Friday, February 27, 2009

आज बड़े दिनों बाद किसी t.v. सीरियल के बारे मे लिख रहे है । बालिका वधू कलर्स पर आने वाले इस सीरियल मे बुधवार के दिन दिखाए गए एपिसोड को देख कर दुख भी हुआ और अफ़सोस भी हुआ । अभी तक बालिका वधू सीरियल मे जो कुछ भी दिखाया जा रहा था उसे देख कर लग रहा था कि ये सीरियल समाज की एक ऐसी परम्परा की ओर सबका ध्यान खींच रहा है जिसे आजादी के इतने सालों बाद भी मिटाया नही जा सका है । आज भी गाँव और घरों मे इस तरह की शादियाँ होती रहती है । और हर एपिसोड के अंत मे लिखे जाने वाली लाइने समाज को जागरूक करने का काम करती है ।

इन दिनों सीरियल मे सुगना जो की घर की बेटी है उसके गौने को एक हफ्ते से दिखाया जा रहा था जिसमे जब आनंदी की बाल विधवा सहेली फूली शादी की रस्मों को चोरी-छिपे देख रही होती है और दादी सा उसे देख कर अपशगुन हो गया का शोर मचाती है ।और तूफान खड़ा कर देती है । और उस एपिसोड के ख़त्म होने पर जनता की ओपिनियन पूछी जाती है कि क्या फूली का शादी मे शामिल होना अपशगुन है । अब जवाब जनता ने क्या दिया वो तो हम नही जानते है पर बुधवार के एपिसोड मे सुगना के पति प्रताप की मौत हो जाती है । वैसे अब प्रताप को मारने का कोई तुक नही था पर शायद सीरियल मे सुगना को भी दुखी और लाचार दिखाना चाहते है ।इसीलिए उसे भी बाल विधवा बना दिया । जिसकी कोई जरुरत नही थी ।

अगर विधवा फूली के शादी मे शामिल होने से वो अपशगुन नही हुआ ये दिखाते तो शायद ज्यादा बेहतर होता ।तारीफ की बात तो तब होती जब सुगना का खुशी-खुशी गौना होता और सुगना अपने पति के साथ अपनी ससुराल चली जाती

पर नही चूँकि विधवा फूली शादी मे शामिल हुई थी इसलिए अपशगुन हुआ और सुगना विधवा हो गई ।

अफ़सोस इस बात का है कि इस सीरियल ने अपनी ही बात को contradict कर दिया जहाँ एक तरफ़ तो सीरियल समाज की कुरीतियों को बदलने और दरशाने की कोशिश कर रहा है वहीं दूसरी तरफ़ उन्ही कुरीतियों को सपोर्ट भी कर रहा है

19 Comments:

  1. Suresh Chnadra Gupta said...
    आपकी बात सही है. मैंने भी एक पोस्ट लिखी हे इस पर. पधारें मेरे ब्लाग पर
    http://samaaj-parivaar.blogspot.com/2009/02/blog-post.html
    रंजन said...
    ये सिरीयल बिना सिंग पूंछ के बन/चल रहे ्है.. पता ही नही की क्या संदेश देना है...
    Rachna Singh said...
    अगर एक भी व्यक्ति के मन मे इन परम्पराओं को ले कर वितिश्ना हो जाए और वो इनको ना मानने का प्राण कर ले तो बालिका वधु की सफलता हैं . इस सीरियल मे सच और र्दुहिवादी सोच को दिखाया जा रहा हैं जो होता हैं , आज भी कम से उत्तर भारत मे तो विधवा स्त्रियाँ विवाह की रीतियों मे खुद ही शामिल नहीं होती . यहाँ तक की विधवा माँ को कन्या दान और दामाद का तिलक और आरती से भी वंचित रखा जाता हैं .
    reform सीरियल मे दिखने से नहीं होगा reform होगा जब इस सोच से हमको नफरत होगी . जब इस पर खुल कर बात होगी
    the sucess of this serial is that we are detesting what is happening and if that happens in real life also the society will change .

