Sunday, May 11, 2008

माँ जिन्हें हम सब भाई बहन
अलग-अलग नाम से बुलाते
कोई माँ तो कोई अम्मा तो कोई मम्मी कहता
आज माँ हम सबसे बहुत दूर है
पर आज भी माँ हम सबके बहुत करीब है
आज भी उनका प्यार करना
उनका डांटना उनका दुलारना
सब याद आता है


माँ जिन्होंने जिंदगी मे कभी
हार नही मानी , यहां तक की
मौत को भी तीन बार हराया
पर आख़िर मे जिंदगी ने
उन का साथ छोड़ दिया
और माँ ने हम सबका



आज भी माँ का वो हँसता मुस्कुराता
चेहरा आंखों और दिल मे बसा है
माथे पर बड़ी लाल बिंदी
और मांग मे सुर्ख लाल सिन्दूर
सब याद आता है ,बहुत याद आता है

12 Comments:

  1. DR.ANURAG ARYA said...
    sari maa ek jaisi hoti hai.
    mehek said...
    maa ki yaadein bahut sundar hoti hai,har maa ek khubsurat ehsaas,wo hamesha hum sab ke saath hoti hai,dil se.
    राज भाटिय़ा said...
    ममता जी,आप से सहनुभुति हे,मां तो बस एक मां हे, जिस के बारे जितना भी लिखा जाये बहुत कम हे.जिस का कर्ज हम कभी नही चुका पाते.
    purvabhatia said...
    बहुत ही सुंदर माँ पर जितना पढ़ा जाए लिखा जाए कम है
    रंजू ranju said...
    ममता जी बहुत ही दिल को छू लेने वाला लिखा है आपने
    Dr.Parveen Chopra said...
    ममता जी, आप ने जिस भावना ने अपनी मां को याद किया है वह उन पर ऊपर तुरंत पहुंच चुकी है और वे ऊपर से आप को आशीर्वाद भेज रही हैं कि मैं सजीव रूप से न सही निराकार रूप में तो हमेशा तुम्हारे साथ ही हूं।
    अभिषेक ओझा said...
    दिल को छु लेने वाला.
    Sanjeet Tripathi said...
    सुंदर! टची!
    mahendra mishra said...
    आज भी माँ का वो हँसता मुस्कुराता
    चेहरा आंखों और दिल मे बसा है
    माथे पर बड़ी लाल बिंदी
    और मांग मे सुर्ख लाल सिन्दूर
    सब याद आता है ,बहुत याद आता है
    मां तो बस एक मां हे
    Gyandutt Pandey said...
    बहुत साफ साफ कहें तो हममें जो भी अच्छा है - मां की बदौलत।
    Parul said...
    gyan ji ne badi sachhi baat kahi hai...
    Udan Tashtari said...
    बहुत भावपूर्ण-ज्ञान जी ने एक पंक्ति में पूरा सार दे दिया.

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