वीरे दी वैडिंग

कल हमने वीरे दी वैडिंग फ़िल्म देखी । अब मूवी देखूँ और लिखूँ नही ऐसा कैसे हो सकता है । कभी कभी तो फ़िल्म के नाम से फ़िल्म के बारे में पता चल जाता है पर इस फ़िल्म के नाम से कुछ समझना मुश्किल है ।

चार बचपन की सहेलियाँ जो दस साल बाद वीरे की शादी के लिये दिल्ली में इकट्ठा होती है । इन दस सालों में सबकी ज़िन्दगी बदल गई है । एक सहेली चूँकि घर से भागकर शादी करती है इसलिये परिवार उसे अपनाने के लिये तैयार नहीं तो वहीं दूसरी जिसकी शादी में मॉ बाप ने करोड़ों रूपये ख़र्च करे वो तलाक़ ले रही है तो तीसरी की मम्मी शादी करने के लिये उसके पीछे पड़ी रहती है और चौथी सहेली लव मैरिज करने को तैयार है ।

इन चारों सहेलियों के सोच विचार ,रहन सहन सब कुछ तकरीबन एक जैसा है । अमीर परिवार, ऊपर से सब अच्छा पर असलियत में सब कुछ टूटा हुआ ,आज़ादी जिसके मायने इस फ़िल्म में कुछ अलग से दिखे ।

कुछेक डॉयलॉग्स बड़े मज़ेदार है जैसे शादी झगड़े की फ़ाउन्डेशन है या जब हीरो घर आता है और माँ उसे देखकर पूछती है कि बेटा तुम आ गये तो वो बडे मज़े से जवाब देता है कि नहीं रास्ते में हूँ । 😀

कुछ शब्द जिन्हें पहले सिर्फ़ इंगलिश फ़िल्मों और सीरियल में बोला जाता था इस फ़िल्म से उन शब्दों का समावेश हिन्दी फ़िल्मों में हो जायेगा । सोच रहें है कि उन शब्दों को लिख दें पर नहीं । अब भई मॉर्डन होना इसी को तो कहते है । तो हम रूढ़िवादी ही सही ।

फ़िल्म का फ़र्स्ट हाफ तेज़ी से बढ़ता है पर सेकेंड हाफ थोड़ा स्लो सा लगा । एक्टिंग में तो सभी अच्छे थे पर हाँ स्वरा भास्कर को अल्ट्रा मॉडर्न और हाई-फ़ाई दिखाने के चक्कर में उसके कपड़ों पर ध्यान ज़रा कम दिया गया है । फ़िल्म देखते हुये कई बार लगा कि कुछ बातें ज़्यादा ही बढ़ा चढ़ा कर दिखाई गई है । जैसे जब करीना की मॉ (पिता की दूसरी पत्नी ) उसे साथ आकर रहने को कहती है और वो जो इमैजिन करती है या जब स्वरा परिवार को अपने बारे में जो बताती है । और जिसे सुनकर मॉ बाप बडे ख़ुश होते है ।

इस फ़िल्म की सबसे अच्छी बात ये है कि दिलो दिमाग़ पर ना कोई ज़ोर पड़ता है और ना ही कोई असर । बस फ़िल्म देखो और भूल जाओ ।

पर हाँ इसमें आख़िर में कासटिंग के बाद दस सेकेंड के पॉज के बाद भी एक गाना है हम इसलिये बता दे रहे है क्योंकि वरना आप लोगों का वो गाना मिस हो जायेगा ।😋

अब चूँकि इस फ़िल्म को ए सर्टिफ़िकेट मिला है तो निर्देशक को पूरी आज़ादी है कुछ भी कहने और दिखाने की । आख़िर हम लोग हॉलीवुड से पीछे थोड़ी है । अभी तो यहाँ तक पहुँचे है अगले दस -बीस साल बाद कहाँ पहुँचेंगे ?






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