नब्बे के दशक मे कुछ मल्टी नेशनल बैंकों जैसे सिटी बैंक , एस.सी.बी.(stan chart bank) तथा कुछ अन्य बैंकों ने भारत मे जब ए.टी.एम की शुरुआत की थी तब लगता था कि क्या अपने हिन्दुस्तान मे ये क्रेडिट कार्ड और ए.टी.एम सेवा चल पाएगी क्यूंकि ना तो क्रेडिट कार्ड के बारे मे लोग जानते थे और ना ही ए.टी.एम जैसी मशीन के बारे मे भी लोगों ने सुना था।क्रेडिट कार्ड और एम.टी.एम का सबसे बड़ा फायदा था कि बिना बैंक जाए किसी भी समय वक्त-जरुरत पड़ने पर पैसा निकालाजा सकता था।उन दिनों तो ये बैंक एक तरह से लोगों को पकड़-पकड़ कर अपना ग्राहक बना रहे थे।वैसे आज भी ये सिलसिला जारी है। :)
उस समय तक तो हर कोई बैंक से ही पैसा निकालने और जमा करने का आदी था।लोग बैंक मे सुबह दस बजे से ही पैसा निकालने के लिए लाइन मे लगते और कभी १०-१५ मिनट मे तो कभी आधा घंटा लगता पैसा निकालने और जमा करने मे। उस पर से अगर बैंक वाले चाय पीने चले जाते तो कभी पान खाने तो थोड़ा और इंतजार करना पड़ता था।
इंग्लिश फिल्मों मे तो बहुत बार देखा था मशीन से पैसा निकालते पर तब हमे लगता था कि भला मशीन कैसे पैसा देगी पर हमारा ये भ्रम कुछ सालों बाद टूटा जब इन बैंकों ने ए.टी.एम.दिल्ली मे लगाए। जब पहली बार हम लोगों ने एम.टी.एम.से पैसा निकाला तो बड़ा मजा आया था खूब खरे-खरे कड़क नोट मिले थे जबकि अपने बैंकों से लाइन मे लगकर पैसा निकालने पर कुछ अच्छे तो कुछ ख़राब कुछ गले नोट भी मिलते थे। क्यूंकि पहले सभी बैंक दोपहर दो बजे के बाद बंद(जनता के लिए) हो जाते थे। वैसे अब तो बैंक चार बजे तक खुले रहते है ।
ए.टी.एम ने भी भारत मे एक तरह की क्रांति की। पहले विदेशी बैंकों ने और फ़िर भारतीय बैंकों ने भी धीरे-धीरे एम.टी.एम.की शुरुआत की और अब तो हर छोटे-बड़े शहर मे हर बैंक का एम.टी.एम मिल जाता है।अब कहीं आने-जाने मे पैसा साथ ले जाने की जरुरत नही होती है।भारतीय बैंक डेबिट कार्ड तो देते है पर शायद क्रेडिट कार्ड नही देते है।
एम.टी.एम तो हर जगह होते है पर कई बार जिस बैंक मे खाता होता है उसका एम.टी.एम नही मिलने पर लोग दूसरे बैंक के एम.टी.एम.से पैसा निकालते थे और इस ट्रांसिक्शन का बैंक चार्ज करता है ।वैसे हर बैंक का चार्ज रेट अलग-अलग होता है । पहले तो ७० रूपये एक ट्रांसिक्शन का लगता था पर अब शायद घट कर कुछ कम हो गया है।कहीं३० तो हैं ५७ रूपये लगते है। पर अब २००९ से कार्ड रखने वाले को किसी भी एम.टी.एम से पैसा निकालने और जमा करने पर कोई भी चार्ज नही देना पड़ेगा क्यों इसके लिए ये रिपोर्ट पढे।
क्रेडिट कार्ड का फायदा है तो नुकसान भी है।फायदा ये है की आपके पास पैसा निकालने की लिमिट काफ़ी होती है पर नुकसान ये की उसपर ये मल्टी नेशनल बैंक इन्टरेस्ट तो लेते है साथ ही सर्विस चार्ज और ना जाने क्या-क्या चार्ज भी लगाते है। और अगर लेट पेमेंट है तो उसका भी चार्ज करते है। खुदा ना खास्ता अगर चेक वापिस हो जाए तो उसका जुर्माना भी देना पड़ता है।खैर अगर आपके पास कार्ड है तो २००९ के बाद आप किसी भी बैंक से बेधड़क पैसा निकाल सकते है बिना एक्स्ट्रा चार्ज की चिंता किए हुए ।
और भविष्य मे सभी भारतीय और मल्टी नेशनल बैंक ए.टी.एम.की सुविधा डेबिट कार्ड धारकों को भी मुफ्त मे देने लगेंगे ।
नोट-- क्रेडिट और डेबिट मे हमने भी १०,००० का आंकडा पार कर लिया।(अरे हिट्स मे) :)
Tuesday, March 11, 2008
अब कार्ड वालों के लिए ए .टी.एम की सेवा मुफ्त मे होने की सम्भावना
Posted by mamta at 11:59 AM
Labels: citi bank, credit card, stan.chart.bank, क्रेडिट कार्ड, मल्टी नेशनल बैंक, सामाजिक, सिटी बैंक
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4 comments:
जानकारी के लिए धन्यवाद. जिस रिपोर्ट का हवाला देकर आप बता रहीं हैं कि क्रेडिट कार्ड धारकों को कोई चार्ज नहीं देना पड़ेगा, अगर उसे पूरा पढ़ें तो मंतव्य यह स्पष्ट होता है कि चार्ज तय करने के लिए बैंक स्वतंत्र होंगे. इसका यह मतलब नहीं है कि चार्ज ही नहीं लगेगा, बस यह होगा कि बैंक मनमानी कर सकेंगे.
शुक्रिया गलती की ओर ध्यान दिलाने के लिए। अब सही कर दिया है।
क्रेडिट नही जी डेबिट कार्ड पर होगा चाहे जिस ए टी एम से पैसे निकाले २० रूपये से ज्यादा नही ले सकते
ममता जी हमारे यहा तो आप ने जिस बेकं से कार्ड लिया उसी बेकं की किसी भी शाखा से पेसे निकलवाने पर कोई चार्ज नही देना पड्ता,ओर अब तो होम बेकिंक ओर भी आसन हे,जिस पर कुछ भी चार्ज नही देना पडता देश मे,ओर बिदेश मे थोडा बहुत देना पड्ता हे,आप अपने सभी बिल, भुगतान घर बेठे करो, मुझे करीब १० साल हो गये बेंक की शकल देखे, १०० युरो भी इस लिये निकालता हु की बच्चो को खर्च के लिये नगद चाहिये, वर्ना सभी काम कार्ड ओर होम बेकिंक से ही चलता हे
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