संगीत के युद्घ और योद्धा

आज कल हर चैनल चाहे वो ज़ि हो चाहे सोनी हो और चाहे स्टार प्लस हो सभी चैनल उस एक आवाज को ढूँढ रहे है जो हिंदुस्तान की आवाज बन सके। हालांकि नाम अलग -अलग है। ज़ि पर संगीत का प्रथम विश्व युद्घ सा,रे,गा,मा,पा , २००७ है तो सोनी पर इंडियन आइडल है तो भला स्टार कैसे पीछे रहता उनके कार्यक्रम का नाम वॉइस ऑफ़ इंडिया है। इन तीनों कार्यक्रम के जज भी हिंदी फिल्मों जाने-माने संगीतकार लोग है जो भाग लेने आये हुए लोगों की धज्जियां उड़ाने मे जरा भी संकोच नही करते है।

अभी तो सिर्फ सोनी और ज़ि पर ही शुरू हुआ है स्टार वाला तो शायद १८ से शुरू होगा। सोनी पर अन्नू मलिक तो ऐसे लोगों की बेइज्जती करते है की क्या कहा जाये। और उदित नारायण तो बिल्कुल बेपेंदी का लोटा जैसे है,अरे हम यूं ही थोड़े ही कह रहे है। आप लोगों को तो पता ही है कि हम टी.वी देखते है तो पिछले हफ्ते हमने भी इंडियन आइडल देखा। एक असम कि सीढ़ी-साधी लडकी ने काफी अच्छा और सुर मे गाना गाया पर अन्नू मलिक जी को पसंद नही आया हालांकि जावेद अख़्तर और अलीशा को उसका गाना पसंद आया था पर चुंकि अन्नू मलिक नही चाहते थे कि वो लडकी आगे बढ़े इसलिये जैसे ही उदित नारायण कहने चले कि उन्हें उसकी आवाज अच्छी लगी अन्नू मलिक झट से बोले कि कुछ भी कहने से पहले ये सोचो कि हम इंडियन आइडल ढूँढ रहे है । वैसे जावेद अख़्तर ने तो कहा कि अगर वो लडकी जीन्स पहनकर गिटार लेकर गाना गाती तो अन्नू मलिक को पसंद आ जाता। अब समझ गए ना कि हम उदित नारायण को बेपेंदी का लोटा क्यों बोले । अरे भाई रोजी-रोटी का जो सवाल है।


ज़ि पर तो और भी ड्रामा चलता है। ये हिमेश रेशमिया नाटक करने का कोई भी मौका नही छोड़ता है। उन्हें ऐसा लगता है मानो उनसे बेहतर तो कोई है ही नही। दूसरे कि बखिया उधेड़ने के अलावा कुछ नही करते है। जरा दो-चार गाने क्या हिट हो गए (वैसे ज्यादातर गाने एक से ही लगते है)कि अपने को बहुत महान समझने लगे है। कुछ नया तो करके दिखाओ । पिछली बार के कार्यक्रम मे प्रतियोगियों के बीच मे भी गुट बाजी करवाने का कोई भी मौका उन्होने नही छोडा था। इस बार देखे क्या-क्या करते है।


स्टार प्लस का तो अभी शुरू होगा पर शायद उनके जज इतने खर- दिमाग नही है क्यूंकि इससे पहले भी वो लोग ज़ि के अलग-अलग संगीत कार्यक्रम मे आ चुके है और अन्नू मलिक और हिमेश कि तरह प्रतियोगीओं को complex नही देते है। अगर कोई खराब गाता है तो उसकी बेइज्जती करने कि बजाए थोड़े नरम लहजे मे भी उसे reject किया जा सकता है। मानते है कई बार बहुत ही बेसुरे और फालतू टाईप के लोग भी आ जाते है सिर्फ इसलिये कि वो टी.वी.पर आ जाएँ।

Comments

Pratik said…
विडम्बना यह है कि ये लोग संगीत के क्षेत्र में वाक़ई "युद्ध" की मानसिकता को ले आए हैं। अब संगीत की ऐसी-तैसी होना तय जान पड़ती है।
ममता जी,संगीत में भी भाई-भतीजा वाद घुस गया है।इसे हमने भी महसूस किया है।लेकिन आप क्या बिगाड़ सकते हैं उनका। सिर्फ अलोचना करने के सिवा। प्रभू इन को सदबुद्दि दे।
धुरविरोधी said…
ममता जी, मुझे तो इस प्रोग्रामों को देखने के बजाय आप सभी के चिठ्ठे पढ़ना ज्यादा अच्छा लगता है.
आप भी छोड़िये इन्हें
ममता जी सभी जानते हैं कि इन कार्यक्रमों में जो झगडा-वगडा होता है वो भी प्रायोजित और नौटंकी होता है, यदि आप मराठी समझती हों तो कृपया एक बार जी मराठी का "सारेगामापा" देखिये, कितनी बारीकी से जज समझाते हैं कि कहाँ गलती हो रही है, या उसमें कैसे सुधार किया जा सकता है, अन्नू मलिक या हिमेश रेशमिया मराठी संगीतकारों के ज्ञान के सामने कुछ भी नहीं हैं...
Udan Tashtari said…
जब इतने चैनल देख ही रहीं हैं तो एक हमारा भी सबसे तेज चैनल देखें "बात-कर". :)
Udan Tashtari said…
अरे, लिंक तो दी ही नहीं बातकर की:
http://udantashtari.blogspot.com/2007/05/blog-post_10.html
mamta said…
सुरेश जी २-३ पहले इसी सा,रे,गा,मा,पा, मे बहुत ही अच्छे तरीके से संगीत की बारीकियां समझायी जाती थी। और बहुत अच्छे -अच्छे कलाकार भी इसी कार्यक्रम से निकले है जैसे श्रेया घोषाल,कुनाल गान्जावाला आदि। ये तो अब खराब हो गया है।

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