Monday, July 9, 2007

ताज क्या वाकई मे नम्बर वन है ? हमारी इस पोस्ट पर आप लोगों के कमेंट्स पढ़कर हमे लगा कि शायद आप लोग ये सोच रहे है कि हम ताज के नम्बर वन आने पर खुश नही है। अजी ऐसा बिल्कुल नही है हम ताज के दुनिया के सात अजूबों मे नम्बर एक पर आने पर बेहद खुश है और हों भी क्यों ना आख़िर हमने भी तो ताज के लिए एस.एम्.एस किया था और नेट पर वोट भी किया था क्यूंकि हर हिंदुस्तानी की तरह हम भी ताज को दुनिया के सात अजूबों मे देखना चाहते थे।ताज के बारे मे ये सवाल उठा कर हम किसी को दुःख नही पहुँचाना चाहते थे पर अगर किसी को हमारा ये पूछना गलत लगा हो तो हम क्षमा चाहते है

जैसा कि divine india ने लिखा है कि ताज प्यार की एक बेमिसाल निशानी है। और ताज ताज है तो हम भी इस बात से इनकार नही करते है कि ताज ताज है और ताज जैसा ना तो पहले कभी कोई था और ना ही कभी कोई दूसरा होगा। इसके लिए यहां पढ


B.N.जी हमने ये सवाल यूं ही नही उठाया है । और कल तो कुछ न्यूज़ चैनल भी ऐसी ही कुछ बात कह रहे थे


समीर जी आपने बिल्कुल ठीक कहा है हमे ताज के चुने जाने पर नही बल्कि उसको चुनने की प्रक्रिया पर संशय हो रहा इसके लिए यहां पढ़ें.

अतुल जी आपने सही कहा है की ताज तो ताज ही है वो चाहे नम्बर एक हो या सौ। और इसी लिए ताज ना केवल भारत अपितु सारी दुनिया मे मशहूर है। ताज के बारे मे जितना भी कहा जाये या लिखा जाये वो कम है

अनूप जी हम क्या सारा भारत ख़ुशीमना रहा है।

इतना सब कुछ लिखते-लिखते तो ये पूरी एक पोस्ट ही बन गयी है इसलिये अब हम इसे पोस्ट ही कर देते है

3 Comments:

  1. Udan Tashtari said...
    चयन प्रक्रिया से असंतुष्टी तो समझ आती है. आभार आपने अपनी बात को विस्तार दे हमारे संशय को दूर किया. :)
    चलिये, अब खुशी में मिठाई खिलाईये. :)
    Divine India said...
    मैं तो मात्र यह कह रहा था कि जिसे बहुत पहले नंबर 1 होना चाहिए था वह आज लिस्ट में आया है और सवाल तो उठेगा ही हमेशा उठता रहा है जब 2000 साल पहले ग्रीक विद्वानों ने सात अजूबों को चुना था वह उस वक्त भी विवादास्पद था।
    लेकिन अधिक जानकारी का शुक्रिया…।
    और समीर भाई से मैं भी इत्फाक रखता हूँ… मिठाई बकाया है…।
    BN said...
    ममता जी, न्यूज़ चैनल्स का काम ही ऐसे सवाल उठाना है जिससे लोगो को ये लगे कि कितने बुद्धिजीवी लोग इस चैनल पर काम करते हैं। सवाल उठाना कोई ग़लत बात नहीं है -लेकिन जब सवाल उठाया जाए तो उसके पीछे का कारण भी स्पष्ट किया जाना चाहिये। वरना सवाल उठाना तो बहुत आसान है। अगर मैं ये कह दूँ कि कलाम साहब एकदम बकवास राष्ट्रपति रहे हैं (हालाँकि मेरे विचार में वे अभी तक के सबसे अच्छे राष्ट्रपति साबित हुए हैं) -तो अधिकतर लोगो की नज़र मेरी ओर उठ जाएगी -क्योंकि हर कोई यह जानना चाहेगा कि आखिर ये कौन है जो लोकप्रिय जनमत के खिलाफ़ बोल रहा है। फिर ज़ाहिर तौर पर लोग मेरे इस ऐलान का कारण तो पूछेंगे ही। बस यही बात है। ये चैनल्स और बहुत से लोग ऐसा समझते हैं कि लोकप्रिय जनमत के उल्टा कुछ बोल कर अपनी महत्ता प्रमाणित की जा सकती है। और ये ऐसा भी सोचते हैं कि अधिकतर लोग मूर्ख हैं और कोई उनसे उनके सवालों के पीछे का कारण नहीं पूछेगा। लेकिन ऐसा है नहीं -लोग जागरूक हैं और वो कारण जानना चाहते हैं। बस यही मैं कहना चाहता था।

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