Tuesday, April 20, 2010

कल न्यूज़ मे देखा कि किस तरह अहमदाबाद मे १५ कन्या भ्रूण कचरे मे मिले।जो बहुत ही शर्मनाक और दुखद है कि आखिर इतनी सारी अजन्मी बच्चियों को मारने से उन माँ-बाप और डॉक्टर को क्या मिला। कितने अफ़सोस कि बात है कि एक तरफ तो देश मे लड़कियों को आगे बढाने की बात की जाती है तो वहीँ दूसरी ओर इस निर्ममता से कन्याओं की हत्या की जाती है।

ऐसे डॉक्टर जो इस तरह के जघन्य अपराध करते है और जिनके लिए पैसा ही सब कुछ होता है उनसे तो उनकी मेडिकल की डिग्री वापिस ले लेनी चाहिए । डॉक्टर जिन्हें भगवान का रूप माना जाता है वही हत्यारे बन जाते है ।जबकि उन्हें डॉक्टर बनने पर शपथ भी दिलाई जाती है कि वो कभी भी कुछ गलत काम नहीं करेंगे । पर रुपया कमाने की लालच मे वो सब कुछ भूल जाते है ।

ऐसे डॉक्टर जिनकी अपनी बेटी भी होती होंगी क्या एक क्षण के लिए भी उनका दिल उन्हें धिक्कारता नहीं है ऐसा करने के लिए। इतनी अजन्मी बच्चियों को मारने से मिला रुपया-पैसा कैसे उन्हें फलता-फूलता है।

८० के दशक मे एक बंगाली फ़िल्म देखी थी कन्या भ्रूण पर आधारित ,और तब लगा था कि लोग किस तरह की मानसिकता के साथ जीते है जहाँ बेटी का जन्म अभिशाप माना जाता था। पर आज ३० साल बाद भी हालात बिलकुल वैसे नहीं बल्कि और भी खराब हो गए है।

दिन पर दिन लड़कियों की संख्या लड़कों से कम होती जा रही है पर दुःख और अफ़सोस की बात है कि ऐसे डॉक्टरों की संख्या दिन पर दिन बढती ही जा रही है।

6 Comments:

  1. annapurna said...
    बेहद मार्मिक प्रस्तुति !
    Shekhar Kumawat said...
    aap ka muda sahi he



    shekhar kumawat

    http://kavyawani.blogspot.com/
    kunwarji's said...
    "ऐसे डॉक्टर जो इस तरह के जघन्य अपराध करते है और जिनके लिए पैसा ही सब कुछ होता है उनसे तो उनकी मेडिकल की डिग्री वापिस ले लेनी चाहिए।"

    बेहद मार्मिक प्रस्तुति !
    पता नहीं कैसे आदमी इतना गिर जाता है?थू है उन हत्यारों पर!

    कुंवर जी,
    M VERMA said...
    हत्यारों की शक्ल अलग सी तो नहीं होती
    Arvind Mishra said...
    बहुत दुखद और शर्मनाक !
    डॉ. मनोज मिश्र said...
    बहुत ही दुखद.

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