Friday, February 6, 2009

नोट- यहाँ ये कहना जरुरी है कि हम किसी भी धर्म या संस्कृति का अपमान करने की मंशा से नही लिख रहे है

हम हमेशा से यू.पी और दिल्ली में रहे है जहाँ किसी का भी अभिवादन हाथ जोड़ कर किया जाता है वो चाहे घर में आए हुए मेहमान हो या कहीं किसी पार्टी या फंक्शन में मिलने वाले लोग हो ।पर यहाँ गोवा में शादी-ब्याह हो,जन्मदिन पार्टी हो,या कोई फंक्शन हो hand shake करने का ही चलन है ।(वैसे तो दिल्ली मे भी इसका काफ़ी चलन हो गया है । )पर गोवा आकर हमारी इस आदत मे कुछ बदलाव आ गया है माने अब हम नमस्कार भी करते है और साथ ही साथ हाथ भी मिला लेते है । स्त्री हो या पुरूष हर कोई हाथ ही मिलाता है । अब ये बदलाव अच्छा है या बुरा नही जानते है । पर कभी-कभी ऐसे हालात हो जाते है कि बस कुछ पूछिए मत ।

और ऐसा नही है कि ये चलन सिर्फ़ कैथोलिक्स मे है यहाँ के जो भी लोकल लोग है वो सभी यही करते है । आपको शायद यकीन न हो पर हमारी खाना बनाने वाली जो catholic नही है वो भी जब किसी मौके पर जैसे जन्मदिन या नया साल होता है तो shake hand करके ही बधाई देती है ।

वैसे इस पोस्ट को लिखने का मन तो बहुत दिन से हो रहा था पर लिख नही रहे थे । खैर कुछ दिन पहले outlook (१९ जनवरी मे छपे नंदिनी मेहता के एक लेख mouth ke saudagar ) मे इस आर्टिकल को पढने के बाद इसे लिखने का मन बना ही लिया ।(इस आर्टिकल का लिंक नही लगा पा रहे है क्योंकि शायद मैगजीन छपने के एक हफ्ता या १० दिन के बाद outlook के कोई भी आर्टिकल को सिर्फ़ रजिस्टर करके ही पढा जा सकता है ।) अब गोवा में तो आप सभी लोग जानते है कि यहाँ पर पाश्चात्य सभ्यता का काफ़ी असर है ।यहाँ आम आदमी हो या बड़ा नेता या फ़िर चर्च के पादरी ही क्यों न हो हाथ मिलाने ( handshake) का काफ़ी प्रचलन है । जब हम नए-नए गोवा में आए थे तो आने के ४-५ दिन बाद ही एक फंक्शन मे गए अब हमने तो हाथ जोड़कर नमस्कार किया पर सामने वाले ने हाथ मिलाने के लिए हाथ बढ़ा दिया । कुछ सेकंड तो समझ नही आया पर फ़िर न चाहते हुए भी हमने भी हाथ आगे बढ़ा दिया । ये था हमारा पहला अनुभव । और उसके बाद तो ऐसे अनगिनत मौके आते ही चले गए । कई बार तो ऐसा भी हो जाता है कि हम नमस्ते करते है तो सामने वाले नमस्ते करते हुए shake hand करने के लिए हाथ बढ़ा देते है ।

वैसे यहाँ पर shake hand करना और cheek kissing बहुत ही आम बात है बिल्कुल western countries की तरह । और ये हम सभी जानते है की ये एक gesture है ।फिल्मों मे, t.v.मे तो बहुत देखा है और जानते है इसके बारे में , पर मुश्किल तब आती है जब हमें ऐसे हालात से दोचार होना पड़ता है ।

अभी कुछ दिनों पहले ही मे हमें cheek kissing का भी अनुभव हुआ । हम किसी के घर शादी मे गए थे जहाँ जब परिवार की महिला सदस्यों से हमारा परिचय कराया गया तो उन्होंने बड़ी ही आत्मीयता से पहले तो shake hand किया और फ़िर cheek kissing की तो हमें बड़ा ही अजीब लगा क्योंकि ये हमारे लिए बिल्कुल अप्रत्याशित था । और हम समझ ही नही पाये कि हम क्या करें । :)

