Monday, March 9, 2009

होली आती है तो अपने साथ ढेरों पुरानी यादें भी ले आती है । वो क्या है जैसे-जैसे बड़े होते जाते है होली खेलने का वो जोश और उत्साह ख़त्म तो नही होता है पर कुछ कम जरुर होने लग जाता है । क्योंकि अगर हम होली जम कर खेलना भी चाहें तो खेलें किसके साथ । खैर होली मे ये सब सोच कर परेशान नही होना चाहिए क्योंकि होली की इतनी सारी यादें जो है रंगने के लिए । :)

ये बात ७७ की है हमारी बड़ी जिज्जी की शादी हुई थी और जैसा की रिवाज है लड़की की पहली होली मायके मे होती है तो जिज्जी और जीजाजी इलाहाबाद पहली होली के लिए आए थे ।हम लोगों के मोहल्ले मे लड़कियों की संख्या ज्यादा थी । एक -दो घर को छोड़ कर हर घर मे ४-५ लड़कियां थी । अब उस जमाने मे तो घरों मे बहुत ज्यादा मिलना जुलना होता था और एक घर के जीजाजी मतलब सारे मोहल्ले के जीजाजी वाला हिसाब था और वो भी इकलौते और नए-नए ।तो जाहिर सी बात है की पूरे मोहल्ले को खबर थी की जीजाजी होली पर आ रहें है । सब लड़कियों ने बड़े-बड़े प्लान बनाए थे की उन्हें कैसे-कैसे रंगा जायेगा । :)

होली के दिन घर मे सुबह से ही आँगन मे बड़े-बड़े ड्रम और हंडों मे रंग घोला गया । एक बड़े से हंडे मे टेसू के फूल भिगाए गए । घर की छोटी-बड़ी बाल्टी मे भी रंग बनाए गए । अबीर-गुलाल थालियों मे रक्खे गए । पर खास मुंह पर लगाने वाले रंग
को जीजाजी से छिपा कर रक्खा गया ।

हम सब बहनों का होली खेलने का प्रोग्राम तो रात मे ही शुरू हो गया था जीजाजी को सोते हुए मे रंग देने का । सुबह नाश्ते के बाद dinning table पर मम्मी ने सबको अबीर-गुलाल लगा कर होली की शुरुआत की और उसके बाद तो होली का हुडदंग शुरू हो गया ।चूँकि हम घर मे सबसे छोटे है तो जाहिर है कि हमारे दोस्त भी बहुत थे क्योंकि हमारे दोस्त तो हमारे थे ही साथ ही बाकी तीनों जिज्जी की दोस्तें भी हमारी दोस्त लिस्ट मे थी । :)

घर मे एक राउंड होली खेल कर हम मोहल्ले मे होली खेलने निकल गए अरे भाई पूरी पलटन को जो इक्कठा करना था । और थोड़ी देर मे हम और पूरी पलटन वापिस घर मे पहुंचे और जीजाजी उस समय आँगन मे बैठे हुए थेतो हम सभी लड़कियों की पलटन ने एक के बाद एक करके आँगन मे अन्दर जाना शुरू किया और जीजाजी को बड़ी शराफत से थोड़ा -थोड़ा रंग लगाकर होली है कहकर वहीं आँगन मे खड़ी होती गई

जब सारी पलटन गई तो रंग भरे ड्रम की ओर इशारा किया गयाबस फ़िर क्या था कोई बाल्टी से कोई जग से कोई मग से जीजाजी पर रंग डालने लगा थाहालाँकि बाल्टी वाला रंग तो बस हर बार जमीन पर गिर कर ही waste हो जाता था क्योंकि हमारे जीजाजी लंबे- ऊँचे कद के है और बाल्टी से रंग डालने वाले की बाल्टी ही वो पकड़ लेते और इस खींच - तान मे थोड़ा रंग उनपर थोड़ा बाल्टी वाले पर और ज्यादा रंग जमीन पर गिर जाता था फ़िर एक-एक को खींच कर जमीन मे लोटा (लिटाया)लगवाया जाता :)

