चुस्ती फुरती और मीठी नींद ( सोलहवां दिन )

ओहो आप कहेगें कि चुस्त तो आप पहले भी थे , अरे हम आपकी नहीं अपनी बात कर रहे है और वो क्या है ना हमने पहले भी बताया कि हम थोड़े से आलसी टाइप के है ।


और हमारा फ़ंडा है कि अगर घर में काम करने के लिये हैल्पर है तो फिर हम घर के कामों से दो फ़ीट की दूरी बना कर रखते है , बिलकुल सही समझे आप कि हमें तब घर का कोई भी काम करने में जरा भी दिलचस्पी नहीं रहती है ।


वैसे भी हम घर के काम काज करने में बहुत ज़्यादा आगे नहीं बल्कि पीछे रहते है । ☺️


पर इस कोरोना के चलते जब से हम लोग घर पर है और सारे काम करने वाले हैल्पर छुट्टी पर है तो चाहो या ना चाहो घर का सब काम करना ही पड़ रहा है ।




अभी तो इक्कीस दिन से शुरूआत हुई है और अभी दूर तक जाना है मतलब अभी तो काफ़ी दिन तक हम लोगों को ही सारा काम करना है । इतनी जल्दी इससे नहीं छूटने वाले । 😏



वैसे शुरू में एक दो दिन तो बहुत समय भी लगा सारा घर समेटने में क्योंकि आज तक कभी भी इतना ना तो काम किया और नाहीं कभी ऐसी ज़रूरत पड़ी । पर अब धीरे धीरे पक्के और एक्सपर्ट होते जा रहे है ।


अभी बीस मार्च तक हम रोज़ आठ साढ़े आठ बजे सोकर उठते थे पर आजकल हम साढ़े छै पौने सात पर उठ जाते है । चाय पीते है और सुबह सुबह ही एक्सरसाइज़ वग़ैरा करके साढ़े आठ नौ बजे किचन में नाश्ता और खाना वग़ैरा बनाने लगते है । बीच में नाश्ता भी करते है ।😛



फिर बर्तन धोकर किचन साफ़ करके घर की सफाई ,डस्टिंग वग़ैरह करके ग्यारह साढ़े ग्यारह तक फ़्री हो जाते है पूरे दिन के लिये । और फिर अपनी पोस्ट ब्लॉग पर लगाते है और मोबाइल पर सारे वहाटसऐप ग्रुप और फेसबुक देखते है ।




पर सबसे अजीब बात ये है कि पहले जब हम पूरे दिन इधर से उधर ख़ाली डोला करते थे तब ना तो ब्लॉग लिखने का मन करता था ना ही कुछ काम करने का । बस ऐसे ही आलस में पूरा दिन बीत जाता था ।




पर इस कवैरंटाईन के समय में काम करने से शरीर में एक अलग सी चुस्ती फुरती सी आ गई है । और हमारा आलस्य कहीं दूर भाग गया है । और नींद का तो हाल मत पूछिये । बड़ी मीठी नींद आती है । 😆


आपका क्या हाल है । 🤓









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