इलाहाबाद यात्रा की यादें (४) स्वराज भवन घूमना


post थोडी लम्बी हो गई है इसलिए थोड़ा धैर्य से पढ़े। :)

आनंद भवन की थकान उतर गई हो तो चलिए आज स्वराज भवन घूमने चलते है आनंद भवन की बिल्डिंग के साथ ही जुड़ी हुई है स्वराज भवन की बिल्डिंग जहाँ तक हमे याद है ३०-३५ साल पहले स्वराज भवन मे orphanage था जहाँ सौ-दो सौ बच्चे रहा करते थे पर इस बार देखा तो स्वराज भवन को भी एक संग्रहालय (museum) बना दिया गया है हो सकता है हमने पहले इसपर ध्यान दिया हो खैर स्वराज भवन देखने के लिए जब हम २८ तारीख को गए तो देखा बहुत सारे पुलिस वाले वहां मौजूद थे पूछने पर पता चला कि स्वराज भवन मे प्रवेश बंद है क्यूंकि राहुल गाँधी उस दिन इलाहाबाद आने वाले थे तो हम वापस घर गए ओर अगले दिन यानी २९ तारीख को फ़िर गए तब स्वराज भवन देखा

जैसे ही गेट से अन्दर जाते है तो जो ड़क दिखती है वो गोलाकार है और सड़क के दोनों ओर दोनों तरफ़ अशोक के पेड़ लगे है गेट से ही बीच मे बना एक बहुत बड़ा बगीचा दिखता है और इस बगीचे की हरी ,मखमली घास और उस के बाद पीले रंग की बिल्डिंग दिखाई देती है और यही पीली बिल्डिंग स्वराज भवन है museum के देखने के लिए यहाँ भी टिकट लेना पड़ता है मात्र रूपये का वैसे स्वराज भवन मे लाईट साउंड शो भी होता है और उसका टिकट रूपये का है. जो हमने नही देखा जब हम टिकट लेने गए करीब पौने बारह बजे तो पहले तो उसने टिकट देने से मना किया क्यूंकि उसका कहना था कि ११.३० बजे के बाद टिकट सिर्फ़ शो के लिए ही मिलता है पर फ़िर जाने क्या सोच कर उसने टिकट दे दियाऔर हम चल दिए museum देखने यहाँ भी वही कि museum के अन्दर फोटो नही खींच सकते है आनंद भवन की तरह स्वराज भवन मे कहीं भी कुछ भी नही लिखा है पर हाँ चूँकि हर कमरे मे फोटो लगी है इसलिए उससे ही अंदाज लगाया की जिसकी फोटो कमरे मे लगी है कमरा भी उसी का होगा (शायद लाईट और साउंड मे बताते होंगे )

तो थोड़ा सा इतिहास इस स्वराज भवन के बारे मे भी बता दे.१९२० मे मोती लाल नेहरू जी ने इसे बनवाया था आनंद भवन मे जाने से पहले स्वराज भवन मे ही मोती लाल नेहरू और उनका परिवार रहा करता था और इसी स्वराज भवन मे इंदिरा गाँधी का न्म हुआ थाइसी स्वराज भवन मे आजादी की लड़ाई के दौरन यहाँ के तहखाने मे बने एक कमरे मे स्वतंत्रता संग्रामियों की मीटिंग होती थीइस भवन मे मोती लाल नेहरू,सरोजिनी नायडू,कमला नेहरू,और जवाहर लाल नेहरू के कमरे और उनका ऑफिस वगैरा देखने को मिलता है और इसमे एक तरफ़ museum का ऑफिस वगैरा बना हुआ है

जैसे ही हम टिकट लेकर अन्दर दाखिल हुए की बायीं ओर एक बग्घी जैसी गाड़ी दिखी वहां से - सीढियां चढ़कर ऊपर जाने पर पहले एक छोटा सा कमरा आता है जहाँ जवाहर लाल नेहरू की कुछ पुरानी तस्वीरें लगी है जिनमे वो सरोजिनी नायडू और विजय लक्ष्मी पंडित वगैरा के साथ दिखते है इस कमरे के बाद एक लम्बी सी गैलरी पड़ती है और इस गैलरी को पार कर के जैसे ही बाये वाले कमरे मे जाते है जो उस समय शायद उनका ऑफिस होता था और इस ऑफिस मे एक टेबल थी जिस पर उस समय इस्तेमाल किया जाने वाला टाइप राईटर ,कलम और कुछ किताबें रक्खी हैउससे आगे बढ़ने पर एक और छोटा कमरा आता है जहाँ दरवाजे के एक तरफ़ की दीवार पर मोती लाल नेहरू और जवाहर लाल नेहरू की पश्चिमी वेश-भूषा मे फोटो है तो दीवार के दूसरी तरफ़ भारतीय वेश-भूषा मे फोटो है

इस दरवाजे से जैसे ही अन्दर जाते है की एक बड़ा हा हॉल आता है दरवाजे से प्रवेश करते ही कमरे के एक कोने पर स्टैंड रक्खा दिखता है जिस पर छड़ी ,कोट और कैप टंगे हुए है कमरे के बीच मे फायर प्लेस है जिस के ऊपर नेहरू जी के बचपन की फोटो जिसमे वो साइकिल चला रहे है लगी हुई है फायर प्लेस के सामने एक टेबल और साथ मे - कुर्सियां रक्खी है और दीवारों पर कुछ फोटो लगी है और बाकी पूरा हॉल खाली था माने उसमे कुछ ज्यादा सामान नही था एक study टेबल पर उनके दस्ताने,फोटो और कुछ किताबें रक्खी है