और सबसे मजेदार बात ये हुई कि चूँकि हम असमंजस मे थे और ऐसा कुछ होगा इसके लिए तैयार नही थे इसलिए जब उस महिला ने हमारे एक गाल पर किस कर लिया तो हम थोड़ा पीछे की तरफ़ हो गए ये समझकर कि मिलना हो गया पर तभी उस महिला ने हमारे दूसरे cheek की ओर जब अपना cheek बढाया तो हमने हडबडाहट मे अपना पहले वाला cheek आगे कर दिया पर शायद वो महिला समझ गई थी इसलिए उसने हमारे दूसरे cheek पर किस किया । और उसके बाद तो दूसरी और महिलाओं से भी shake hand और cheek kissing करके ही मिले क्योंकि हमारी नमस्ते के जवाब मेcheek kissing ही हुई ।अरे हंसने की कोई जरुरत नही है :)


और नई जेनरेशन मे तो ये फैशन नही आम होता जा रहा है । गोवा मे रहते हुए इतने दिन हो गए है पर अभी भी कई बार इस तरह कि परिस्थिति मे जब फंस जाते है तो सोच नही पाते है कि क्या करें । अब आप चाहे तो हमें देहाती समझे या कुछ और :)

23 Comments:

  1. PD said...
    चीक किसिंग के किस्से भी मजदर हैं.. कभी फुर्सत में सुनाऊंगा.. :)
    रवीन्द्र प्रभात said...
    कभी कभी असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और हम ऐसी स्थिति में किं कर्तव्य विमूढ़ हो जाते हैं , वैसे किस्सा मजेदार है ...!
    विनीता यशस्वी said...
    Kabhi kabhi sach mai is tarah ki isthitiyo se do-char hona parta hai.

    waise kissa majedaar raha.
    विनय said...
    थोड़ी जल्दी थी सो पूरा नहीं पढ़ा, वापस आकर पढ़ता हूँ, लेकिन रोचक क़िस्सा है!
    chandrashekhar HADA said...
    गोवा कही अमेरिका मे तो नहीं....!!!!बहरहाल -रोचक .
    annapurna said...
    सिर्फ़ असमंजस में पड गए या शर्म से लाल भी हो गए… :):):)

    ऐसे अनुभव बाँटना भी मज़ेदार रहा…
    सुशील कुमार छौक्कर said...
    रोचक वाक्या। बहुत खूब।
    जी.के. अवधिया said...
    जहाँ हम रहते हैं वहाँ के रीति-रिवाजों को अपनाना ही पड़ता है। विश्वास रखिये समय बीतने के साथ आपका संकोच भी मिटता चला जायेगा।
    अनूप शुक्ल said...
    रोचक और मजेदार लेख!
    P.N. Subramanian said...
    हमने गोवा की संस्कृति को बड़े करीब से जाना है. आप की मनोदशा समझी जा सकती है. अंग्रेजी में कहावत है न. व्हेन इन रोम डू एस द रोमंस डू. आभार..
    रंजना [रंजू भाटिया] said...
    :) रोचक और मजेदार पर सच में अजीब वाकया हो ही जाते हैं
    परमजीत बाली said...
    बहुत ही रोचक जानका्री दी है ।
    अभिषेक ओझा said...
    चीक किसिंग गोवा में तीन बार होता है या पाँच बार? कई जगहों पे सात का भी प्रचलन शुरू हो गया है :-) अपने भी कुछ अनुभव है इस मामले में तो !
    राज भाटिय़ा said...
    अरे ममता जी मै तो रहता ही इस सभ्यता के अन्दर हूं, हमे शुरु शुरु मै थोडी दिक्कत होती थी, लेकिन अब यह (युरोपियन )लोग भी दुनिया को जानने ओर पहचाने लग गये है, ओर हम जब भी किसी पार्टी या किसी के घर जाते है तो हाथ मिलाना, ओर हाथ जोड कर नमस्ते काफ़ी है, इस से आगे नही , ओर यह लोग भी सिर्फ़ अपने परिवारिक लोगो की ही किस करते है सभी की नही, ओर कई बार हमे हेरानगी होती है जब सामने वाला गोरा दोनो हाथ जोड कर नमस्ते मे हमारा स्वागत करता है, ओर फ़िर यह लोग बताते है कि इन्हे जब पता चला कि हम भारतीय है तो इन्होने यह सब किताब से पढा,कि किस तरह से भारत के लोग अभिनदन करते है.
    लेकिन हम सब भारतीया अब भी यहां आपस मे मिलते है तो हाथ जोड कर ही नमस्ते करते है.
    धन्यवाद, बहुत अच्छा लगा आप का यह बताना, कभी गोवा आये तो देखेगे यह सब.
    Sudhir (सुधीर) said...
    ममता जी,

