Wednesday, June 24, 2009

आज अखबार मे ये ख़बर पढ़ी थी जिसमे मुंबई की रेलवे कोर्ट ने एक मेडिकल रिप्रेजनटेटिव को रेलवे ट्रैक क्रॉस करने के कारण जेल भेज दिया था । पूरी ख़बर आप भी यहाँ पढ़ सकते है ।

वैसे रेलवे ट्रैक क्रॉस करने का नजारा हर शहर के प्लेटफोर्म पर देखा जा सकता है जहाँ न केवल लड़के और आदमी और आरतें बल्कि कई बार तो लोग सपरिवार बेधड़क रेलवे ट्रैक को एक प्लेटफोर्म से दूसरे प्लेटफोर्म पर जाने के लिए इस्तेमाल करते है । और कोई उन्हें ऐसा करने से रोक भी नही सकता था पर अब जब रेलवे पुलिस इस तरह लोगों को पकडेगी और कोर्ट उन्हें सबक सिखाने के लिए २-४ दिन के लिए जब जेल भेजेगी तब ही लोगों की इस तरह से रेलवे ट्रैक क्रॉस करने की आदत छूटेगी । ऐसी उम्मीद की जा सकती है ।

पता नही इस तरह के शोर्टकट से वो कितना समय बचा लेते है । बमुश्किल ५-१० मिनट ,पर उसके लिए अपनी जान जोखिम मे डालने से भी नही चूकते है ।

14 Comments:

  1. M VERMA said...
    सही कहा आपने शार्टकट ने ज़िन्दगी का तरीका ही बदल दिया है. अच्छा आलेख
    अविनाश वाचस्पति said...
    फास्‍ट फूड संस्‍कृति
    शॉर्टकट की ही देन है।
    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...
    ये तो होना ही चाहिए।
    Vivek Rastogi said...
    बोरीवली में ७ नं और १ नं प्लेटफ़ार्म पर मुर्दाघर है जहाँ पर लगभग रोज ही एक लाश देख सकते हैं । स्ट्रेचर पर पड़ी हुई लाश को सफ़ेद कपड़े से ढंक कर रखा जाता है और उसके सिर की तरफ़ उसके जूते रख देते हैं और अगर जूते देखें तो नाईक, एडिडास बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ही होते हैं जिससे पता चलता है कि पढ़ा लिखा वर्ग ही कानून तोड़ता है और ५ मिनिट बचाने के चक्कर में अपनी जिंदगी को खत्म कर देता है।

    वह यह भूल जाता है कि उसका घर पर कोई इंतजार कर रहा है।

    पुलिस भी कब तक इन लोगों को पकड़्ती रहेगी स्टेशन पर ही इस तरह के इंतजाम होने चाहिये कि कोई भी व्यक्ति पटरी पार ही न कर पाये।
    राज भाटिय़ा said...
    हम भारतीया तो कभी भी सुधर नही सकते, जब तक हमारे सर पर डंडा ना हो, ओर अब हर सर पर डंडा तो हो नही सकता, क्योकि फ़िर तो दोनो मे दोस्ती हो जायेगी, फ़िर डंडे वाले के लिये एक ओर डंडे वाला.... इस से अच्छा है जिसे पकडो उसी समय उस से जुरमाना लो, दुसरी बात दो लाईनो(दो ट्रेक) के बीच मै मोटी जाली लगा दो जो काफ़ी उंची हो, ओर उस मै हल्का सा करेंट छोड दे.... लेकिन मेरी माने गा कोन :)
    या फ़िर हर पलेट फ़ार्म पर बडे बडे चित्र लगा दो कि इन जनाब ने रेलवे लाईन पार की थी तो यह हाल हो गया, ओर उस चित्रो मे उन लोगो के चित्र हो हो बेवकुफ़ो कि तरह से अपना समय बचा रहे थे.
    अविनाश वाचस्पति said...
    बचत करना भी पाप
    हम समझे हैं आप।
    अजय कुमार झा said...
    mamta jee mera khud bhee yahi mannaa hai ki yadi yahan sudhaar lana hai to kathor dand kaa upyog hee uchit raastaa hai..bahut hee sahi pahal hai..haan bas niyamit rahe..kyunki aksar aise kaanoon bahut jaldee hee bhula diye jaate hain...
    ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...
    कोई बन्धु यह लिख कर नहीं गये कि ट्रेसपासिंग नहीं करेंगे! :)
    अविनाश वाचस्पति said...
    कोई लिखेगा थोड़े ही
    जो पहले ही नहीं करते होंगे
    वे काहे इस पचड़े में पड़ेंगे
    लिख दें कि नहीं करेंगे
    इसका मतलब पहले करते थे
    इसलिए मौन हैं
    जान लें आप खुद ही
    वे कौन हैं ?

    आपको जबरिया रोकना होगा
    तब रूकेंगे वरना उसी रौ में बहेंगे
    अब भला बहने पर किसका वश है
    ना रोक सकते आप हैं
    आप तो बस यह करिये
    या तो सब वे बनवा दीजिए
    या उपर से गुजरवा दीजिए
    फाटक से कोई नहीं रूकता है
    यह कोई भवन या महल का
    फाटक थोड़े ही है।
    P.N. Subramanian said...
    दो ट्रेकों के बीच जाली लगाने वाली बात जँच रही है.
    अभिषेक ओझा said...
    बंद हो तो अच्छा है !
    लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...
    भारतीय शादी ब्याह हो चाहे कोई आयोजन, लाइन तोडकर आगे बढना, या इसी तरह रेल्वे ट्रेक क्रोस करना
    हमेँ क्यूँ भाता है ?
    अनुशासन, अप्रिय क्यूँ है ?
    - लावण्या
    Udan Tashtari said...
    फास्ट ट्रेक जीवन और आपका चिन्तन!! आभार!
    डॉ. मनोज मिश्र said...
    अनुशासन तोड़ना हम लोंगो का प्रिय शगल है .

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