आगे बढ़ने पर देखते है की बीच मे एक बड़ा सा आँगन या बारादरी सा बना है और इसके चारों ओर बाकी सारे कमरे बने हुए है एक कमरे मे महात्मा गाँधी जी की फोटो लगी है और इस कमरे मे उनका चरखा,और बिस्तर देखा जा सकता हैमहात्मा गाँधी जी इसी कमरे मे ठहरते थे इससे आगे जाने पर जो कमरा पड़ता है वहां इंदिरा गाँधी का जन्म हुआ था इस कमरे मे कमला नेहरू की फोटो और bed ,टेबल वगैरा देखा जा सकता है इस कमरे के बगल से एक सीढ़ी ऊपर जाती है और एक नीचे ऊपर का रास्ता तो बंद था और नीचे हम गए नही

उससे आगे जाने पर सरोजिनी नायडू का कमरा आता है जहाँ कमरे के एक कोनेमे बना पूजा घर दिखता हैसरोजिनी नायडू की बड़ी सी फोटो सामने की तरफ़ लगी है और उस कमरे मे उनका bed वगैरा रक्खा है उससे आगे जाने पर एक और कमरा आता है जो मोती लाल जी का ऑफिस रहा होगा मोती लाल नेहरू जी के इस कमरे मे मोती लाल नेहरू जी की अलग-अलग लोगों के साथ फोटो लगी हैजिसमे रवींद्र नाथ टैगोर ,महात्मा गाँधी के साथ फोटो है


यहाँ से आगे बढ़ने पर मोती लाल नेहरू का कमरा आता है और यहीं पर इनकी पहली कार की फोटो भी लगी है जिसमे पूरा परिवार बैठा हुआ है इस कमरे मे मोती लाल नेहरू का bed,रोक्किंग चेयर , law की किताबें,टेबल और चारों ओर दीवार पर फोटो लगी हुई है

जैसे ही हम इस कमरे मे पहुंचे की एक आदमी ने हमे रोक कर पूछा कि आप अपने आप कैसे घू रही है क्या आप पहले वाले ग्रुप मे नही थी हमारे ना कहने पर उसने बताया कि वो गाइड है और आम तौर पर जब टिकट लेते है तो गाईड भी साथ हो लेता है तो हमने उससे जानकारी के लिए पूछा कि जो सीढियां नीचे जा रही थी वहां क्या है तो उसने पूछाकि क्या आप नीचे नही गई और हमारे ना कहने पर वो बोला चलिए आपको दिखा देते है और जब सीढियां उतर कर तहखाने मे पहुंचे तो उसने बताया कि आजादी की लड़ाई के समय यहाँ पर मीटिंग हुआ करती थीऔर बड़े-बड़े निर्णय लिए जाते थे

वापस ऊपर आकर हमने उससे पूछा कि पहले तो यहाँ पर orphanage होता था क्या अब नही है तो उसने बताया कि है पर अब कम बच्चे रहते है ये सामने जो पीली बिल्डिंग दिख रही है वो अब orphanage है और उसके ठीक पीछे बाल भवन है

वहां से बाहर निकल कर हमने कुछ फोटो खींचे और सोचने लगे कि museum कि जो एंट्री है वो एग्जिट होनी चाहिए और जो एग्जिट है यानी मोती लाल नेहरू का कमरा वहां से एंट्री होनी चाहिए और बग्घी नुमा गाड़ी पर ख़त्म होना चाहिए क्यूंकि स्वरा भवन तो मुख्य रूप से मोती लाल नेहरू जी का निवास थाये तो महज हमारा ख़्याल है



स्वराज भवन और आनंद भवन के बीच मे एक छोटा सा गेट है जिससे आप स्वराज भवन से आनंद भवन और आनंद भवन से स्वराज भवन -जा सकते हैऔर चाहे तो एक ही दिन मे दोनों देख भी कते है। :)

Comments

बहुत शुक्रि‍या। बचपन में यहॉं गया था। धुंधली यादों को ताजा करने के लि‍ए शुक्रि‍या।
अच्छी सैर रही... स्वराज भवन की. इतना याद कैसे रहा आपको? लिखती जा रही थी क्या?
mehnat se likhi gayi post......behtareen....
Gyandutt Pandey said…
बड़ा ही सूक्षम परिचय। जैसे चित्रों के साथ पूरा नैरेटिव बोला जा रहा हो। बहुत अच्छा।
बहुत अच्छी लगी यह कड़ी भी .
धन्यवाद इस यात्रा के लिये, अच्छी जान कारी दी हे आप ने, धन्यवाद
Udan Tashtari said…
आभार इस यात्रा वृतांत के लिए-रोचक विवरण एवं सुन्दर तस्वीरें.

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-समीर लाल
-उड़न तश्तरी
ममताजी, यात्रा वृत्तांत को इतना विस्तार से लिखने का तरीका भी ज़रूर बताइएगा....मुझे तो इतना याद ही नही रह पाता... शब्दों चित्र तो सजीव है हीं... चित्रों की हरयाली ने भी मन मोह लिया.
सुना है स्वराज भवन मेँ मेरे पापा जी की तस्वीर कोँग्रेस कमिटी के सभ्योँ के साथ है परँतु मैँने उसे देखा नहीँ आपका विवरण स विस्तार ,
बढिया लगा !
- लावण्या
mamta said…
आप सभी का शुक्रिया।
अभिषेक जी और मीनाक्षी जी बस जब लिखने बैठते है तो सब कुछ याद आ जात्ता है । :)
लावण्या जी काश हम स्वराज भवन के अन्दर की फोटो खींच सकते।
Bahut sunder wiwaran aur khoobsurat tasweeren laga iki hum hi sair kar aaye swaraj bhawan kee.
Bahut sunder wiwaran aur khoobsurat tasweeren laga iki hum hi sair kar aaye swaraj bhawan kee.

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