नारद रेटिंग

अभी हमने जब नारद की साईट खोली तो लो भईया हम तो दंग ही रह गए की अभी तक हमारी तीन पोस्टों मे से एक भी पोस्ट आख़िर क्यों नही नजर आ रही है। पर खैर अब ये हमारे हाथ मे तो है नही। तो बाक़ी लोगों के ब्लॉग पढने के बाद हम यूं ही टहल कदमी करते हुए नारद रेटिंग पर देखने लगे की यहां पर क्या है तो पाया की वहां सभी चिट्ठाकार जो नारद पर रजिस्टर्ड है उन्हें रेटिंग दी गयी है । और चिट्ठों की अलग-अलग श्रेणी बनायी गयी है और उनको अलग-अलग नम्बर देकर रेटिंग की गयी है। जो की काबिले तारीफ है।

यूं तो ये बहुत ही अच्छा है पर यही पर आता है एक पेंच वो ये है कि और तो सारे चिट्ठाकारों के नाम काली इंक मे लिखे है पर कुछ चिट्ठाकारों जैसे घुघुती वासूती ,notepad ,और mamta t.v.कुछ नारंगी से लिखा है । पर बहुत सोचने पर भी हमारी समझ मे ये नही आया की आख़िर ऐसा क्यूं है।फिर लगा कि हो सकता है कि महिला होने के नाते हम लोगों को इस तरह से लिखा गया है । पर अगर ऐसा इसलिये है की हम तीनो महिला है तो फिर अन्य महिला चिट्ठाकार के नाम भी नारंगी रंग मे क्यूं नही लिखे गए है। और विनय पत्रिका को नारंगी रंग से क्यूं लिखा है ?

हो सकता है आपको ये वाहियात सवाल लगे पर चुंकि हम ब्लॉगिंग के क्षेत्र मे नए है इसलिये जिज्ञासावश ये सवाल पूछ रहे हैउम्मीद करते है कि किसी को हमारा ये सवाल पूछना खराब नही लगेगापर हम इसकी वजह जरूर जानना चाहेंगेअगर आप जानते है तो कृपया बताइये

Comments

Jagdish Bhatia said…
वास्तव में नारद पर सभी चिट्ठों के लिंक एक ही रंग में हैं मगर यदि आपने जिन लिंक पर क्लिक किया होगा उनका रंग बदल जाता है, इसका नारद या किसी भी साइट से कुछ लेना देना नहीं है
जगदीश जी सही कह रहे हैं।
वहां सभी के लिंक काली स्याही से ही है पर जब माऊस का कर्सर किसी भी लिंक पर ले जाया जाएगा तो उस खास लिंक का रंग बदल जाएगा!!
mahashakti said…
:)

हमारा भी खोल लीजिऐ वह भी नारंगी हो जायेगा।
जीतू बतायेंगे इस बारे में।
निशा said…
नारद का आपने परिचय तो करा दिया पर उसमें हमारा ब्लाग जुड़ नहीं रहा उसमें ब्लाग बहुत देर से दिखते हैं
आप दिल्ली में कहां कहां घूम रहे हैं उसके बारे में डिटेल से लिखिये ना
mamta said…
हमने अभी-अभी नारद रेटिंग पर फिर से देखा तो वही पाया जैसा की हमने लिखा था की तीन-चार नाम अभी भी नारंगी रंग मे दिख रहे है। और हमने ना तो कल इन नामों पर क्लीक किया था और ना ही इन नामों पर कर्सर ले गए थे । हम तो सिर्फ स्क्रोल कर रहे थे वो भी साइड मे।
RC Mishra said…
ममता जी, अब मान भी जाइये, इतने लोग कह रहे हैं तो सही ही कह रहे होंगे।

वैसे तो ये भी सही बात है कि ये रंग बदलने का चक्कर रखना ही नही चाहिये। अब रखा तो हमने अपने ब्लॉग मे भी है, चाहे तो अभी देख लीजिये, वहाँ साइड बार मे जो कमेंट है, क्लिक करने पर वो नीले से हरे हो जाते हैं, और वे तब तक रहते हैं, जब तक कि आपका ब्राउजर ये भूल नही जाता कि आपने कभी उस पर क्लिक किया था
Udan Tashtari said…
आप तो बस अपना बेहतरीन लेखन करते रहें. यही कामना है.

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