अप्पू घर इस नाम से ना केवल दिल्ली वाले अपितु दूसरे प्रदेश और शहरों के लोग भी वाकिफ है।अप्पू घर amusement park जो कि एक तरह से दिल्ली की पहचान सा बन गया था अब ना केवल अपनी पहचान बल्कि अपना अस्तित्व ही खोने जा रहा है।अप्पू घर जिसे बने २३-२४ साल हो गए है पर अभी तक इतने सालों के बाद भी अप्पू घर घूमने वालों के जोश मे कोई कमी नही आई । किसी भी रविवार को अप्पू घर के बाहर लोगों की भारी भीड़ देखी जा सकती थी।यहां झुला झूलने के लिए लोग बिना सर्दी गर्मी कि परवाह किए घंटों लाइन मे खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते देखे जा सकते थे। (थे इसलिए क्यूंकि बीते रविवार यानी १७ फरवरी से अप्पू घर बंद हो रहा है)
अप्पू घर से तो हमारी भी बहुत सारी यादें जुड़ी हुई है। जब बेटे छोटे थे तो अक्सर ही अप्पू घर जाते थे।और घंटों बच्चे झुला झूलते थे जैसे मोनो रेल,स्माल कार,उड़न तश्तरी,बाईक्स ,और ना जाने क्या-क्या। और पिछले २३-२४ साल मे ना जाने कितने बदलाव भी अप्पू घर मे आए। जैसे पहले तो सिर्फ़ झूले थे फ़िर भूत बंगला बना और फ़िर स्पलेश ट्रेन ,वाटर किंगडम ,आइस-स्केटिंग वगैरा-वगैरा । कोई भी मेहमान दिल्ली आए और बिना अप्पू घर घूमे चला जाए ऐसा तो हो ही नही सकता था।अप्पू घर जहाँ जाकर बच्चे तो बच्चे माँ-बाप भी प्रसन्न हो जाते थे। कुछ झूलों जैसे अप्पू कोलम्बस,स्पलेश ट्रेन पर झूलने मे हमे डर भी बहुत लगता था और मज़ा भी बहुत आता था।
पिछले कुछ सालों से अप्पू घर बंद किए जाने की बात सुनाई देती थी पर अब तो पूरी तरह से तय ही है की अप्पू घर अब बंद होकर ही रहेगा क्यूंकि अप्पू घर की जमीन की लीज़ ख़त्म हो गई है और इसलिए अब इस पार्क की जमीन पर सुप्रीम कोर्ट का अधिकार होगा और सुप्रीम कोर्ट इस पार्क की जगह पर कार पार्किंग बनाएगा क्यूंकि सुप्रीम कोर्ट मे गाड़ियों की संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। ( या हो सकता है की कुछ और बनाएगा।)
अब जब वकील होंगे तो कारें तो बढेगी ही।पर दिल्ली मे मेट्रो रेल भी तो है । अब आधे से ज्यादा दिल्ली मे मेट्रो रेल चलती है। अगर दूसरे ऑफिस आने-जाने वाले मेट्रो रेल मे सफर करके अपने ऑफिस जा सकते है तो क्या सुप्रीम कोर्ट के वकील मेट्रो रेल मे नही चल सकते है।अगर नही तो मेट्रो रेल के होने का क्या फायदा। चाँदनी चौक से लेकर द्वारका से चल कर अप्पू घर तक मेट्रो रेल चलती है। और अप्पू घर सुप्रीम कोर्ट के ठीक सामने है। क्या मेट्रो रेल सिर्फ़ आम जनता के लिए ही बनाई गई है।
पता नही दिल्ली मे इतनी सारी संस्थाएं है सरकारी और गैर सरकारी पर कोई भी अप्पू घर के बंद होने पर आवाज नही उठा रहा है।बच्चों के लिए दिल्ली जैसे शहर मे अप्पू घर जैसा amusement park होना निहायत जरुरी है।अप्पू घर बंद होना बच्चों के लिए अच्छा नही होगा। पर बच्चों के बारे मे सोचता ही कौन है ।
अब जब आमिर खान इस पर फ़िल्म बनायेंगे तब ही लोगों को समझ आएगा।
अब अगली बार जब हम दिल्ली जायेंगे तब अप्पू घर की जगह बड़े-बड़े बुलडोज़र दिखाई पड़ेंगे झूलों को तोड़ते और गिराते हुए .और अब अप्पू घर भी इतिहास बन जायेगा। बस फर्क इतना ही है कि पहले ऐतिहासिक धरोहर को जनता और सरकार बचाती थी पर अब तोड़ती है।
Tuesday, February 19, 2008
अप्पू (घर)अब चला जायेगा
Posted by mamta at 4:47 PM
Labels: amir khan, amusement park, appu ghar, अप्पू घर, ख़बरों की खबर, सामाजिक, सुप्रीम कोर्ट
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3 comments:
आपकी चिंता में हम भी शरीक हैं, लेकिन अफसोस कि मीडिया को छोड़कर और कहीं से कोई आवाज नहीं उठ रही है, अप्पूघर अब जयपुर की शोभा बढ़ाएगा लेकिन दिल्ली की एक पहचान खो गई
अप्पू के जाने का दुःख सबको है ..बहुत सी यादे जुड़ी हैं इस से !! अच्छा लिखा है आपने ममता जी !!
यह तो खबर है हमारे लिये। दुखद।
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