के इतना कहते ही हम सभी हंसने लगे। और वो औरत हम लोगों को बस देखती रही।


Comments

मौसी जी को कह देना था हाँ ५ मेरे और ४ सौतन के !
Shikha Deepak said…
मजेदार वाक़या..........लखनऊ, इलाहाबाद, सीतापुर के बहाने आप तो हमें भी हमारे बचपन में घुमा लायीं.............जाने कितनी यादें जुडी हैं इन शहरों से।
Mired Mirage said…
आज तो ९ बच्चे देखकर कोई भी बेहोश हो जाए।
घुघूती बासूती
हम भी यही सोच रहे हैं - लोग बेहोश टाइप हो जायेंगे अब तो!
या कोई मौसी हो तो खुद ही बेहोश हो जाये ९ बच्चों के साथ! :)

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