Friday, December 28, 2007

इस सवाल पूछने का एक कारण है वो ये कि ये सांप ( नाग का बच्चा जैसा कि हमारी झाडू लगाने वाली कह रही है )हमारे घर मे खाने के कमरे (dinning room )की बालकनी मे निकला था। क्यूंकि येसांप का बच्चा दरवाजे के पीछे छिपा हुआ था इसलिए झाडू वाली ने इसे पहले नही देखा और उसने जैसे ही दरवाजे के पीछे झाडू लगाई कि ये सांप का बच्चा बाहर आ गया ।झाडू वाली इसे देख कर डर कर जोर से चिल्लाई और जब हम वहां ये देखने को पहुंचे की झाडू वाली आख़िर चिल्लाई क्यूं तो हमारे भी होश उड़ गए इन छोटे मियां को देख कर। बिल्कुल काला ये बच्चा बार-बार अपना फन उठाता था और जीभ निकाल रहा था जिसे देखकर और भी डर लग रहा था

अब सवाल ये था कि इसे भगाया कैसे जाये क्यूंकि ये बच्चा अपने आप जा नही पा रहा था।बार-बार ये दीवार पर चढ़ता तो था पर दीवार ऊँची होने की वजह से बाहर नही जा पा रहा था।और नाली से बाहर शायद ये जाना नही चाहता था। इसलिए कभी ऊपर कभी नीचे ये इधर-उधर घूमता रहा और इसी बीच हमने इसकी फोटो खींच ली। :)

खैर हम लोगों की हिम्मत नही थी इसे भगाने या मारने की।चूँकि घर मे कुछ काम चल रहा था इसलिए कुछ मजदूर थे तो उन्हें ही बुलाया इसे बाहर निकलने के लिए।


हमारी झाडू वाली को ये डर था कि अगर इसे छोड़ दिया गया तो या तो ये या फिर( इसके माँ-बाप )कोई बड़ा सांप आकर उसे काट लेगा क्यूंकि उसकी झाडू इस बच्चे को लग गयी थी और सांप कभी भी उसे घायल करने वाले को नही छोड़ता है।क्यूंकि सांप की आँख मे उसकी फोटो गयी होगी।ऐसा उसका कहना था।

वैसे हम लोग बचपन से (गाँव मे ) भी ऐसा ही कुछ सुनते आ रहे है कि अगर सांप को मारो तो उसकी आँख को जरुर फोड़ देना चाहिऐ नही तो मारने वाले की तस्वीर सांप की आँख मे रह जाती है और फिर सांप बदला लेने जरुर आता है। अब इसमे कितनी सच्चाई है पता नही। वैसे फिल्मों मे तो ऐसा खूब दिखाते है।

आपका क्या कहना है ?
क्या वाकई मे ऐसा होता है ?




16 Comments:

  1. महर्षि said...
    क्‍या ममता जी आप भी क्‍हां सांप और उसकी आंख में फंस गई,चिंता रहित हो जाएं
    PD said...
    मैं तो ये सब नहीं मानता हूं..
    अजित वडनेरकर said...
    हिन्दी के चर्चित साहित्यकार उदयप्रकाशजी की कहानी तिरिछ याद आ गई । आपने न पढ़ी हो तो पढ़ जाइये।
    Shuaib said...
    MAIN NE BHI BACHPAN ME SUNA THA MAGAR AISI BATON KA YAKEEN NAHI KARTA.
    SANP MER GAYA TO PHIR KAISE VO BADLA LENE AYEGA.

    BADE LOG BACHON KO DARANE KE LIYE SHAYED AISA BATATE HONGE.

    SHUAIB
    http://shuaib.in/chittha
    annapurna said...
    मैं कृषि विभाग में काम करती हूं। हमारा कार्यालय कृषि विश्वविद्यालय परिसर में हैं। बहुत बड़ा कैम्पस है। चारों ओर फैली हरियाली, खेत-खलिहान, ऊंचे पेड़ इस माहौल में कभी-कभार सांप भी निकलते है।

    यहां वैज्ञानिक शोध होता है फिर भी सांप निकलने पर कुछ खास ऐसे मज़दूरों को बुलाया जाता है जो सांप पकड़ना जानते है।

    मैनें खुद देखे है बड़े सांप भी जिन्हें खास तरीके से पकड़ कर कुछ मंत्र पढते है फिर मारते है और मारने के बाद जला देते है।

    मैनें बहुत बार पूछा कि जब मार दिया तो जलाने की क्या ज़रूरत है तब ये मज़दूर बताते है कि सांप का जलना ज़रूरी है नहीं तो उसकी आंखों में मारने वाले की तस्वीर आ जाती है और कोई और सांप ये तस्वीर देख कर बदला लेता है।

