अमिताभ बच्चन को लेकर इतनी नाराजगी क्यों ?

कल से सभी न्यूज़ चैनल यही खबर दिखा रहे है की मुंबई के बांद्रा सी लिंक के उदघाटन मे अमिताभ बच्चन कैसे गए और उन्हें किसने बुलाया । अरे भाई अगर चले भी गए तो ऐसा कौन सा पहाड़ टूट पड़ा। आखिर अमिताभ बच्चन का अपना भी तो कोई वजूद है और फिर उन्हें इस सदी का महानायक भी कहा जाता है। तो अगर सदी के महानायक पुल के उदघाटन मे चले गए तो इसमें कांग्रेस को अपना इतना अपमान क्यूँ महसूस हो रहा है।

और फिर जब कांग्रेस के नेता और मंत्री उससे हाथ मिलाने मे जरा भी नहीं सकुचा रहे थे तो फिर बाद मे इस बात से मुकर जाना कि अमिताभ बच्चन को उन्होंने नहीं बुलाया था ,कहाँ की शराफत है।

दुनिया भर मे अमिताभ बच्चन को लोग इतना सम्मान देते है पर अपने ही देश मे इस तरह से अपमान होना ,कहाँ तक सही है।

Comments

निजी कारणों से महारानी और उनके बच्चे अमिताभ को पसंद नहीं करते, इसीलिए वे कांग्रेसियों के लिए खलनायक हैं.
पहली टिप्पणी में एक लाइन मेरी तरफ़ से भी जोड़ें… क्योंकि अमिताभ पहले यूपी (याने मुलायम, याने महारानी को जिसने पहली बार प्रधानमंत्री बनने से रोका) के ब्राण्ड एम्बेसेडर… उसके बाद आँखों में सबसे अधिक चुभने वाले गुजरात और मोदी के ब्राण्ड एम्बेसेडर बने… इसलिये इतनी नाराज़गी है… जो "परिवार" के खिलाफ़ जायेगा, उसे कोई कवरेज नहीं दिया जायेगा, या फ़िर नेगेटिव दिया जायेगा
गुजरात का ब्रांड एम्बेस्डर बनना भारी पड़ा.
यह सब राजनीतिज्ञों और मीडिया की चोचले बाज़ी है और कुछ नहीं.
आप अपमान की बात कर रही है, मैं कहती हूँ कि घोर अपमान है। पहले उद्घाटन में सोनिया जी का आना और दूसरे में इन महानायक का। तो क्‍या आप दोनों को बराबर बिठाना चाहते हैं? वे त्‍याग की मूर्ति, परम करूणामयी, हितेषी आदि आदि गुणों को धारण करने वाली हैं भला उनके सामने अमिताभ क्‍या वजन रखते हैं? ब्रांड अम्‍बेसेडर बनना और बात है तो क्‍या हमारी बराबरी करेंगे? हमें तो केवल वो ही चाहिए जो केवल हमारा ही भक्‍त हो। जो सबकी और यहाँ तक की दुश्‍मनों की भक्ति करने भी पहुंच जाता हो, भला हमारे दरबार में उसका क्‍या काम? आयी बात समझ में? कहाँ राजा और कहाँ रंक? अरे रंक नहीं प्रजा।
kunwarji's said…
ab hum kya kahe....

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