Wednesday, May 7, 2008

२-३- महीने से टी.वी.पर और हर अखबार और मैगजीन मे टशन फ़िल्म के बारे मे पढ़ पढ़ कर कल हम भी चले गए टशन देखने। और टशन देखने के बाद सोचने लगे की क्या यश राज का स्टैंडर्ड इतना गिर गया है की अब फ़िल्म का हिट होना ना होना उनकी फ़िल्म की हेरोइन के कपड़े और फिगर पर निर्भर होगा। पूरी फ़िल्म मे टशन -टशन सुनते रहे पर ना तो टशन का मतलब समझ आया और ना ही इस शब्द की कोई अहमियत समझ आई। लो जी यही तो टशन है। :)

फ़िल्म मे कहानी नाम की तो खैर कोई चीज ही नही थी और उस पर करीना कपूर ,सैफ और अनिल कपूर की कमाल की एक्टिंग सोने पर सुहागा का काम कर रही थी। कौन क्या कह रहा है और क्या कर रहा है और फेस ऍक्स्प्रॅशन उफ़। इन सबको एक बार pune film institue भेजना चाहिए एक्टिंग सीखने के लिए।ले दे कर अक्षय कुमार बचे पर इसमे वो भी बस बाकियों के रंग मे रंगते हुए से लगे। सब के over acting कर रहे थे. अब जैसे रावण वाला सीन था की चलता ही जा रहा था और end होने का नाम ही नही ले रहा था। आम तौर पर करीना बहुत अच्छी लगती है पर film के फर्स्ट हाफ मे क्लोज -अप मे कुछ ज्यादा ही मेक -अप किए हुए लगी।पहले जो करीना कपडों के लिए जानी जाती थी अब तो उसने भी कम कपड़े का फंडा अपना लिया लगता है।


इस film मे यूं तो फ़िल्म को याद रखने लायक कुछ भी नही था पर कुछ ऐसी बातें है जिनसे लगता है कि निर्माता-निर्देशक जनता को बेवकूफ समझते है।अब जैसे फ़िल्म के एक सीन मे सैफ और अक्षय जिस लाल कार मे जा रहे होते है उस कार मे सामने की नंबर प्लेट पर u.s.g. यानी यू.पी का नंबर लिखा दिखाया पर जब कार से सैफ और अक्षय निकलते है तो कार की पीछे की नम्बर प्लेट पर महाराष्ट्र का नंबर (mh-२३ कुछ ऐसा ) लिखा दिखाया गया। और इतना ही नही बाद मे अचानक ही करीना कपूर भी पानी मे इन दोनों के साथ अवतरित हो गई।ना तो इस फ़िल्म का कोई गाना याद रखने लायक था और ना ही इस का music कानों को अच्छा लगा है ।

इस फ़िल्म के फाईट सीन बड़े ही रोमांचकारी है। एक -एक सीन १५-२० मिनट तक चलता है और सबसे कमाल की बात की जिस जगह सैफ,करीना,और अक्षय गाड़ी मे छुपते है उसे अनिल कपूर बम से उड़ देता है । वो जगह पूरी उड़ जाती है पर इन तीनो को कुछ नही होता है। और ये तीनो तो बाकायदा चलते हुए गाड़ी मे सही-सलामत बाहर आते है।

इससे पहले तो यश चोपडा की फिल्मों मे हिरोइन जो फर्स्ट हाफ मे फुल सलीव्स कपड़े पहनती थी और सेकंड हाफ मे स्लीवलेस कपड़े पहनती थी जैसे सिलसिला और चाँदनी मे । पर अब तो यश चोपडा अपनी हिरोइन के कपड़े ही गायब कर देते है वो चाहे ऐश्वर्या हो या चाहे करीना।


इतनी बड़ी समीक्षा पढ़ते-पढ़ते तो आप लोग भी कह उठेंगे ----टशन :)

