Saturday, April 10, 2010

अरुणाचल प्रदेश मे ज्यादातर बैंक के ए. टी.एम. मे अलग लाईन जैसा कुछ system है शुरू मे ये हमें पता नहीं था। अब वैसे ए.टी.एम मे महिला और पुरुष की अलग लाईन का कोई तुक तो नहीं बनता है ।और कहीं ऐसा देखा भी नहीं था। यहां ए.टी.एम मे कोई भी गेट के बाहर नहीं इंतज़ार करता है बल्कि सभी लोग अन्दर लाईन लगा कर खड़े रहते है ।बिलकुल एक के पीछे एक इतना पास-पास खड़े रहते है कि एक दूसरे का पिन नंबर भी देख सकते है। ये जरुर हमारे पतिदेव ने बताया था। वैसे ए.टी.एम.के बाहर लिखा भी रहता है तो भी हर कोई अन्दर आ जाता है ।

खैर ये जनवरी की बात है जब हम नए-नए थे, एक दिन हम एक बैंक के ए.टी.एम. मे पैसे निकालने गए और चूँकि वहां ३-४ लड़के अन्दर खड़े थे इसलिए हम शराफत मे गेट पर खड़े होकर अपने नंबर का इंतज़ार करने लगे.टी.एम के अन्दर एक महिला भी थी जो कभी .टी.एम.मशीन के पास जाती और कभी वापिस गेट पर आतीहम समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर माजरा क्या हैफिर उसने हमसे पूछा कि क्या हम उसकी पैसे निकालने मे मदद कर देंगेतो हमने हाँ कह दिया । तब समझ मे आया कि वो पहली बार पैसे निकालने आई थी।

खैर हम वहीँ खड़े रहे और इंतज़ार करने लगे तभी एक सज्जन आये और अन्दर जाकर जहाँ लड़के लाईन लगाए खड़े थे वहां जाकर खड़े होने लगे तो हमने उन्हें रोकते हुए कहा कि आप लाईन मे लगिए तो बोले कि हम अपनी लाईन मे ही खड़े हो रहे है।

और जब हमने कहा कि हम भी इंतज़ार कर रहे है और लाईन मे है । इसलिए आप बाहर आकर लाईन मे लगिए। ये सुनकर वो बिगड़ कर बोले कि हम तो सही लाईन मे है आप ही गलत खड़ी है।

तो हमारे ये कहने पर कि ए.टी.एम.मे एक के बाद एक ही लाईन मे आते है तो वो बिफर कर बोले कि ये यू.पी. बिहार नहीं है ये अरुणाचल है

ये सुनकर हमे भी गुस्सा आ गया हमने कहा कि आप यू.पी.और बिहार को क्यूँ कह रहे है।इसमें यू.पी ,बिहार कहाँ से आ गया। ये तो दिल्ली और सारे देश के सभी .टी.एम. मे एक के बाद एक ही लोग पैसा निकालते है और कहीं भी महिला और पुरुष की लाईन अलग नहीं होती है

तो इस पर और चिड कर बोले कि होगा ,पर यहां यही चलता है।

और यहां का यही system है कि यहां महिला और पुरुष की अलग लाईन होती हैऔर दो पुरुष के पैसे निकालने के बाद ही एक महिला पैसे निकालती है

ये सुनकर बहुत गुस्सा आया और हमने भी कहा कि ऐसा कहीं भी system नहीं है।

और वहां मौजूद लोग जो पैसे निकाल चुके थे और हम लोगों की बहस सुन रहे थे वो लोग हमसे बोलने लगे कि आप शांत रहिये। यहां ऐसा ही होता है।

और हमने भी सोचा कि नयी जगह है फ़ालतू मे झगडे मे पड़ने से क्या फायदा

हमें गुस्सा तो बहुत आ रहा था , इसलिए हमने उससे कहा कि ठीक है ,आप पहले पैसे निकाल लो हम बाद मे पैसे निकालेंगे।
तो उनको ये भी मंजूर नहीं था वो बोले कि नहीं आप ही पैसे पहले निकालिए।

खैर हमने भी बात ख़त्म करके पैसे निकाले और वापिस आ गए।

और अब तो नियम बना लिया है कि जब ए.टी.एम. खाली हो तभी पैसे निकालते है।:)
ना लाईन मे लगो ना झंझट हो।

12 Comments:

  1. दिलीप said...
    lagta hai yahi hai 33% mahila aarakshan.. waah..!!!
    http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/
    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...
    हर इलाके में व्यवहार के कुछ नियम बन जाते हैं। लोग वैसे ही व्यवहार करते हैं। जो नियम वहाँ बन गया है वह सहज ही टूटता भी नहीं है। फिर भी इस नियम में एक तरह की इक्विटी दिखाई देती है।
    Vivek Rastogi said...
    बिल्कुल ऐसे ही वाकये राजस्थान के कई गाँवों में देख सकते हैं, कोई भी बाहर खड़े होकर इंतजार नहीं करता है, जबकि गेट पर लिखा होता है कि केवल एक व्यक्ति ही एक बार में ए.टी.एम. में जायेगा। पर ये गाँव वाले भी न बस !!
    Arvind Mishra said...
    क्या करियेगा जैसा देश वैसा भेष से काम चलायिये!
    दीपक 'मशाल' said...
    Niyam todne wale jyada hain aur paalan karne wale kam... us par bhi naye kayde-kanoon bana lete hain log apni man marzi se
    डॉ. मनोज मिश्र said...
    अजब हाल है,गलती अपनी, दोष -उ.प्र.और बिहार का.
    Udan Tashtari said...
    जहाँ लोग जैसा सिस्टम बना लें...
    जितेन्द़ भगत said...
    समय के साथ ये भेदभाव भी जरूर खत्‍म होगा।
    ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...
    दो पुरुष बाद एक महिला! रोचक गणित। संसद में नहीं चलने दे रहे यह गणित?!
    P.N. Subramanian said...
    आपने समझदारी की बात कह ही दी.
    डॉ टी एस दराल said...
    सिस्टम ke साथ ही चलना पड़ता है ।
    Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...
    नियम पर अड़ी रहिये, ये भी सुधर जायेंगे धीरे-धीरे.

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