Saturday, December 8, 2007

रिची -रिच


अब ये कुछ अजीब सा शीर्षक तो है पर बात ये है की अभी चंद रोज पहले हम बंगलोर गए थेअब चूँकि बंगलोर हम करीब तीस साल बाद गए थे तो सोचा कि क्यों बंगलोर घूम ही लिया जायेऔर वहां घुमते हुए अचानक ही हम लोग एक सात सितारा होटल जो की अभी बन रहा है उसके सामने से गुजरे तो हम लोगों की गाड़ी के ड्राईवर ने बड़ी ही गर्मजोशी से बताया कि साब ये होटल विजय मालया का हैये होटल भी शायद बीस मंजिल का हैऔर इसमे ऊपर हेलीपैड भी बना हुआ हैहमारे ड्राईवर ने ये बताया की चूँकि अब बंगलोर का नया एअरपोर्ट करीब ३०-३५ कि.मी .की दूरी पर बन रहा है और बंगलोर मे ट्रैफिक बहुत बढ़ रहा है तो होटल से एअरपोर्ट जाने के लिए हेलिकॉप्टर की सुविधा रहेगीजिससे कम समय मे एअरपोर्ट पहुँचा जा सकेजब तक उसने ये बताया और जब तक हम लोग होटल को देखते तब तक गाड़ी आगे बढ़ चुकी थीपर फिर भी हमने कोशिश की उसकी फोटो लेने की

हेलीपैड से एक और बात याद गयी कि अभी हाल ही मे मुकेश अम्बानी ने अपनी पत्नी नीता अम्बानी को एक एयरबस जन्मदिन के तोहफे मे दी हैजिसमे हर सुख-सुविधा हैयही नही खबर तो ये भी है कि मुकेश अम्बानी अपनी पत्नी को अगले साल जन्मदिन के तोहफे के रुप मे एक ऐसा घर देने वाले है जिसमे करीब २६-२७ मंजिलें होंगी और एक हेलीपैड भी होगाअब हेलीपैड बनेगा तो हेलिकॉप्टर तो होगा हीवैसे २७ मंजिल के इस घर मे छे मंजिलों पर तो कार पार्किंग बनायी जा रही हैचलो भाई मान लेते है कि इतनी कारें तो हो सकती है पर फिर भी बीस मंजिल रहने के लिए कुछ कम नही है। :)

अब जब २७ मंजिल का घर है तो उसी हिसाब से नौकर- चाकर भी होंगेअरे चौकिये मत कुछ ज्यादा नही बस छे सौ और सबसे मजेदार बात इस पूरे घर मे सिर्फ छे लोग रहेंगेमतलब हर एक के लिए सौ लोगवाह भाई वाह

क्या अच्छा होता कि अगर अम्बानी भारत के कुछ गांवों को एडोप्ट कर लेते तो शायद भारत के गाँव की कुछ तस्वीर ही बदल जाती

10 Comments:

  1. parul k said...
    kabhii kabhii vichaar uthtaa hai mun me ki insaan naamak"cheez" me itna bhed kaisey kartaa hai bhagvaan,khair
    aapka lekh sateek aur achacha lagaa mamtaa ji...aabhaar
    Shiv Kumar Mishra said...
    दिखना और दिखाना....बाकी जीवन में क्या है? कुछ नहीं.
    Sanjeet Tripathi said...
    काश…………………
    बाल किशन said...
    क्या कहें बड़े लोगों की बड़ी बातें.
    अपन तो समझ नही पाते इनका चक्कर.
    रवीन्द्र प्रभात said...
    कहा गया है कि बड़े ढोल में बड़ी पोल होती है , लोग अपने खोखले आदर्शों को जिंदा रखने की प्रवृति का परित्याग करने से कतराते रहते हैं फलत: ऐसी स्थिति उत्पन्न होती रहती है .शिव कुमार जी ने ठीक ही कहा है कि दिखना और दिखाना....बाकी जीवन में क्या है? कुछ नहीं.
    Divine India said...
    शीर्षक पढ़कर ऐसा लगा कि आप दिल्ली के एक होटल की बात कर रही हैं पर आया तो यह क्या………
    लेकिन यह मैं बताना चाहूँगा कि नैतिकता हम सब के लिए ठीक है पर… अगर बिल्ली चूहों से दोस्ती कर लेगी तो खायेगी क्या… वह इसी कारण मुकेश अंबानी है…।
    rajivtaneja said...
    बडे लोगों की बडी बातें...
    ये गांव खत्म करने की बात करते हैं और आप इनके द्वारा गांवो को गोद लेने की बात कर रही हैँ...

    कितना अच्छा हो अगर ये मुझे ही गोद ले लें तो....
    Gyandutt Pandey said...
    ठीक है जी, जिसके पास है, वही तो दिखायेगा! और माल्या तो धनजगत का राखी सावंत है!
    कंचन सिंह चौहान said...
    इस समस्या का समाधान नही है।
    अतुल श्रीवास्तव said...
    अगर मुकेश अम्बानी ने अपनी पत्नी को एयर बस दी तो मैंने भी बसें दी. पत्नी से कहा, "दिल में प्यार है बस (1). बस (2) इसी से काम चला लो. बस (3) और कुछ नहीं कहना है." वैसे ये उनका पैसा है - वो चाहे कुछ भी करें.

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