Saturday, March 28, 2009

भई है तो ये गाना बहुत पुराना पर आज भी इसके एक-एक बोल बिल्कुल सोने के जैसे खरे हैउस समय की हिट चौकडी यानी राज कपूर ,मुकेश,शैलेन्द्र और शंकर जयकिशन का कोई मुकाबला नही हैतो लीजिये हम ज्यादा बक-बक नही करते है और आप लोगों को गीत सुनने देते है
वैसे आप को याद है कि आज रात साढ़े आठ बजे से साढ़े नौ बजे तक यानी एक घंटे earth hour के लिए लाइट बंद रखनी है

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16 Comments:

  1. P.N. Subramanian said...
    गाना तो बढ़िया था हो. अर्थ अवर तो हमारे यहाँ हर रोज कभी भी मनाने के लिए वाध्य हो ही जाते हैं. इसलिए कोई नयी बात नहीं है.
    प्रकाश बादल said...
    बिल्कुल ठीक कहा आपने, पर लोगों को न जाने बार-बार सुनने पर भी ये बात समझ नहीं आती????
    इरशाद अली said...
    सून्दर प्रयास।
    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...
    प्रिय गीत है, जब तब सुनता हूँ।
    Shiv Kumar Mishra said...
    बहुत बढ़िया गीत है. मुझे बहुत प्रिय भी.
    रचना said...
    PLEASE PROMOTE IT ON YOU BLOG CREAT AWARENESS

    मै अपनी धरती को अपना वोट दूंगी आप भी दे कैसे ?? क्यूँ ?? जाने
    शनिवार २८ मार्च २००९समय शाम के ८.३० बजे से रात के ९.३० बजेघर मे चलने वाली हर वो चीज़ जो इलेक्ट्रिसिटी से चलती हैं उसको बंद कर देअपना वोट दे धरती को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लियेपूरी दुनिया मे शनिवार २८ मार्च २००९ समय शाम के ८.३० बजे से रात के ९.३० बजेग्लोबल अर्थ आर { GLOBAL EARTH HOUR } मनाये गी और वोट देगी अपनी धरती को ।इस विषय मे ज्यादा जानकारी यहाँ उपलब्ध हैं ।
    रंजना [रंजू भाटिया] said...
    यह गाना मुझे भी पसंद है ..शुक्रिया
    अजित वडनेरकर said...
    हमें याद है ....
    यह गीत भी, इसका संदेश भी, और आपका संदेश भी।
    शुक्रिया ममता जी :)
    राज भाटिय़ा said...
    ममता जी यह गाना मुझे भी पसंद है.
    धन्यवाद
    मा पलायनम ! said...
    धन्यवाद इसलिए कि यह गीत बहुत कुछ याद दिलाता है
    ज्ञानदत्त पाण्डेय | G.D.Pandey said...
    झूठ क्या बोलें - यह गाना अच्छा लगता है!
    समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...
    Tarun said...
    गाना बहुत सुना है, कैसा है ये तो बाकी सबने कह ही दिया है। लाईट का क्या? आधी से ज्यादा इंडिया में तो ये बिजली वालों की मेहरबानी से पहले से होता आ रहा है आगे भी होता आयेगा।

    वैसे इसकी महत्ता ज्यादातर उन देशों के लिये है जहाँ बिजली की खपत ज्यादा है और कभी बिजली बंद नही होती। लेकिन ये सिंबोलिक जरूर है, बजाय एक दिन के लिये बिजली बंद करने के रोजाना सिर्फ उतनी ही उपयोग में लायी जाय जितनी जरूरी है तो इस दिन को दोहराने की शायद जरूरत ना पड़े।
    लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...
    सदाबहार नगमा और धरती माता के प्रति ममता आप का सँदेश है
    - लावण्या
    उन्मुक्त said...
    मैंने तो अपनी बत्ती गुल रखी पर मेरे मोहल्ले में मैं ही ऐसा था।
    Pappu Kumar Sahani said...
    Verynice song

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