पर जीजाजी को बुरी तरह से रंगना अभी बाकी थाऔर हम बच्चों की समस्या कि हम लोग उन्हें खूब सारा रंग नही लगा पा रहे थेतभी छोटी जिज्जी की एक दोस्त मीना जो काफ़ी लहीम-शहीम थी उसने कहा की वो जीजाजी को रंग लगा कर ही मानेगीबस फ़िर क्या था एक तरह का युद्ध सा शुरू हो गया और अंत मे उसने रंग तो लगाया (पर ज्यादा नही लगा पायी )पर इस खींचा-खींची मे जीजाजी का कुरता थोड़ा सा फट गया बस फ़िर तो मीना ने जीजाजी का पूरा कुरता ही फाड़ दियाऔर हमारे जीजाजी ...... । :)

15 Comments:

  1. P.N. Subramanian said...
    मजा आ गया. अभी से हमारा मोहल्ला भो होलिया रहा है. आभार.
    कुश said...
    आप तो आज पुरानी यादो में ले गयी.. कितने सारे रंग बिखेर दिए.. होली की बहुत शुभकामनाए
    रंजना [रंजू भाटिया] said...
    बढ़िया यादे हैं होली की यह ..होली मुबारक
    समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...
    क्या बात है ममता जे होली पर कुरता फाड़ होली .मजा आ गया . बहुत बढ़िया
    होली पर्व की हार्दिक शुभकामना के साथ
    ज्ञानदत्त । GD Pandey said...
    बहुत बढ़िया याद जी! सुना है बिहार में विधिवत कुर्ताफाड़ होली होती है॥
    शायद लोग इस अवसर के लिये चुन कर कुर्ता रखते होंगे! :)
    रंजन said...
    बेचारे जीजाजी.. उनका नंबर भी आयेगा..

    होली की शुभकामनाऐं!!
    Arvind Mishra said...
    होली वह भी इलाहाबाद की और उस पर जीजा के संग -याद न दिलाएं !
    seema gupta said...
    आपको परिवार सहित होली की हार्दिक शुभकामनाएं.

    regards
    नीरज गोस्वामी said...
    बहुत खूब कहा है...वाह..
    आपको होली की शुभकामनाएं.
    नीरज
    कंचन सिंह चौहान said...
    हमारि अलग समस्या थी ममता जी..! पहले जब हम इच्छुक रहते थे रंग लगवाने के तब जीजा जी लोग हमें बच्चा समझ के छोड़ देते थे, अब जब वो इच्छुक रहते हैं रंग लगावाने के तब हम उन्हे बूढ़ा समझ के छोड़ देते हैं :) :)

    आपको होली की शुभकामनाएं
    Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...
    आपको सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनाऎं.......
    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...
    हम ने तो हर होली में कई कुरते कमीजें फटती देखी हैं। कुछ तो पहनते ही इसी लिए हैं कि उस रोज पहने कपड़ों को अलविदा कहने की घड़ी आ चुकी होती है।
    होली पर बहुत बहुत बधाइयाँ।
    लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...
    सुँदर यादेँ हैँ आपके जीजाजी ने सालीयोँ की टोली
    को खूब आनँद दिलवाया होगा - जिनके लिये याद किया उन्ह भी बधाई
    और्,
    महिला दिवस व होली पर्व की सपरिवार शुभकामनाएँ आपको
    स्नेह,
    - लावण्या
    संगीता पुरी said...
    बहुत सुंदर ... होली की ढेरो शुभकामनाएं।
    राज भाटिय़ा said...
    आपको और आपके परिवार को होली की रंग-बिरंगी ओर बहुत बधाई।
    बुरा न मानो होली है। होली है जी होली है

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