महिला दिवस के अवसर पर ये विज्ञापन कुछ कहता है. ...

जहाँ हर रोज हर अखबार मे भ्रूण हत्या और पैदा होते ही लड़की को मारने की ख़बर छपती है वहीं यहां के अखबार मे बेटी पैदा होने की ख़बर छपती है।जो हमारे ख़्याल से बहुत ही अच्छी बात है।काश दूसरे लोग भी इनसे कुछ सबक सीखें।एक और बहुत अच्छा चलन है डॉक्टर को धन्यवाद देने का , जैसा की आप इन सभी विज्ञापनों मे देख सकते है।
आज महिला दिवस है और इस अवसर पर हम गोवा के अखबार मे छपे कुछ विज्ञापनों को लगा रहे है। (माता-पिता और अन्य रिश्तेदारों के नाम हमने हटा दिए है। )
आप बस देखिये और अपनी राय दीजिये।
जब आप इन मे से किसी पर भी क्लिक करेंगे तो आप इन्हे आराम से देख और पढ़ सकेंगे।
Comments
मेरे लिये यह जानकारी नयी नहीं है, इस लिये आश्चर्य नहीं हुआ । राज भाटिया जी को मैं इंगित करना चाहूँगा कि यह यूरोप का प्रभाव नहीं बल्कि इसका सीधा संबन्ध साक्षरता एवं जागरूकता से है ।
धड़ियाली आँसू की तरह कन्याओं को लेकर नित्य नयी घोषणायें एक भद्दा मज़ाक है । कन्याधन, कन्याराशि, कन्या अनुदान वगैरह एक सतही लीपापोती है, गोया कन्या सरकारी खैरात पर आश्रित रहने को मज़बूर हो !
कल मन कचोट कर रह गया, बहुत सारे पहलू और सच बटोर कर रखे थे, इस दिन पोस्ट करने को । किंतु एक हालिया दुर्घटना के बाद फिर से दूसरा हैकरप्रूफ़ ब्लाग बनाने पर स्वाध्याय एवं जानकारियों की माँग-जाँच में व्यस्त हूँ ।
आपकी यह सामयिक पोस्ट बहुतेरे लिखे पढ़े ज़ाहिलों की विकृत सोच पर एक तमाचा है ।
आख़िर क्यों दिखता है यह..
कहीं ख़ुशी कहीं ग़म !