Saturday, February 23, 2008

आज ये हमारी दो सौवी पोस्ट है ।यकीन नही हो रहा है । इतनी सारी पोस्ट लिखने की हिम्मत और हौसला आप लोगों से ही मिला है।जब हमने ब्लॉगिंग शुरू की थी तो रोमन हिन्दी मे लिखते थे। और इसीलिए शुरू की चार पोस्ट रोमन मे है और उसके बाद हमे हिन्दी राईटिंग टूल के बारे मे पता चला था।और तब पांचवी पोस्ट से हमने हिन्दी मे लिखना शुरू किया था।

पहले हम कुछ तरह से लिखते थे जरा गौर फरमाये।

Friday, February 23, 2007

Sony ki Durgesh nandini

kya kamal ka serial banaya hai , ichcha hoti hai ki director se ye poonchne ki ,ki aise bachche kahan hote hai. serial ne to ma aur bete ke rishte ki dhajjiyian hi uda di hai. mana ki aaj kal bachche paise ke peeche bhagte hai par jo launguage use ki gayi hai wo to meri samajh ke bahar hai. bete apne father ko buddha aur mother ko budhiya bolte hai.aur jaisa atyachar bete aur beti apni ma ke saath kar rahe hai wo to hamein aurangjeb ki yaad dilata hai.saare log overacting karte lagte hai. is serial ne to beti ko bhi nahin baksha, usse bhi property ka lalachi dikhaya hai jabki normally beti apna hissa nahin leti hai. chalo ek baar ko maan bhi le ki subko poroperty ka lalch hai per usse itna vibhats na dikhakar thoda hulke andaaj main bhi dikha sakte hai.

jis tarah se bete apni ma ho almari main bane chor darwaze ke peeche bane kamre main band rakhte hai,wo sub dikhakar director aakhir kya dikhana chahate hai,aise serials chote bachchon ke dimag par galat asar karte haiaur jo log zara bhi aise bigde dimag wale hai ye serial unnhe uksa sakta hai aisa hi kuch galat kaam karne ko.(ma,papa ko satane ka)


और आज हम जो भी थोड़ा बहुत लिख रहे है उसमे इस ब्लॉगर परिवार का बहुत बड़ा हाथ है क्यूंकि अगर आप लोग समय-समय पर हमारा मार्गदर्शन नही करते तो शायद हम यहां तक नही पहुँच पाते मतलब कब का ब्लॉगिंग को छोड़ कर भाग चुके होते





19 Comments:

  1. Gyandutt Pandey said...
    हम भी अपनी पुरानी पोस्टें देखें तो यही जायका मिलता है!
    अनिल रघुराज said...
    लिखने की रफ्तार बढ़ती जाए, यही कामना है। 200वीं पोस्ट की शुभकामनाएं स्वीकार करें।
    annapurna said...
    दो सौ चिट्ठे लिखने की शुभकामनाएं !

    आशा है सफर जारी रहेगा।
    Dr.Parveen Chopra said...
    ममता जी, आप को दो सौ चिट्ठे लिखने के लिए बहुत बहुत बधाईयं। भगवान से प्रार्थना है कि आप इस तरह ही लिखती रहीं और खूब नये नये विषयों पर लिखें।
    PD said...
    bahut badhiya hai.. badhaayi..
    main bhi jaldi se double century maarta hun.. :D
    बाल किशन said...
    अब तक के आपके शानदार सफर के लिए बधाई.
    और भविष्य के लिए शुभकामनाएं.
    Sanjeet Tripathi said...
    बधाई व शुभकामनाएं ममता जी
    Rajesh Roshan said...
    आपको ढेरों बधाईया. ब्लोग्गिंग अनवरत चलने वाली पर्क्रिया है यहा 200 कुछ महीनों बाद 2000 बन जायेंगे.
    anuradha srivastav said...
    बधाई व शुभकामनाएं ममता जी.नित नये विषय पर यूं ही लिखते रहिये।
    yunus said...
    पहले एक साल का धमाका और अब दो सौ वीं पोस्‍ट । ममता जी डबल पार्टी बनती है जी । ग़लती से हम गोआ आ गये तो फिर वसूल लेंगे पार्टी ।
    दिनेशराय द्विवेदी said...
    दो सौ वीं पोस्ट पर बधाई। अब आप की ब्लॉगिंग किशोर हो चली है।
    Shiv Kumar Mishra said...
    दो सौवीं पोस्ट की बधाई स्वीकार करें. ऐसे ही लिखती रहे, यही कामना है.
    Udan Tashtari said...
    बहुत कमाल है..इत्ती सारी पोस्ट..बहुत बहुत बधाई और ढ़ेरों शुभकामनायें. ऐसे ही परचम लहराते रहें.
    पंकज अवधिया Pankaj Oudhia said...
    बहुत दिनो से साँपो पर लेख नही पढा। अब 250 पोस्ट होने से पहले कुछ इन पर भी लिखियेगा।
    राजीव जैन Rajeev Jain said...
    एक साल में दोहरा शतक
    पार्टी तो बनती है।
    Manisha said...
    200 वीं पोस्ट पर बहुत बधाई। जल्द ही 500 वीं पोस्ट भी लिखियेगा। निरंतर लिकती रहें ऐसी कामना है।

    मनीषा
    hindibaat.blogspot.com
    mamta said...
    आप सभी का धन्यवाद।
    उन्मुक्त said...
    हम तो आपकी दो हजारवीं पढ़ने के लिये बैठे हैं :-)
    डा० अमर कुमार said...
    बहुत बहुत बधाईयाँ,
    ऎसे ही लगी रहें ममता जी !
    संकल्प और धैर्य की यह मिसाल हम में से कई
    जनों को मार्ग दिखाती रहेगी । कुल मिला कर एक
    शानदार उपलब्धि !

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