उफ़ ये कानून के रक्षक है या भक्षक

कल शाम टी.वी . पर एक न्यूज़ देख कर मन तड़प गया और सोचने पर मजबूर हो गए की ये कानून के रक्षक है या भक्षक । उत्तर प्रदेश के इटावा के एक पुलिस स्टेशन की ख़बर दिखाई जा रही थी जहाँ ७ साल की एक छोटी सी लड़की को २ पुलिस वाले (जो उमर मे काफ़ी बड़े लग रहे थे ) उसके सर के बाल को खींच-कर उससे सच उगलवाने की कोशिश कर रहे थे की उसने चोरी की है ।इन दो पुलिस वालों मे से एक ने तो बच्ची के बाल जोर-जोर से खींच कर छोड़ दिया था परन्तु दूसरे पुलिस वाले ने अपनी वरदी का पूरा जोर उस बच्ची पर ही निकलना ठीक समझा और इसके लिए उसने बच्ची के बालों को दोनों हाथों से पकड़ कर बच्ची को ऊपर उठा कर उससे सच उगलवा रहे थे । और वो बच्ची जोर-जोर से चीख रही थी पर उसकी चीखें उन लोगों के कान तक नही पहुँच रही थी क्यूंकि आख़िर उन्होंने एक चोर को जो पकड़ लिया था और सारी ताकत उस पर ही निकालनी थी ।क्या एक पल के लिए भी उन्हें ये एहसास नही हुआ की वो एक छोटी सी बच्ची है

काबिले तारीफ़ है इन पुलिस वालों की सच उगलवाने की तरकीब
हो सकता है की इस बच्ची ने चोरी की हो पर उसकी ऐसी निर्मम सजा ।


उस न्यूज़ मे कुछ और भी पुलिस वाले दिखे थे पर उनमे से कुछ एक ने तो वहां से हट जाना ही बेहतर समझा तो कुछ ने इस तमाशे का पूरा मजा लिया । हालाँकि इन दोनों पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया गया है पर अफ़सोस इस बात का है की ये पुलिस वाले लाचार या गरीब व्यक्ति पर ही अपने डंडे और ताकत का जोर दिखा पाते है । और कितनी ही बार हम इस तरह की ख़बर पढ़-देख चुके है ।

Comments

विनय said…
ताक़त पास न हो तो दुनिया को गाली देते फिरेंगे और जब ताक़त मिल जाये तो उसका दुरुपयोग करेंगे, अब तो जगत की यही रीत है


चाँद, बादल और शाम
seema gupta said…
"बेहद शर्मनाक घटनाक्रम है ....पता नही क्यूँ हमारी सम्वेदना मरती जा रही है...."

Regards
jitendra said…
in polece walo ke pass bahut taakat hain inko to naxali ilako me bhej dena chahiye
Mahendra said…
बड़े दुःख की बात है एक पुलिस वाला मुंबई में गोली खाने को तैयार रहता है दूसरा दरिंदगी की सारी हदे पार कर जाता है टीवी देख कर बहुत गुस्सा आया लेकिन गुस्सा समाधान नही है और ऐसा भी नही है की ऐसी घटना दुबारा नही होगी पुलिस के डीजीपी होने के नाते माननीय श्री विक्रम सिंह जी को उस बच्ची से माफ़ी मांगनी चहिये और उन पुलिस वालो की सैलेरी से १००० रुपये महिना काट कर उस बच्ची को अगले १० साल तक दे इससे उन पुलिस वालो को हमेसा याद रहे और दुसरे भी इनसे सबक ले
खास जरुरत है पुलिस विभाग को .अपनी ट्रेनिंग में कुछ बदलाव की जिससे वे ज्यादा सवेदनशील ओर मानवीय बने....अफ़सोस वे अपनी छवि के अनुरूप ही काम करते है
शायद उस पुलिस कर्मी को अपने पद का रौब सर चढ़ कर बोल रहा था तभी मासूम बच्ची की पीड़ा उसने महसूस नहीं की ..शर्मनाक है यह
बड़ी शर्मनाक है. दूसरी तरफ़ पहुंचे हुए गुंडों को ये हरामखोर लोग नाश्ता करवाते हैं और ऐसा व्यवहार करते हैं मानो उनके निजी नौकर हों.
बेहद शर्मनाक घटना है ।कई बार तो लोग इनकी मार से बचनें के लिए झूठा इल्जाम भी अपने सिर ले लेते हैं।
अगर यह पुलिस वाला असल बाप का हे, ओर हिम्मत वाला है तो इन नेताओ को पकड कर दिखाये जो करोडो, अरबो का माल डकार जाते है, तो माने , साला होगा किसी हरामी की ऒलाद, जो एक सात साल की बच्ची जिस ने शायद पेट भरने के लिये चोरी की होगी, पर अपनी मर्दन्गी दिखा रहा है,
Abhishek said…
Ab aap nahin kah saktin ki Police apmna kaam sakhti se nahin karti!
पुलिसिया अधिकार बर्बरता से पुष्ट होता है। और अधिकारी भी इसमें मौन सहमति देते हैं।
Arvind Mishra said…
जी सचमुच बहुत शर्मनाक !
Maan lo ki us Ladki ne chori kee bhee ho tab bhee, aisee krurta thik nahee ..
Dono police suspend hue ya nahee ?
Yehan " sensitivity training " dee jati hai ...

It is very important to have the correct balance between Law breakers & Law implementors.
Shastri said…
जनता की आवाज का कुछ असर हुआ और उन लोगों के विरुद्ध काररवाही की जा रही है.

सस्नेह -- शास्त्री

Popular posts from this blog

कार चलाना सीखा वो भी तीन दिन मे .....

क्या उल्लू के घर मे रहने से लक्ष्मी मिलती है ?

निक नेम्स ( nick names )