Tuesday, May 1, 2007

कितने डे शीर्षक हमने इसलिये दिया है क्यूंकि कल आज तक चैनल पर इंटरनेशनल डान्स डे दिखाया जा रहा था जो इससे पहले हमने कभी नही सुना था। इसी लिए हमने एक पोस्ट ही इस पर लिख दी है। हमने डे कोई क्रम मे नही लिखे है।

पहले तो independence डे और republic डे और childrens डे ही होता था और हाँ birth डे भी होता था जो आज भी होता है।
क्या देश क्या विदेश सभी जगह womens डे मनाया जाता है।

पर धीरे-धीरे mothers डे शुरू हुआ अच्छा भी है क्यूंकि इस दिन माँ को बच्चे बधाई देते है उनके माँ होने की।

उसके बाद fathers डे सुनाई दिया ,ये भी ठीक है क्यूंकि अगर माँ बधाई की पात्र है तो पिता भी बधाई के हकदार है।

फिर friendsship डे शुरू हुआ ,ठीक भी है क्यूंकि दुनिया मे दोस्ती से बढकर कोई चीज नही है।

जैसा की हम सभी जानते है कि आज labour डे है पर क्या सही मायने मे हम labour डे मनाते है।

आज कल तो slap डे , chocolate डे , rose डे भी मनाया जाता है।

aids awareness डे और disability डे मनाया जाता है जो की सामजिक दृष्टि से बहुत अच्छा है।

डे की बात हो और वैलेंटाइन डे की बात ना हो भला ऐसा कैसा हो सकता है।

आप लोग सोच रहे होंगे की बात तो शुरू हुई डांस डे से और इतने सारे डे लिख डाले। चलिये हम डान्स डे पर वापस आते है । जैसा की आज तक पर बताया गया कि उन्तीस अप्रैल को इंटरनेशनल डान्स डे था। विदेश का तो पता नही पर अपने देश मुम्बई मे काफी जोर-शोर से मनाया गया था। कोई संदीप सोपाकार नाम के करिओग्रफेर ने अलग -अलग हिरोइन (काजोल ,अदिति गवात्रिकर,किट्टू गिडवानी ) के साथ करीब १८ किस्म के डान्स करे थे। सारे नाम तो हमे याद नही है पर एक-दो याद है जैसे सालसा । ज्यादातर western डान्स ही थे पर डान्स के लिए हिंदी गाने ही बजा रहे थे।

इतनी डान्स कथा इसलिये लिख डाली क्यूंकि शायद कुछ समय बाद पूरे साल यानी ३६५ दिन ही कोई ना कोई डे मनाया जाएगा । हमारी जानकारी जरा कम है इसलिये हो सकता है कई डे रह भी गए होंगे तो उसके लिए हम माफ़ी चाहते है।

5 Comments:

  1. अनूप् शुक्ल said...
    अच्छा किया याद् दिला दिया इतने दिन् हैं!
    Debashish said...
    आप एक और महत्वपूर्ण डे का ज़िक्र करना भुल गईं, वो हैं मन्ना डे :)
    उन्मुक्त said...
    slap डे क्या होता है? :-)
    mamta said...
    slap डे के बारे मे सिर्फ सुना है पर जैसा की इसके नाम से लगता है चांटा मारने को ही कहते होंगे।
    अतुल श्रीवास्तव said...
    ये पढ़िये:

    http://lakhnawi.blogspot.com/2007/02/blog-post_16.html

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