रबर की सड़क

क्या आप रबर की सड़क के बारे मे जानते है। नही तो चलिए हम बता देते है। आजकल की बढ़िया सड़क के बारे मे तो हम लोग जान गए है बकौल लालू यादव हेमा मालिनी के गाल की तरह चिकनी , पर जब हम छोटे थे तब रबर की सड़क होती थी ।क्यों ये सुनकर आश्चर्य हुआ ना ।हमारे दादा खूब किस्से सुनाते थे। तब तो उनकी बातें सुनकर हम सब बच्चे आश्चर्य मे पड़ जाते थे ।ये रबर की सड़क का किस्सा उनमे से ही एक है।

अब ६५-७० के दशक मे तो इलाहाबाद की सड़कें तो फ़िर भी ठीक होती थी पर बनारस की सड़क कुछ अजीब सी तरह की होती थी कुछ उबड़-खाबड़ सी और खुरदरी सी और दिखने मे सफ़ेद। और गोदौलिया के चौराहे के पास तो गड्ढे भी होते थे ।सड़क ऐसी की अगर रिक्शे पर जाए तो पूरे शरीर का अंजर-पंजर ढीला हो जाए। इलाहाबाद और बनारस का क्या तब हर हाई वे बस लाजवाब ही होता था। इतनी पतली सड़क की दो गाड़ी आराम से निकल जाए तो गनीमत और उस पर सड़क के दोनों और मिटटी बारिश मे तो और भी बुरा हाल हो जाता था इन सड़कों का।और बारिश मे जब भी सफर पर जाते तो लगता था की कहीं गाड़ी मिटटी के दलदल मे ना फंस जाए। (इलाहाबाद,बनारस,लखनाऊ ,कानपुर तो हम लोग अक्सर ही कार से जाया करते थे।)


ये बात तब की है जब एशिया ७२ का आयोजन भारत मे दिल्ली मे किया गया था। और देखने के लिए हमारे दादा दिल्ली गए थे।अब उस समय तो दिल्ली जाना ही बहुत बड़ी बात होती थी। और जब दादा दिल्ली से लौट कर आए तो सब बच्चों को जानने की उत्सुकता थी कि दिल्ली कैसा शहर है। अपने इलाहाबाद -बनारस से कितना फर्क है। और भी ना जाने कितनी सारी बातें दादा से पूछनी थी। दादा ने भी खूब मजे ले-लेकर हम सबको दिल्ली के बारे मे बताना शुरू किया की जब वो लोग रेलवे स्टेशन से होटल के लिए निकले तो सड़क पर टैक्सी फर्राटे से दौड़ने लगी जब कहीं भी गाड़ी ने झटका नही दिया तो उनका ध्यान सड़क की ओर गया तो वो ये देख कर दंग रह गए कि दिल्ली की सड़क तो रबर की बनी हुई है दिल्ली की सड़क यहां(इलाहाबाद-बनारस) की तरह नही है बल्कि दिल्ली की सड़क तो रबर की बनी हुई हैना गढ्ढा और ना ही उबड़-खाबड़ सड़क बिल्कुल साफ और चिकनी दिल्ली शहर इतना साफ-सुथरा बिल्कुल लंदन और पेरिस की तरह


हम लोगों का मुंह खुल गया क्या रबर की सड़क !
तो कार चलने से रबर की सड़क ख़राब नही होती है।
तो दादा बोले की अरे नही कार या बस चलने से सड़क मे कुछ भी नही होता है।

अब उस समय हम बच्चों को कुछ समझ नही आया और दादा की बात सुनकर हम लोगों को यकीन हो गया था की वाकई दिल्ली की सड़कें रबर की बनी होती है। और कुछ साल बाद थोड़े बड़े होने पर जब हम दिल्ली गए तब दादा की बताई हुई रबर की सड़क देखी और तब रबर की सड़क का राज समझ मे आया। और दिल्ली की सड़क देख कर लगा की दादा ने दिल्ली के बारे मे कुछ ग़लत नही कहा था । :)

Comments

हम तो काँच की सड़कों के बारे में सुना करते थे, रबड़ की सड़क के बारे में पहली बार ही जाना :)
mehek said…
:);)bahut hi khub rabar ki mulayam sadak,dadaji ka kehna bahut sahi hai.waise dehli jake hume bahut saal gujar gaye,shayad bachpan mein gaye thay.
.... वैसे जिस तरह आपको रबर की सड़कें देखकर कर आश्चर्य हुआ था वैसा ही हमारे एमपी के लोगों को सिर्फ़ सड़क देख कर हो जाता है :D
yunus said…
पक्‍की तौर पर तो नहीं पता ।
लेकिन कहीं पढ़ा था कि केरल में सड़कों पर रबर की परत चढ़ाई जाती है । इससे सड़कें टिकाऊ बन जाती हैं । ऐसा विदेशों में भी होता है ।
सच क्‍या है पता नहीं ।
Gyandutt Pandey said…
पॉलीथीन का कचरा सड़क बनानें में इस्तेमाल हो सकता है।
बाकी यूनुस की कही बात में दम नजर आता है।
हमारे यहीं तो चन्द्रमुखी सड़कें हैं - क्रेटर युक्त। भोजन पचाने में लवणभास्कर चूर्ण की जरूरत नहीं!
Udan Tashtari said…
हम भी एम पी के हैं तो कर्तिश भाई से सहमत-वाकई, सड़क देखकर आश्चर्य करते हैं. :)

रबर की सड़क-एक नई जानकारी जुड़ गई. :)

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