Monday, September 8, 2008

कल जया बच्चन ने मुंबई मे अभिषक बच्चन की फ़िल्म द्रोणा के लॉन्च के दौरान सारी बात चीत तो इंग्लिश मे की पर एक वाक्य जो हिन्दी मे बोला उससे बवाल खड़ा हो गया है।हालाँकि अगर जया बच्चन वो एक वाक्य न बोलती तो भी कोई ख़ास फर्क नही पड़ता जिसमे जया ने कहा की क्यूंकि वो यू.पी.से है इसलिये वो हिन्दी मे बोलेगी ।और अगर हिन्दी मे बोल ही दिया था तो भी उसका इतना ज्यादा असर नही पड़ना था जितना पड़ गया है।

उनके इस एक वाक्य ने शिवसेना और एम.एन.एस.को नाराज होने का मौका दे दिया । कितनी अजीब बात है की एक तरफ़ तो हम भारतीय होने का दावा करते है कि हम सब एक है और दूसरी तरफ़ भाषा और राज्य के आधार पर एक -दूसरे से अलग होते है। कहाँ गई अनेकता मे एकता वाली बात ?

ये विडम्बना ही है कि अब अपने ही देश मे हिन्दी बोलने पर पाबंदी लगती नजर आ रही है।

12 Comments:

  1. रंजन said...
    सब राजनिति है ममता जी..
    किसे परवाह है.. भारत देश की
    रंजना [रंजू भाटिया] said...
    बात बढाने का बहाना चाहिए जी ..और कुछ नही
    रचना said...
    politics
    श्रीकांत पाराशर said...
    Mamtaji, sahi kaha aapne.ye bade log yon to hindi ki khate hain aur english ka gungan karte hain parantu baval khada karna ho to inhe hindi yaad aati hai. unke ek sabd ne kitne aam logon ko pareshan kar diya hai. unhonne jo bhi bola uski katai jarurat nahin thi.
    Gyandutt Pandey said...
    जबान है, फिसल ही गयी! पर फिसलने पर भी बात बनाई जा सकती थी। उसके बाद अगर अहम आड़े आये तो गड़बड़ है।
    अनुराग said...
    पता नही राज के बच्चे कौन से स्कूल में पढ़ते होगे ?देखिये कही अब भगवान् भी ना बाँट दे वे......?खबरदार ये हमारे मराठी भगवान् है....
    अभिषेक ओझा said...
    उफ्फ ! हद है.
    कंचन सिंह चौहान said...
    sahi mudda uthaya
    Lavanyam - Antarman said...
    सब राजनिति है ...अहम है।
    उफ्फ ! हद है !
    ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
    राज ठाकरे के बच्चे मराठी भाषा की स्कुल मेँ पढते होँगेँ
    पर वे सँकुचित मानसिकता का उदाहरण दे रहे हैँ - और
    अपने प्राँत की घेराबँदी भी कर रहे हैँ !
    अमरीका मेँ भी इसी तरह, स्पेनीश भाषा का कडा विरोध किया जा रहा है
    एक भाषा, एक ध्वज, एक सार्वभौम राज्य का कर्ता है यही राज ठाकरे से मिलते जुलते
    विचार यहाँ पर भी हैँ - भारत की इतनी सारी जीवित भाषा और क्षेत्रीय खासियत के आगे ऐसा "एकवाद " सँभव नहीँ ! "एकता मेँ अनेकता " का सूत्र ही अपनाना जरुरी है ...
    अब बाल ठाकरे जी भी चुप हैँ !!
    स्नेह,
    - लावण्या
    Mrs. Asha Joglekar said...
    Jaya Bachchan ji ko cahhiye tha ki us akhari hindi wakya ko wo na hi bolatin. Amar singh ke power circle men aa jane se ye himmat unhone dikhaee hai. Are ek sal me chotasa bachcha apni matru bhasha seekh leta hai 4-5 sal men hum doosari aur teesari bhasha bhi achchese bolane lagte hain to marathi kya itani kathin hai. par nahi ye to adiyal pan hai. muze yad hai hum jab kolkata me rehate the to wanha bina bangla bole aap sabji bhi nahi khareed sakte the. Isi wajah se bangla aagaee. par hum ye sochte hi nahi ki ek aur bhasha aa jayegi to fayde men to hum hee rahe na.
    राज भाटिय़ा said...
    अजी राज ठाकरे तो हे गुण्डा, लेकिन जया जब पुरी अग्रेजी बोल रही थी तो उसे हिन्दी मे दो शव्द बोल कर पंगा क्यो लिया... यह सब राजनीति हे ओर जब जया ने यह जान बुझ कर पंगा लिया हे, तो खुद भुगते, क्यो खाम्खा मे यह आग पुरे देश मे फ़ेले,देश कोई इन कई जयदाद नही .भुल जाओ इन बातो को
    Suitur said...
    अनुराग जी , राज का बेटा अमित जूनियर कॉलिज में फर्स्ट ईयर में पढ़ता है। मराठी, हिंदी, फ्रेंच, जर्मन और गुजराती में से एक भाषा पढ़ना जरूरी है।

    अपने भाषणों में राज ठाकरे चाहे जो कहते, करते हैं लेकिन "बेटा" अब मराठी नहीं पढ़ना चाहता। उसने जर्मन भाषा को चुना।

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