16 Comments:

  1. गौरव सोलंकी said...
    टशन भारतीय सिनेमा का नया बदसूरत चेहरा है। यशराज को शर्म आनी चाहिए।
    Suresh Chiplunkar said...
    चोपड़ा कैम्प को दर्शकों का टेस्ट समझ नहीं आ रहा है, फ़िर आदित्य भी रानी के प्यार में पगे हुए हैं सो गधे की तरह फ़िल्में बनाये जा रहे हैं, जो हाल रामू वर्मा का हुआ या महेश भट्ट का हुआ, वही इनका होने जा रहा है…
    राकेश खंडेलवाल said...
    शायद यही वज़ह है जो मैं हिन्दी फ़िल्में नहीं देखता
    कभी पता ये चल न सका है निर्माता क्या, किसे बेचता
    कभी शेढ़ सौ से दो सौ मिनटों का वक्त गंवाया जाये
    इतना समय काल का पहिया मेरे पथ पर नहीं भेजता
    दिनेशराय द्विवेदी said...
    चलो हम बचे इस फिल्म को देखने से। ममता जी आप का धन्यवाद।
    Manisha said...
    इस फिल्म को लेकर सूचना के अधिकार के तहत पूछा जाना चाहिये कि जब इसमें मनोरंजन ही नहीं है तो मनोरंजन टैक्स किस बात का लिया जा रहा है?

    मनीषा
    hindibaat.blogspot.com
    Rajesh Roshan said...
    मनीषा जी की टिपण्णी मजेदार है, हसी आ रही है
    राज भाटिय़ा said...
    ममता जी धन्यवाद,आप ने एक टेंशन से बचा लिया.अगर हम यह फ़िल्म देख लेते तो अगले ६ महीने कोई फ़िल्म नही देखनी थी,यह सजा देते हे आज कल की फ़िल्मो को, ओर हा नये ओर अच्छे गीतो के बारे जरुर लिखा करे ताकि हम जेसे लोगो को भी पता चले न्ये गीतो के बारे मे २००६ के बाद के किसी भी गीत का हमे कुछ पता नही
    राज भाटिय़ा said...
    ममता जी धन्यवाद,आप ने एक टेंशन से बचा लिया.अगर हम यह फ़िल्म देख लेते तो अगले ६ महीने कोई फ़िल्म नही देखनी थी,यह सजा देते हे आज कल की फ़िल्मो को, ओर हा नये ओर अच्छे गीतो के बारे जरुर लिखा करे ताकि हम जेसे लोगो को भी पता चले न्ये गीतो के बारे मे २००६ के बाद के किसी भी गीत का हमे कुछ पता नही
    Udan Tashtari said...
    आभार, बचा लिया!!
    हर्षवर्धन said...
    सारी खराब समीक्षाओं के बाद भी मैंने इसे देखने का मन बनाया था। अब नमस्ते
    mahendra mishra said...
    समीक्षा बहुत बढ़िया लगी धन्यवाद
    Kirtish Bhatt, Cartoonist said...
    ऐसे ही चलता रहा तो यशराज की लुटिया डूब जायेगी.... वैसे औलादें अपनी वाली पे आयें तो क्या नही कर सकती ......हो सकता है लुटिया ही गुमा दें.
    मनीषा जी की टिपण्णी वाकई बहुत मज़ेदार है. ऐसा उन्हें बताया जाए प्लीज़ .
    rakhshanda said...
    फ़िल्म देखना तो पहले ही नही था,क्योंकि ममा का कहना था कि लड़कियों के लायक नही है,लेकिन आप की समीक्षा ने तसल्ली दे दी कि चलो अच्छा ही हुआ...
    DR.ANURAG ARYA said...
    abhi dekhne ki fursat sari ipl ne e rakhi thi.....par aapki sameeksha ke baad thoda sochna padega....
    कंचन सिंह चौहान said...
    hamare Rs 120/- bachavane ka shukriya...vaise khrch to 360/- hote...! ab ham bhi bach gaye.
    कुश एक खूबसूरत ख्याल said...
    टॅशन देखने की गुस्ताख़ी तो मैं कर चुका हू.. ऐसी बेतुकी फ़िल्मे बनाने वालो का तो भगवान ही मलिक है

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