पानी पानी दिल्ली

मानसून ने जून के आख़िरी हफ़्ते से ना केवल दिल्ली बल्कि क़रीब क़रीब पूरे देश में दस्तक दी है । हालाँकि अभी पूरी तरह से खूब बारिश नहीं हो रही है (मतलब लगातार दो -तीन दिन तक बारिश होती रहना ) पर फिर भी बादल छाये रहते है । कई बार इन बादलों और हल्की फुलकी बारिश से राहत की बजाय उमस सी हो जाती है ।

परसों दिल्ली में बस एक डेढ़ घंटे खूब धुँआधार बारिश हुई थी और जिसका नतीजा जगह जगह सड़कों पर पानी का भर जाना । हर साल यही हालत होती है । और ये हालात धीरे धीरे बद से बदतर ही होते जा रहे है ।

परसों जब हम शॉपिंग के बाद मॉल से बाहर निकले तो पता चला कि बाहर तो धुँआधार बारिश हो रही है । पर ग़नीमत ये थी कि इतनी बारिश में भी हमें ऊबर कैब मिल गई थी । और जब हम लोग वसंत कुंज से निकले तो हर थोड़ी दूर पर सड़कों पर पानी भरा हुआ था । महिपालपुर पुर की क्रासिंग पर भी काफ़ी पानी भरा हुआ था । और लोगों को ये समझ नहीं आ रहा था कि उस गंदे पानी से भरी सड़क को कैसे पार करें । पर उस बारिश के पानी से भरी सड़क को क्रास करने के अलावा कोई और चारा भी तो नहीं था ।

बारिश का पानी हो तो भी ठीक पर नालियों और सीवर का पानी और दुनिया भर की गंदगी भरे पानी में भला कौन पैर रखना चाहेगा पर जिन्हें बस या मैट्रो पकड़ने के लिये पैदल चलकर सड़क पार करनी है उन्हें तो मजबूरी वश इस गंदगी भरे पानी में पैर रखना ही पड़ता है ।

पूरे रास्ते ये लगता रहा कि बस किसी तरह घर पहुँच जाये क्योंकि खुदा ना खासता अगर कहीं पानी में गाड़ी रूक गई तब तो कोई दूसरी कैब भी ना मिलेगी । और घर पहुँच कर लगा कि अच्छा हुआ जो हम अपनी कार से नहीं गये थे ।


एक ज़माना था जब दिल्ली में बहुत बारिश होती थी और कई बार बारिश पूरे पूरे हफ़्ते चलती थी और तब दिल्ली के मिंटो ब्रिज के नीचे पानी भर जाता था और अखबार में बड़ी ख़बर पानी में रूकी हुई बस की फ़ोटो के साथ होती थी कि दिल्ली में भारी बारिश हुई । वैसे ये बता दें कि मिंटो ब्रिज अंडर पास पर पानी भरना बड़ी बात होती थी । और मिंटो ब्रिज के अलावा दिल्ली में कहीं भी बहुत पानी नहीं जमा होता था । बाद में फ़्लाई ओवर बनने के बाद उनसे नीचे उतरने पर पानी भरा होता था पर तब भी इतनी बुरी हालत नहीं थी ।

पर देखते देखते दिल्ली में हर जगह बरसात होते ही पानी जमा होने लगा । दिल्ली में समय समय पर सड़कों को तो खूब चौड़ा किया गया पर कहीं कहीं पानी निकलने के नाली नहीं बनाई गई और जहाँ बनाई गई वहाँ कूड़े कचरे की वजह से नाली बंद हो गई । जिसका नतीजा ये हुआ कि तकरीबन पूरी दिल्ली ज़रा सी बरसात में पानी पानी हो जाती है । पहले जहाँ मिंटो रोड पर पानी भरना भारी बारिश का संकेत माना जाता था वहीं अब दो घंटे की बारिश पूरी दिल्ली के लिये बहुत भारी पड़ जाती है ।

ना केवल दिल्ली बल्कि अब तो पूरे देश में ही तकरीबन ऐसे ही हालात होते जा रहे है । मुम्बई ,गुजरात,राजस्थान या दक्षिण भारत ही क्यूँ ना हो । ज़रा सी बारिश हुई नहीं कि बस सब जगह पानी भर जाता है । पहले तो कहीं कहीं बाढ़ आती थी पर अब तो पूरे देश में ही बाढ़ जैसे हालात हो जाते है । पहले लोग बाढ़ देखने भी जाते थे पर अफ़सोस अब तो हर गली और सड़क पर बाढ़ जैसा नज़ारा दिखाई देता है ।

और अफ़सोस की बात कि इस जल भराव की दिनों दिन बढ़ती समस्या से जल्दी छुटकारा मिलना भी आसान नहीं है ।






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