    and i give full marks to the actors who are performing well .

    in rajstan the bride i am told if is widowed this way will have to go to her in laws place in any case and observe all rituals of a widow bride
    संगीता पुरी said...
    किसी प्रकार की रचना का उद्देश्‍य समाज में सकारात्‍मक दृष्टिकोण का प्रचार प्रसार करना है ... जब यथार्थ को यूं ही चित्रित कर दिया जाए तो वह समाप्‍त कैसे हो पाएगा ?
    P.N. Subramanian said...
    मानसिकता इतनी अधिक conditioned हो चली होती है कि ऐसे सेरिअल्स का कोई सकारात्मक असर नहीं पड़ता.
    रंजना [रंजू भाटिया] said...
    शगुन अपशगुन के साथ साथ मुझे लगता है की इस में अब विधवा विवाह के बारे में दिखाया जायेगा ..दादी भी जिसके लिए मान जायेगी .क्यों की सगुना उनकी पोती है ..मेरी तो इसको दिखाने के पीछे यही सकारात्मक सोच है
    Rathore said...
    I think ab Sugana ko pregnant dikhaya jayega.
    विनय said...
    वाह जी बहुत ख़ूब

    ---
    चाँद, बादल और शाम
    कुश said...
    क्या आपको लगता है की विधवा लड़की के घर में आने से ये हुआ होगा? जैसा की आपने कहा की सीरियल में ये दिखाया है.. ये सोच ग़लत है..

    आपने लिखा है विधवा के आने के बाद भी कुछ नही होना चाहिए था.. तब सही लगता.. मतलब कही ना कही आपको लगा की विधवा लड़की की वजह से ही अपशकुन हुआ होगा.. (जो बात अभी तक तो सीरियल में हुई नही है)

    ऐसा नही होना चाहिए

    हम इसलिए ये मान ले ? क्योंकि विधवा के घर में आने के बाद भी कुछ अपशकुन नही हुआ.. कितनी ग़लत सोच है..

    बल्कि शगुन या अपशकुन कुछ भी होने के बावजूद अगर हम किसी को इसके लिए दोषी नही ठहराए तब सही मायनो में हमारी सोच विकसित होगी..

    शायद इसके पीछे उनकी ऐसी सोच रही हो..
    दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...
    ममता जी का कहना सतही तौर पर तो सही है। सीरियल का उद्देश्य जब कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाना है तो उस में इस तरह का पेच नहीं होना चाहिए था। लेकिन निर्देशक लेखक का सोच कुछ और भी हो सकता है। जिस तरह की परिस्थितियाँ हैं उस में भी बहुत कुछ दिखाया जा सकता है। दी गई परिस्थितियों में यह कहने वाले बहुत से पात्र होंगे जो कहेंगे कि विधवा की उपस्थिति से ऐसा हुआ। लेकिन खुद दादी भी तो विधवा है। वह भी तो सब समारोहों में खुद उपस्थित रहती है। तब यह बात दादी के लिए भी कही जा सकती है। यह एक नया अंतर्विरोध होगा। इसे चाहें तो लेखक निर्देशक सही तरीके से दिखा सकते हैं। यूँ काल्पनिक विकास तो कहानी के अनेक बताए जा सकते हैं। हालांकि यह तो पहले दिखा ही दिया गया है कि शीघ्रता के चक्कर में गलत रास्ते बस ले जाना खतरा उठाना था। यूँ कहानी में तकनीकी गलतियाँ भी हैं। पर वे कहाँ नहीं होती।
    सागर नाहर said...
    दर्शकों में अगले एपिसोड तक उत्सुकता जगाये रखने के लिये निर्देशक इस तरह के सफल नुस्खे आजमाते रहे हैं, यह रामायण के दौर से चालू है।
    हो सकता है कि निर्देशक अब अपनी कहानी का फोकस बाल विवाह के साथ साथ विधवा विवाह पर भी करना चाहते हों।
    मुझे लगता है कि प्रताप की मौत दिखाना कुछ खास गलत नहीं है। दरअसल हम पात्रों के साथ इतना जुड़ जाते हैं कि हम धारावाहिक में भि उनकी मौत को देख नहीं पाते।
    खैर, जो भी हो प्रताप की भूमिका कर रहे होनहार और सुंदर कलाकार का रोल इतना जल्दी खत्म हो जायेगा आशा नहीं थी।
    इस सीरीयल में एक खास बात और दिखी, कई नवोदित कलाकारों ने इतना सुंदर अभिनय किया है कि विश्वास नहीं होता कि ये सब नये कलाकार हैं।
    अक्षत विचार said...
    आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूं सीरियल खत्म होने के बाद एक उपदेश की लाइन भी आपने देखी होगी कि क्या बाल विवाह जायज है या कुछ और। परंतु सीरियल निर्माता अपनी ही बातों के खिलाफ जाता दिखायी देता है। पहले विधवा के आने को अपशगुन कहलवाना और फिर वास्तव में अपशगुन होना दिखलाना। तो क्या जो उपदेश दिया जा रहा है उसका कुछ असर लोगों पर पड़ेगा बल्कि वे उल्टा यह मानेंगे की हां ऐसी स्थिति में अपशगुन होता है। टीआरपी और उपदेश दोनों साथ–साथ चलते रहें तो अच्छा ही है।
    लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...
    Balika Badhu dekhee nahee ab tak - magar uski tarif sunee hai

