Friday, April 3, 2009


दो दिन पहले के नवहिंद टाईम्स में ये फोटो छपी थी सबसे पहले आप फोटो देखें और उसके नीचे लिखे शब्दों (सेंटेंस) को ध्यान से पढ़े

कुछ समझ में आया
नही आया :)

तो चलिए हम बता देते है ,वो क्या है कि आजकल चुनावों का समय है और सभी जगह नोमिनेशन की प्रक्रिया चल रही है (इस फोटो मे बी .जे.पी.के प्रत्याशी अपना नोमिनेशन फाइल करने के बाद बाहर आकार फोटो खिंचा रहे है )

साथ ही गोवा में इन्ही दिनों लेंट पीरियड (जिसमें क्रिशचन लोग ४० दिन तक नॉन-वेज नही खाते है और इस दौरान saints की मूर्ति (statues) के साथ procession निकलते है ) भी चल रहा है

और इस फोटो में इन दोनों बातों को मिला दिया गया है :)

मतलब फोटो election की और सेंटेंस लेंट का

23 Comments:

  1. अशोक पाण्डेय said...
    रोचक है। असावधानी और अधिक संस्‍करण निकालने के बोझ के चलते अखबारों में इन दिनों इस तरह की गलतियां खूब देखने को मिलती हैं।
    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...
    ऐसी गलतियाँ बहुत हो रही हैं। एक आदमी से दो का काम जो लिया जा रहा है।
    Udan Tashtari said...
    मजेदार-रोचक.
    mehek said...
    mazedar:)
    डॉ. मनोज मिश्र said...
    आज कल अखबारों में यह सब गलतियाँ अक्सर हो जातीं हैं ,जिसके लिए वही लोग जिम्मेदार है .
    संगीता पुरी said...
    एक समाचार पत्र ने तो जया बच्‍चन का समाचार और जया प्रदा की फोटो साथ साथ डाल दी थी ... काम के दवाब में भी ये सब गलतियां हो जाती होंगी ... पर इस तरह गलत सूचना नहीं दी जानी चाहिए।
    कुश said...
    हा हा.!!! ऐसा तो कई बार होता है.. आप इस लिंकपर इस तरह की और भी ख़बरे देख सकती है..
    रंजना [रंजू भाटिया] said...
    :) badhiya majedaar hai
    P.N. Subramanian said...
    हा हा हा. मजेदार. लेंट period में अहन तो समाज के लोग घर घर जाकर (turn by turn) प्रार्थना करते हैं. आभार.
    neeshoo said...
    रोचक रही यह पोस्ट ।
    ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...
    संतों के दर्शन हुये! बहुत धन्यवाद।
    कालान्तर में ये मूर्तियां संसद भवन में लगाई जायेंगी?!
    संजय बेंगाणी said...
    :)
    Brahmanand said...
    हा हा हा आजकल ये लोग तो संत ही बने हुए है..........
    राजीव जैन Rajeev Jain said...
    हो जाता है ऐसा

    गलतियां कौन नहीं करता

    भगवान से भी हुई

    और अब सारे ब्‍लॉगर मिलकर सुधार रहे हैं

    :)
    Dr.Bhawna said...
    Acha hai...
    आलोक सिंह said...
    अक्सर ऐसा हो जाता है ,
    अच्छा है पढ़ के कुछ आनंद आ जाता है .
    लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...
    इसे कहते हैँ ,News का News
    और मुफ्त मेँ मनोरँजन ! :-)
    स स्नेह,
    - लावण्या
    dhiru singh {धीरू सिंह} said...
    बहुत तेज़ दिमाग की जरूरत है इन गलतियों को खोजने के लिए
    समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...
    ऐसा तो कई बार होता है....रोचक.
    कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee said...
    रोचक खोजा।
    राज भाटिय़ा said...
    बहुत तीखी नजर है आप की, बहुत रोचक.
    धन्यवाद
    राज भाटिय़ा said...
    बहुत तीखी नजर है आप की, बहुत रोचक.
    धन्यवाद
    अविनाश वाचस्पति said...
    अच्‍छा गलता पकड़ा है आपने

    वैसे यह काम तो बालेन्‍दु दाधीच जी

    बखूबी करते हैं

    और उनका एक ब्‍लॉग

    अखबारों की इन्‍हीं करतूतों

    का बखान करता है।

Post a Comment