Friday, March 13, 2009

आज दिनेश जी की पोस्ट पढ़ी थी जिसमे उन्होंने दो तरह की घटनाओं का जिक्र किया था उसी से हमें इस घटना की याद आ गई । वैसे ये न्यूज़ काफ़ी समय पहले पढ़ी थी पर लिख नही पाये थे । जिसमे झारखण्ड के मंगरा महाली और उनकी पत्नी बलखी दोनों ने अपने परिवार की मरजी के ख़िलाफ़ शादी की थी जिसके लिए उनके परिवारों ने उन्हें घर से निकाल दिया था और उसके बाद उन्होंने एक पेड़ जो बरगद के पेड़ से मिलता जुलता पेड़ है उस के नीचे रात गुजारी थी । और पिछले २५ सालों से यही पेड़ उनका घर बन गया और इसी घर मे उनके बच्चे भी पैदा हुए ।

इस न्यूज़ मे इस दंपत्ति की फोटो नही है और इनकी फोटो हमें मिल या दिख नही रही है वरना हम जरूर लगाते ।

10 Comments:

  1. इष्ट देव सांकृत्यायन said...
    हमारे समाज के लिए यह सिर्फ़ कष्टकर ही नहीं, शर्मनाक भी है.
    P.N. Subramanian said...
    दुखद स्थिति है.
    लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...
    ममता जी,
    समाज के एक दम्पति की दुखद स्थिति से आपने रुबरु करवाया -
    काश उन्हेँ भी ठिकाना मिलता -
    - लावण्या
    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...
    समाज के एक हिस्से की यह स्थिति जरूर है लेकिन समाज बदल भी रहा है। स्थितियाँ भी बदल रही हैं। हाँ उस के लिए कोई मजबूत सामाजिक आंदोलन नहीं है, जिस की सख्त जरूरत है।
    bhootnath( भूतनाथ) said...
    mamtaa ji is adbhut see khabar par dil paseej-paseej saa gayaa....beshak ham kuchh kar naa paayen hon....!!
    संगीता पुरी said...
    आश्‍चर्य है ... परिवार की मर्जी के विरूद्ध विवाह करने पर पेड के नीचे रहने की विवशता ... वो भी सालों से।
    राज भाटिय़ा said...
    यह दुनिया अजीबो गरीब है ममता जी,अब क्या कहे इस दुनिया मै अच्छे ओर बुरे सब तरह के लोग मिलते है,
    धन्यवाद
    विनय said...
    आश्चर्य होता है, क्या यह सच है?

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    गुलाबी कोंपलें
    विनय said...
    आश्चर्य होता है, क्या यह सच है?

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    गुलाबी कोंपलें
    उत्तम सक्सेना said...
    ममता जी,
    नीचे दिए लिंक पर आप मंगरा महाले की फोटो देख सकती हैं .

    http://tinyurl.com/mahali

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