Sunday, March 23, 2008


कहिये आप लोगों की होली कैसी रही।आशा है की आप लोगों ने भी खूब होली खेली होगी और मस्ती की होगी। भाई हमारी होली तो बढ़िया रही। और इस बार गोवा की होली का भी भरपूर मजा हमने उठाया। इस बार गोवा मे होली के अवसर पर गुलालोत्सव मनाया गया।२१ तारिख को पेपर मे ख़बर छपी थी की पंजिम के आजाद मैदान मे गुलालोत्सव मनाया जायेगा ९.३० से १२.३० । इसके लिए एक यात्रा पंजिम के महा लक्ष्मी मन्दिर से परम्परा गत तरीके से ९.३० बजे ढोल और ताशे बजाते और नाचते हुए आजाद मैदान जायेगी जहाँ पर गुलाल से होली खेली जायेगी।और १२.३० बजे कारों की रैली पूरे पंजिम शहर मे निकाली जायेगी। दिल्ली मे इस तरह का सामुहिक आयोजन आम तौर पर कालोनी मे तो होता है पर शहर मे ऐसा आयोजन पहली बार सुना था। इसलिए सोचा की इस बार गोवा की होली का पूरा मजा लिया जाए। और हाँ इस आयोजन की ख़ास बात ये थी कि कोई भी किसी को जबरदस्ती रंग नही लगायेगा ।अगर कोई रंग लगवाना चाहता है तभी रंग लगाया जायेगा।और वहां पर औरकेस्त्रा पार्टी भी थी लोगों का मनोरंजन करने के लिए।
इस फोटो मे ये जो दो बच्चियां दिख रही है ये पूरी मस्ती मे ड्रम बजा रही थी।


वैसे गोवा मे पिछले साल भी हमने देखा था की यहां पर लोग ना तो गाड़ियों पर रंग या गुब्बारे मारते है और ना ही राह चलते आपको रंग लगाते है या कुछ उल-जुलूल हरकत करते है।पिछले साल पंजिम से कैलेंगुट की १३-१४ कि.मी.की ड्राइव मे आने-जाने मे कोई भी रंग डालने वाला नही दिखा था।

खैर इस साल सुबह साढ़े नौ बजे तो हम नही निकल पाये अरे इतना सारा खाना जो बनाना होता है। फ़िर ११ बजे सबसे पहले कुछ दोस्त हम लोगों के घर आए और फ़िर हम सभी अपने एक दोस्त के घर होली खेलने गए बिल्कुल यू.पी.बिहार स्टाइल मे होली खेली यानी सिर्फ़ गुलाल नही रंगों से और पानी से होली खेली। और फ़िर रंगे-पुते कार मे चल पड़े आजाद मैदान की ओर गुलालोत्सव देखने। ।हालंकि वहां बहुत ज्यादा भीड़-भाड़ नही थी पर फ़िर भी लोग नाचते-गाते दिखे । औरकेस्त्रा पार्टी के संगीत पर जनता पूरी मस्ती मे नाच रही थी।वहां जाने पर पता चला की मुख्य मंत्री भी वहां आने वाले है पर उन्हें देर हो रही थी और वहां औरकेस्त्रा पार्टी ने जो गाना गया वो था पिया तू अब तो जा ....। :) वहां थोडी देर रुक कर हम लोग dona paula गए। (ये वहीं जगह है जहाँ एक-दूजे के लिए फ़िल्म की शूटिंग हुई थी ) वैसे तो वहां पर आम दिनों की तरह टूरिस्ट की ही भीड़ थी बस कुछ लोग ही रंग मे रंगे हुए घूम रहे थे।और उन रंगे हुए लोगों मे हम लोग भी थे। :)


dona paula से लौटते-लौटते बारिश आ गई थी इसलिए बाकी और जगह घूमने और चक्कर लगाने का कार्यक्रम छोड़कर हम लोग घर आ गए और वैसे भी तब तक हम लोग थक भी चुके थे।और घर आकर नहाने और रंग छुड़ाने का बड़ा काम भी तो करना था।

12 Comments:

  1. पंकज अवधिया Pankaj Oudhia said...
    आम लोगो के इस देश मे सभी चैनल नेताओ और अभिनेताओ की होली दिखाते रहे। किसी ने भी देश के कोने-कोने मे मन रही होली की झलक नही दिखायी। मुझे लगता है आप ने जिस तरह रोचक वर्णन किया है ऐसा ही सब अपने शहर की होली का करे तो सब ब्लाग की ओर रुख करेंगे। चैनल तो कोई देखने से रहा।
    अनूप शुक्ल said...
    रोचक विवरण!
    Gyandutt Pandey said...
    अच्छा लगा पढ़ कर। बताने के लिये ब्लॉग विधा का सही उपयोग।
    राज भाटिय़ा said...
    ममता जी आप के लेख पढ कर अब गोवा घुमने का बहुत मन करने लगा हे,ओर हमे समय भी अगस्त मे ही मिलता हे तो दिल्ली मे सभी मना करते हे अरे अगस्त मे मत जाओ, वहा यह होता हे ,वह होता हे, लेकिन अब की बार जब भी भारत मे आयए तो आप का गोवा जरुर घुमे गे, पुरी दुनिया घुम लिये अभी अपना देश आधा भी नही देखा, ओर होली के बारे मे ओर चित्र सब बहुत सुन्दर लगा, धन्यवाद जानकारी देने के लिये.
    Sanjeet Tripathi said...
    मस्त!!
    yunus said...
    ये अच्‍छा है इसी बहाने गोवा की होली देख ली ।
    कंचन सिंह चौहान said...
    waah
    मीनाक्षी said...
    कई दिनों से हमारे एरिया का ब्लॉगर बन्द था.आज ही खुला है. ईमेल न होने पर देर से ही सही, होली मुबारक हो.
    ज्ञान जी की बात से पूरी तरह से सहमत.. आपकी वर्णनात्मक शैली बहुत प्रभावशाली होती है.
    अजित वडनेरकर said...
    ममता जी को होली की विलंबित शुभकामनाएं। हमारे यहां रंगपंचमी तक शुभकामनाओं का आदानप्रदान चलता है। रोचक विवरण था।
    गोवा की होली का अंदाज़ जानना अच्छा लगा।
    आशीष said...
    बहुत खूब, होली की बधाई आपको ममता जी
    satish said...
    mamta ji ko satish rai ki taraf se
    holi ki shubhakamnaye.vilamb ke liye mafi.
    aapka lekh pad ke bhut badhiya laga aur aap aise hi likhti rahe.
    Priyankar said...
    तीन-चार साल हमने भी दोनापौला में खूब होली खेली है . अच्छा विवरण . होली मुबारक !

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