Wednesday, March 19, 2008



कल पंकज जी की पोस्ट पढी थी जिसमे उन्होंने अशोक के पत्ते के बारे लिखा था।और उनकी उसी पोस्ट ने हमारे मन मे ये जिज्ञासा जगाई और आज इसलिए हम ये सवाल पूछ रहे है।असल मे हमारे इस गोवा वाले घर मे भी एक उल्लू महाराज रहते है , आम तौर पर तो ये रात मे ही बाहर निकलते है पर एक बार ये महाराज शाम को ही बाहर निकल आए थे इन्हे शायद कुछ समय का confusion हो गया था। :) पर जब तक हम कैमरा लाते ये महाशय वापस अपने घर मे चले गए थे। और फ़िर रात होने पर ही निकले थे। इस फोटो मे आप इन्हे देख सकते है हालांकि फोटो ज्यादा अच्छी नही आई है क्यूंकि एक तो रात हो गई थी और दूसरे एक -दो फोटो खींचवाने के बाद ये उड़ जाते है अब तो कभी-कभार हम इन उल्लू महाराज से (बिल्कुल सलीम अली की तरह)बात भी करते है :)



वैसे इस सवाल पर दो तरह की धारणाएं हम सुनते रहे है

) आज नही हमेशा लोगों को कहते सुना है की जिस घर मे उल्लू बसते है वहां लक्ष्मी का वास होता है आखिर लक्ष्मी जी का वाहन जो है।( तो क्या हमे छप्पर फटने का इंतजार करना चाहिए । ) :)
) पर साथ ही ये भी सुनते रहे है कि घर मे उल्लू का रहना अच्छा नही होता है।

तो कौन सी धारणा को मानना चाहिए।
या दोनों ही धारणाओं को नही मानना चाहिए
अरे तब तो हमारा बड़ा नुकसान हो जायेगा :)

14 Comments:

  1. दिनेशराय द्विवेदी said...
    पीपल पर भूत रहते हैं। पीपल भगवान हैं। गीता में कहा है कृष्ण(?) ने वृक्षों में पीपल मैं हूँ। कौन सी बात सही है?
    पंकज अवधिया Pankaj Oudhia said...
    उल्लू से लक्षमी आयेगी कि नही यह तो मुझे पता नही पर आपका घर और आस-पास कीट-पतंगो से बचा रहेगा। उल्लू किसानो के मित्र होते है क्योकि वे कीट पतंगो को खाकर फसल की रक्षा करते है। वे चूहे भी खाते है। आज का किसान अपनी दोस्ती नही निभा रहा है। वह कीटनाशक डाल रहा है जिससे उल्लू जैसे बहुत से संवेदी जीव तेजी से कम हो रहे है। जहाँ नुकसान पहुँचाने वाले कीट और चूहे न हो वहाँ तो अच्छा स्वास्थ्य रहता है। और जहाँ अच्छा स्वास्थय रहता है लक्ष्मी अपने आप आ जाती है।


    दिनेश जी पीपल मे भूत हो या भगवान दोनो के बारे मे बतायी गयी बाते आज पीपल की रक्षा कर रही है। भूत और भगवान का भय आगे भी इन्हे बचाये रखेगा। काश ऐसी बाते दूसरे पेडो के साथ भी जुडी होती तो हमारे जंगल बच जाते।
    आभा said...
    बडीं छंछट है मै भी उलझ गई.....
    annapurna said...
    आप उल्लू से भी बातें करती है ? कभी उसे हमारे बारे में भी बताइए।
    इष्ट देव सांकृत्यायन said...
    अगर ऐसा होता टू अब तक हिंद्स्तान से गरीबी मिट गई होती.
    क्योंकि यहाँ हर शाख पे .......
    mahendra mishra said...
    अंअंधविश्वास से बचे . कंक्रीट युग मे लक्ष्मी लेन्टर फाड़ कर नही आवेगी . लक्ष्मी जी दरवाजे के रास्ते आती है . होली पर्व की ढेरों शुभकामना के साथ .
    Gyandutt Pandey said...
    मैने तो कई इंसानी उल्लू देखे हैं; जिनके पास बहुत पैसा है। पैतृक भी और खुद का कमाया भी!
    रंजू said...
    यदि आपके घर लक्ष्मी छप्पर फाड़ के बरसे तो उन उल्लू महाराज को हमारे ब्लॉग का रास्ता दिखा देना :) क्यूंकि आज कल बहुत पढ़ रहे हैं कि जल्दी ही हिन्दी ब्लागिंग से बहुत धन बरसाने वाला है . ..अब लक्ष्मी जी के वाहन को रास्ता तो पता होना चाहिए न :)होली की बहुत बहुत बधाई :)
    रवीन्द्र प्रभात said...
    सूना तो मैंने भी है, मगर यह तथ्यपरक नही है , अगर ऐसा होता तो गरीबी दिखाई ही नही देती , वैसे अच्छी लगी आपकी पोस्ट ...!
    सागर नाहर said...
    इष्टदेव जी की टिप्पणी बड़ी मजेदार है। :)

    जितना उल्लू मानव के लिये उपयोगी है उतना शायद ही कोई अन्य पक्षी, दुर्भाग्य से तांत्रिकों ने इस पक्षी की प्रजाति को नष्ट करने का बीड़ा उठाया हुआ है।
    दीपावली के आस पास ( खासकर काली चौदस को) उल्लू की बली चढ़ाई जाती है और एक एक उल्लू 1.5 लाख ( अलग अलग रंग और प्रजाति के हिसाब से) तक बिकता है।
    दस्तक
    तकनीकी दस्तक
    गीतों की महफिल
    mamta said...
    आप सभी का शुक्रिया ।
    अरे महेंद्र जी यहां गोवा मे हमारे घर की छत कंकरीट की नही बल्कि वाकई मे छप्पर ही है। :)
    बिल्कुल अनुराधा जी अगली बार हम आपका जिक्र जरुर करेंगे।
    रंजू जी बिल्कुल-बिल्कुल ।
    पंकज जी और सागर जी उल्ले के बारे मे तो हमे ये बातें पता ही नही थी।
    राज भाटिय़ा said...
    ममता जी हमारे भारत मे तो बहुत उल्लु हे , फ़िर इतनी गरीबी कयो हे कही सार्रे उल्लु टाटा बिरला ने तो नही पकड लिये ?
    दीपक भारतदीप said...
    उल्लू बुद्धिमान पक्षी है और केवल बुद्धिमान लोगों के घर ही निवास करता है. यह मेरी खोज है क्योंकि वह कई बार रात को मेरे बाहर खडे पेड़ पर बैठा रहता है. यह पेड़ हम दो पडोसियों के बीच स्थित है इसलिए यह कहना मुश्किल है कि हम दोनों में कोई एक बुद्धिमान है या दोनों ही.
    दीपक भारतदीप
    Arun said...

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