    आपने एक ऐसा विषय चुना जोकि सामाजिक जीवन के द्वंद को दिखता हैं। इस असमंजस की स्थिति से मैं ख़ुद भी रूबरू हो चुका हूँ। इस कारण और भी विषय से जुडा और विचारमग्न हुआ। साधुवाद।
    Arvind Mishra said...
    अब जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी सरे आम चुम्बन को हरी झंडी दिखा दी है तो पूरे हिन्दुस्तान में यह नजारा दिखेगा ! वैसे भी गोवा के लिए जब यह एक स्थानीय संस्कृति है तो जैसा देश वैसा भेष !
    Shastri said...
    आपको ताज्जुब होगा, पिछले हफ्ते अपनी बहन के घर गोवा था तो मुझे भी काफी दिक्कत हुई. स्त्रियों से हाथ जोड कर नमस्ते करने की मेरी आदत है, लेकिन बहिन के पेशेवर मित्र (मैडिकल कालेज के अध्यापकगण) और उनकी पत्नियों ने एक एक करके हाथ मिलाया.

    हिन्दुस्तान में जो विविधता देखने को आती है वह कई बार सोच से परे है.

    सस्नेह -- शास्त्री

    -- हर वैचारिक क्राति की नीव है लेखन, विचारों का आदानप्रदान, एवं सोचने के लिये प्रोत्साहन. हिन्दीजगत में एक सकारात्मक वैचारिक क्राति की जरूरत है.

    महज 10 साल में हिन्दी चिट्ठे यह कार्य कर सकते हैं. अत: नियमित रूप से लिखते रहें, एवं टिपिया कर साथियों को प्रोत्साहित करते रहें. (सारथी: http://www.Sarathi.info)टिप्पणी देकर उनको प्रोत्साहित करें!!
    ज्ञानदत्त । GD Pandey said...
    हम तो मित्र मिलने पर पुरातनपन्थी बिअर-हग के आदी हैं।
    कभी कभी तो अपने निरिक्षणों के दौरान सफाइकर्मी से भी गले मिल लेता हूं - और यह कई लोगों को असहज लगता है।
    लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...
    ये भी रोचक रहा ममता जी :)
    varsha said...
    घबराइये मत। जिस दिन अंग्रेज लोग नमस्ते करना शुरू कर देंगे, हम भी वापस आ जायेंगे। यही तो नियम है न, जो वो करें वही हम करें!
    Abhishek said...
    होता है कभी-कभी ऐसा भी.
    Science Bloggers Association of India said...
    नसीब अपना अपना।
    मीनाक्षी said...
    ममताजी,,, रोचक लगा आपका अनुभव... अरब देश में भी दोनो रस्में आम हैं..औरतें हाथ मिलाकर अगर तीन बार चीक किसिंग करे तो समझिए कि आप उनके दिल के बहुत करीब है...

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