भई है तो ये गाना बहुत पुराना पर आज भी इसके एक-एक बोल बिल्कुल सोने के जैसे खरे है । उस समय की हिट चौकडी यानी राज कपूर ,मुकेश,शैलेन्द्र और शंकर जयकिशन का कोई मुकाबला नही है । तो लीजिये हम ज्यादा बक-बक नही करते है और आप लोगों को गीत सुनने देते है ।
वैसे आप को याद है न कि आज रात साढ़े आठ बजे से साढ़े नौ बजे तक यानी एक घंटे earth hour के लिए लाइट बंद रखनी है ।
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15 comments:
गाना तो बढ़िया था हो. अर्थ अवर तो हमारे यहाँ हर रोज कभी भी मनाने के लिए वाध्य हो ही जाते हैं. इसलिए कोई नयी बात नहीं है.
बिल्कुल ठीक कहा आपने, पर लोगों को न जाने बार-बार सुनने पर भी ये बात समझ नहीं आती????
सून्दर प्रयास।
प्रिय गीत है, जब तब सुनता हूँ।
बहुत बढ़िया गीत है. मुझे बहुत प्रिय भी.
PLEASE PROMOTE IT ON YOU BLOG CREAT AWARENESS
मै अपनी धरती को अपना वोट दूंगी आप भी दे कैसे ?? क्यूँ ?? जाने
शनिवार २८ मार्च २००९समय शाम के ८.३० बजे से रात के ९.३० बजेघर मे चलने वाली हर वो चीज़ जो इलेक्ट्रिसिटी से चलती हैं उसको बंद कर देअपना वोट दे धरती को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लियेपूरी दुनिया मे शनिवार २८ मार्च २००९ समय शाम के ८.३० बजे से रात के ९.३० बजेग्लोबल अर्थ आर { GLOBAL EARTH HOUR } मनाये गी और वोट देगी अपनी धरती को ।इस विषय मे ज्यादा जानकारी यहाँ उपलब्ध हैं ।
यह गाना मुझे भी पसंद है ..शुक्रिया
हमें याद है ....
यह गीत भी, इसका संदेश भी, और आपका संदेश भी।
शुक्रिया ममता जी :)
ममता जी यह गाना मुझे भी पसंद है.
धन्यवाद
धन्यवाद इसलिए कि यह गीत बहुत कुछ याद दिलाता है
झूठ क्या बोलें - यह गाना अच्छा लगता है!
आपकी पोस्ट की चर्चा मेरे ब्लॉग समयचक्र में
समयचक्र: चिठ्ठी चर्चा : आज " धरती -प्रहर" में एक वोट धरती को भी दीजिये
गाना बहुत सुना है, कैसा है ये तो बाकी सबने कह ही दिया है। लाईट का क्या? आधी से ज्यादा इंडिया में तो ये बिजली वालों की मेहरबानी से पहले से होता आ रहा है आगे भी होता आयेगा।
वैसे इसकी महत्ता ज्यादातर उन देशों के लिये है जहाँ बिजली की खपत ज्यादा है और कभी बिजली बंद नही होती। लेकिन ये सिंबोलिक जरूर है, बजाय एक दिन के लिये बिजली बंद करने के रोजाना सिर्फ उतनी ही उपयोग में लायी जाय जितनी जरूरी है तो इस दिन को दोहराने की शायद जरूरत ना पड़े।
सदाबहार नगमा और धरती माता के प्रति ममता आप का सँदेश है
- लावण्या
मैंने तो अपनी बत्ती गुल रखी पर मेरे मोहल्ले में मैं ही ऐसा था।
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