Wednesday, May 9, 2007

अंडमान मे रहते हुए घूमते -फिरते मस्ती मे दिन निकल रहे थे और हमारी सेहत भी काफी अच्छी- खासी हो रही थी। morning walk जरा मुश्किल होता था क्यूंकि एक तो वहां सूरज बहुत तेज होता है और दूसरा हमे सुबह की नींद बड़ी प्यारी है । यूं तो लोग कहते है और हम जानते भी है कि सुबह सुबह टहलना सेहत के लिया अच्छा होता है पर क्या करें आदत से मजबूर है।फिर पता चला की वहां एक जिम है ,वहां जाने पर पता चला की उन दिनों वहां कोई भी महिला जिम मे नही आती है। इसलिये हमने चाहकर भी जिम जाने का इरादा छोड दिया था।

पोर्ट ब्लैयेर मे दावतें ख़ूब खाते थे। ऐसे ही एक दिन वहां के उप राज्यपाल के यहाँ दावत मे कुछ नए लोगों से मुलाकात हुई और जिसमे तीन-चार महिलाओं से उतनी थोड़ी ही देर मे काफी अच्छी दोस्ती हो गयी। और हम सभी अपनी बढती सेहत और घर मे रहते-रहते बोर सी हो रही थी। इसलिये हम सबने सोचा कि जब पोर्ट ब्लैयेर मे जिम है तो उसका फायदा भी उठाना चाहिऐ । बस फिर क्या था वहीँ खाना खाते-खाते तय हुआ कि कल से जिम शुरू।

घर लौटते ही हमने घर मे घोषणा कर दी कि कल से हम जिम जायेंगे और वापस shape मे आकर दिखायेंगे। अगले दिन हम चारों तय समय पर जिम पहुंच गए। जिम मे यूं तो महिलाओं के लिए ३ बजे से ५ बजे तक का समय था पर चूंकि वहां कोई महिला जाती नही थी इसलिये उस समय पर भी लड़के ही वहां exercise करते थे । पहले दो -तीन दिन तो सभी लड़कों को लगा की ये लोग तो बस यूं ही आ गयी है । सो रोज वहां जाकर पहले लड़कों को बाहर निकलवाना पड़ता था फिर धीरे-धीरे उन्हें भी समझ मे आ गया की हम चारों वहां रोज आने वाली है।

दो दिन बाद इन्स्त्रक्टर ने हम लोगों को सारे stations कैसे करने है और कौन से नही करने है सब बताया और बहुत सारी exercise भी बताई और यूं शुरू हुआ जिम । तीन से चार तो हम exercise करते थे पर उसके बाद वहीँ बैठ कर दुनिया भर की गप्पे मारा करते थे हालांकि जिम मे हर तरफ शांत रहे लिखा था पर ये तो सभी जानते है की जहाँ औरतें हो वहां कोई शांत कैसे रह सकता है। वैसे आजकल तो आदमी लोग भी बात करने मे कहां पीछे है।

5 Comments:

  1. Pratik said...
    सही कहा आपने, जिम में बहुत गप्पबाज़ी होती है। समय मिले तो जिम में मेरे अनुभव भी पढ़िएगा।
    Sagar Chand Nahar said...
    वजन कम हुआ या नहीं?
    वैसे अंतिम पैरा बहुत अच्छा लगा।
    mamta said...
    प्रतीक हमने आपकी पोस्ट पढी बहुत ही दिलचस्प तरीके से आपने लिखी है। वैसे ये भी सही है की जिम मे हर कोई दूसरे को सिखाने मे लगा रहता है। पर हम लोग खुशकिस्मत थे क्यूंकि हम सभी पहली बार जिम गए थे तो कोई किसी को सिखाने के चक्कर मे नही पड़ा था।


    नाहर जी फोटो तो आपने देखी ही है।
    Udan Tashtari said...
    बातचीत तो समझे. वजन का क्या हुआ? कुछ शेप वगैरह में लौटा गया कि बस बात चीत में ही समय बीत गय. :)
    mamta said...
    वजन तो वही का वही रहा क्यूंकि जो एक घंटा exercise करके घटाते थे वो एक घंटे की गप्प मे वापस वही आ जाता था।

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