    Bhartiy samajik Ritiyaan, Shagun apshugan !

    sudhar ki avashyakta hai een mei .
    राज भाटिय़ा said...
    बेकार की बातो को मे देखता ही नही, क्या शगून ओर क्या अपशुगन, कुछ भी नही होता, बस हमारे मन का वहम ही है, ओर इन टी वी वालो को लोगो से क्या इन्होने तो पेसा कमाना है, ऊट पाटांग दिखा कर,
    वेसे अब हमे ही सोचना चाहिये, ओर ऎसे कारयकर्मो को देखाना ही नही चाहिये.
    धन्यवाद
    kumar Dheeraj said...
    आपने बालिका बधु के उपर जो बहस छेड़ा है वह काबिलेतारिफ है इसी तरह की एक बात मै भी अपने तरीके से कहा हूं । बालिका बधू सीरियल किस और जा रही है वह आपने तो सही देखा है लेकिन थोड़ा तसरीफ मेरी तरफ भी रखिए । बात कलसॆ टेलीविजन की ही हो रही है । शुक्रिया
    mamta said...
    आप सभी का टिप्पणियों के लिए शुक्रिया ।

    रचना आपका कहना बिल्कुल सही है ।

    रंजना जी आप जो कह रही है ऐसा ही कुछ शायद आगे दिखाया जायेगा जो की अच्छी बात है । पर उसके लिए सुगना को विधवा बनाना कुछ ठीक नही लगा ।

    कुश जी हमें तो ख़ुद ही ये बात ग़लत लगी । और ये जो अपशगुन की बात हमने लिखी है उसमें हमारा यही मानना है कि शगुन-अपशगुन कुछ नही होता है । पर जिस तरह से सीरियल मे हालात दिखाए गए है वो इसी बात को दिखा रहे है ।

    पर हम फ़िर भी कहेंगे कि इसमे सुगना को विधवा बनाने की कोई जरुरत नही थी ।
    Science Bloggers Association said...
    ये सीरियल वाले ही सबसे ज्यादा अंधविश्वास फैला रहे हैं। और बहाना यह, कि जनता यही पसंद करती है।
    Shiva abhimanyu singh said...
    This comment has been removed by the author.
    Shiva abhimanyu singh said...
    tv hum log manoranjan ke liye dekhte hai lekin balika wadhu sirf rulata hai aaj kal iss mandi ke daur me logo ke paas aur bhi mudde hai rulane ke to phir tv sirf manoranjan hi kare to behtar hai

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