    बड़ी बात तो ये है कि सभी पढे-लिखे वैज्ञानिक भी आज भी ऐसा ही होने देते है, जलाने से मना नहीं करते और जलाने के सवाल पर सीधा जवाब भी नहीं देते।

    मैं तो आज तक यह बात नहीं समझ पाई। लगता सांप जीव ही इतना डरावना होता है कि हम इन बातों को मानते नहीं हैं पर सांप सामने आ जाए तो हमारे मन का डर इन बातों को मानने पर मजबूर करता है।
    उन्मुक्त said...
    यदि उसके पास डंडा रखते तो वह उससे लिपट जाता और तब बाहर छोड़ देते। मैंने कई बार ऐसा किया।
    संसार में सबसे भयानक और खतरनाक जीव मनुष्य है। उसी से बच कर रहिये - जानवर तो निरीह हैं।
    सांप की आंख में फोटो आ जाती है - बेकार की बाते हैं, मत विश्वास कीजिये।
    mamta said...
    मानते नही है इसीलिए तो लिखा है।पर फिर भी डर तो लगता ही है।
    सागर नाहर said...
    मैं भी उनमुक्त जी से सहमत हूँ, साँप बहुत ही निरीह प्राणी है, जब तक उसे छेड़ा ना जाये बेचारा किसी को काटता नहीं है।
    आश्चर्य की बाट तो यह है कि जितना मानव उस्ससे डरता है उससे कई गुना साँप,मानव से डरता है।
    सच है मानव से खतरनाक प्राणी दुनियाँ में कोई नहीं है।
    मैं तो बड़े दिनों के बाद आया आपके चिट्ठे पर, थीम और फोटो बहुत सुन्दर लगाई है. हैडर भी बहुत बढ़िया सैट हुआ है। बधाई।
    ज्ञानदत्त पाण्डेय । GD Pandey said...
    कई सर्प नुमा मनुष्य अवश्य देखे हैं जो बहुत सालों तक अक्स याद रखते हैं। बदला भी लेते हैं। पर यह रेंगने वाला जीव तो निरीह है!
    दीपक भारतदीप said...
    साँपों में नब्बे प्रतिशत जहरीले नहीं होते
    दीपक भारतदीप
    Divine India said...
    बिल्कुल मैं मानता हूँ; यहाँ मानना कहना उचित न होगा क्योंकि जिसप्रकार अन्य जानवारों की कोई न कोई अपनी अलग विशेषता होती है और यह सब तो याददाश्त से जुड़ा है… हाँ साँपों की भी यह विशेषता तो होती है… ।
    Dard Hindustani (पंकज अवधिया) said...
    यह कहाँ की बात है। अंडमान की या गोवा की। यदि गोवा तो मेरे एक सर्प विशेषज्ञ मित्र है वहाँ पर । आप कहे तो उनका पता दूँ। वे न केवल घर आकर साँप पकडते है बल्कि इस बारे मे तकनीकी जानकारी भी देते है।


    यदि तस्वीर वाली बात सही होती तो आज अमेरिकी सेना मे इसका प्रयोग हो रहा होता। उनके रक्षा विशेषज्ञ जीवो के प्राकृतिक ग़ुणॉ के अध्ययन मे माहिर है।
    Mired Mirage said...
    क्या ममता जी आप इस छोटे से बेबी साँप से डर गईं । संयोग से कल ही मैं अपने एक मित्र को अपने साँपों व बिच्छुओं के अनुभवों पर बात कर रही थी । और वे कह रहे थे कि इस विषय पर तो कई पोस्ट लिख सकती हो ।
    घुघूती बासूती
    मीनाक्षी said...
    ममता जी, इस कविता को पढ़कर साँप से आपका डर भाग जाएगा लेकिन एक नए जीव से डर लगने लगेगा..
    http://meenakshi-meenu.blogspot.com/2007/10/blog-post_26.html
    mamta said...
    आप सभी का धन्यवाद।

    पंकज जी ये छोटे मियां गोवा वाले घर मे निकले थे। वैसे अब सांप पकड़ने वाले स्क्वाड का फोन नंबर भी है।

    घुघूती जी यहां गोवा के घर मे सांप-बिच्छू ,उल्लू,चमगादड़,नेवला सभी कुछ है।

    मीनाक्षी जी आपकी कविता पढ़ी । और कुछ हद तक डर ख़त्म भी हुआ है।
    इष्ट देव सांकृत्यायन said...
    ममता जी
    कृपा करके अभी यह जानकारी आप आम न करें. क्योंकि भारत में अभी भी पेटेंट की पेटेंट व्यवस्था हुई नहीं है और अगर अमरीका वालों को मालूम हो गया तो वे तुरंत ही पेटेंट करा लेंगे. सांप की आँख की फोटो कैमरे के लेंस के लिए. उनका इस बात से भी कोई मतलब नहीं है कि ऐसा सचमुच हो सकता है या नहीं उनको तो बस पेटेंट चाहिए .

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