Saturday, January 17, 2009

Happy feast of three kings


ये किसी फ़िल्म का नाम नही है और ही किसी नॉवेल का शीर्षक है बल्कि गोवा मे होने वाले एक पारंपरिक उत्सव का नाम है । हर साल जनवर के पहले रविवार को या यूँ कहें की क्रिसमस के बाद वाले दूसरे रविवार को मतलब jesus के जन्म के १२ दिन बाद ।२००६ मे जब हम गोवा शिफ्ट होकर आए थे तब २००७ के अखबार मे इसके बारे पढा था और सोचा था कि अगले साल यानी २००८ मे इस feast को देखेंगे पर २००८ की जनवरी आई और चली गई और हम ये feast नही देख पाये । पर इस बार यानी २००९ के इस feast मे हम भी शरीक हुए । क्योंकि इस बार chandor के ३ king बने बच्चों मे से एक king के पिता ने हम लोगों को इस feast को देखने के लिए निमंत्रण दिया था ।

चलिए थोड़ा सा इस feast के बारे मे भी जो कुछ वहां लोगों से बात करके जाना और समझा उसे आप लोगों को भी बता देते है । jesus के पैदा होने के बाद jesus को बुरे लोगों से बचाने और jesus को आशीर्वाद देने के लिए तीन magi बल्थ्हज़ार( Balthhazar ), गासपर (Gaspar )और, मेल्कोर (Melchior)ऊंट पर सवार अपने साथ गिफ्ट के रूप मे gold,(सोना)frank incense (धूप) और myrrh (तेल )लाये थे । इसी लिए इसे feast of Epiphany कहा जाता है ।

तो अब जब निमंत्रण था तो ६ जनवरी को हम भी पहुंचे ये feast देखने के लिए । । हर साल Candor ,Canasulim,Verem गाँवों से feast के लिए ९ बच्चों जो कि १० साल की उमर के होते है उन को चुना जाता है यानी हर गाँव के लिए ३ बच्चे king बनते है ।जिस परिवार के बच्चे को चुना जाता है उसके लिए ये बड़े गर्व की बात होती है । और ये बच्चे बिल्कुल king की तरह तैयार होते है और king बने ये बच्चे magi की तरह ही गिफ्ट मे gold ,frank incense और myrrh लेकर आते है । बस फर्क इतना है की ये ऊंट की जगह घोडे पर बैठ कर आते है ।

सबसे पहले ये तीनों king शंडोर के चैपल Nossa senhora de piedade मे ईकट्ठा होते है जो की एक पहाडी पर है और फ़िर वहां से तैयार होकर और सभी गिफ्ट लेकर एक काफिले की तरह Nossa senhora de Belem चर्च मे आते है जहाँ ये लोग अपने साथ लाये हुए गिफ्ट gold,frank incense,और myrrh देते है और उसके बाद प्रेयर (high mass) होता है जो करीब डेढ़ -दो घंटे का होता है ।पूरा चर्च खचाखच भरा था । चर्च के बाहर भी टी.वि स्क्रीन लगाए गए थे जिससे हर कोई चर्च मे हो रही प्रेयर को देख सके । जब प्रेयर खत्म हो गई तो खुशी जाहिर करने के लिए पटाखे भी चलाये गए थे । और बाहर बैंड भी बजता रहता है ।छोटा-मोटा सा मेला भी चर्च के बाहर लगा होता है । हाई मॉस के बाद जितने लोग चर्च मे होते है वो सभी चर्च से बाहर आकर दो लाइन बनाकर बाहर की तरफ़ चलने लगते है बीच मे तीनों king घोडे पर बैठ कर चर्च के पास चक्कर लगाते है और इन तीनों king के पीछे भी चर्च के लोग और जनता चलती है और चक्कर लगाने के बाद एक बार फ़िर सभी लोग चर्च मे जाते है । और वहां से फादर से आशीर्वाद ले कर बाहर आते है और फादर feast ख़त्म होने की घोषणा करते है । और शाम को फ़िर गाने और डांस का कार्यक्रम रहता है ।गोवा मे अगले २-३ दिन तक शाम को three king feast को नाच-गाकर सेलिब्रेट किया जाता है ।

इसके बाद तीनों king एक बार फ़िर घोडे पर सवार होते है और अपने -अपने घरवालों के साथ अपने -अपने घर की तरफ चलते है । आगे-आगे बैंड और उसके पीछे घोडे पर सवार king चलता है । घर आकर एक बार फ़िर परिवार के सभी लोग प्रेयर करते है और उसके बाद king एक बड़ी सी कुरसी पर बैठ जाता है और लोग उससे एक-एक कर मिलते है । और इसके बाद खान-पान का इंतजाम रहता है ।और गीत-संगीत का कार्य क्रम होता है ।
और इस दिन के बाद से क्रिसमस सेलेब्रेशन का अंत होता है

9 Comments:

  1. दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...
    पुरानी पौराणिक घटनाओं को स्मरण रखने का एक तरीका है जिस में उल्लास और प्रसन्नता भी सम्मिलित होती है।
    Nirmla Kapila said...
    बहुत खूबसूरत ब्लोग और जानकारी हैबधाई
    P.N. Subramanian said...
    बड़ी रोचक है यह लोकोत्सव. हम सोच रहे थे कि ३०० या ४०० सालों में ही कितना कायाकल्प हो जाता है. गोआ वाले सभी हिंदू थे और पुर्तगालियों ने अत्याचार बरतते हुए लोगों को ईसाई बनाया. अब लोग अपनी संस्कृति को भूल एकदम इस विदेशी संस्कृति में ढाल दिए गये हैं. इस सुंदर जानकारी के लिए आभार.
    http://mallar.wordpress.com
    विनय said...
    आप नियमित लिख रही है अच्छा लगा, रुचिकर और ज्ञानवर्धक!


    ---मेरा पृष्ठ
    गुलाबी कोंपलें

    ---मेरा पृष्ठ
    चाँद, बादल और शाम
    संगीता पुरी said...
    बहुत अच्‍छी जानकारी दी आपने इस लोकोत्‍सव के बारे में....धन्‍यवाद।
    राज भाटिय़ा said...
    बहुत ही सुंदर जानकारी, मै भी P.N. Subramanian जी की टिपण्णी से सहमत हूं.
    धन्यवाद
    Udan Tashtari said...
    आभार आपका इस पेशकश के लिए.
    ARVI'nd said...
    aaj pahli baar aapke blog se rubru hua....acchi jankariya samaahit hai aapke blog me....
    डा० अमर कुमार said...

    चलो, तुम सक्रिय तो हुईं, ममता !
    ऎसे परंपराओं को ब्लागर पर सहेज़ना, निःसंदेह ही प्रशंसनीय हैं ।

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