जीते है जिसके लिए

सोनी टी.वी.पर जीते है .... ये सीरियल अभी हाल ही मे शुरू हुआ है पर अच्छा चल रहा है अभी तक तो कहानी ने मजबूत पकड़ बना रख्खी है और एक्टिंग भी सभी अच्छी कर रहे है अब देखना ये है कि ये आगे कैसा मोड़ लेता है।

आज कल बेटियों का जमाना चल रहा है हर चैनल पर बेटी प्रधान सीरियल आ रहे है देख कर अच्छा लगता है ,हांलाकि ज़ि के बेटियां घर कि लक्ष्मि और स्टार वन के बेटियां अपनी या पराया धन दोनो सीरियल मे पिता अपनी बेटियों के साथ काफी कडा व्यवहार करते है और दोनो सीरियल मे बेटे अपनी मनमानी करते है जिसे वो अनदेखा करते रहते है।यूं तो आज ज़माना काफी आगे बढ़ गया है पर अभी भी हमारे भारत मे बेटी को अभिशाप माना जाता है जब कि अगर देखा जाये तो आज हर ऊंचे पद पर महिलाये है.पर हमारे समाज मे आज भी बेटे को ही अहमियत दी जाती है भले वो नालायक ही क्यूं ना हो ।हम ४ बहने है और एक भाई पर हमारे घर मे इस तरह का व्यवहार हमारे पापा ने कभी नही किया। हमारे पापा तो हम लोगो को उस ज़माने मे यानी आज से ३० -४० साल पहले पिक्चर दिखने ले जाते थे जिस समय ये सब लड़कियों के लिए बुरा माना जाता था। उन्हों ने कभी भी हम चारो बेटियों से इतनी दूरी नही रख्खी जैसी कि आज के ज़माने के टी. वी. सीरियल मे दिखाते है जब कि आज जमाना बदल गया है।
कल एक अखबार मे खबर छपी थी कि अक्तूबर मे एक् माँ -बाप ने अपनी ४ दिन कि बच्ची को मार कर एक पेड के नीचे दफना दिया था पर बच्ची के मामा ने ही पुलिस मे रिपोर्ट लिखाई और आज उसके अवशेष मिले है। ये कोरी मानसिकता नही तो और क्या है। ऐसे लोगो को कड़ी सजा मिलनी चाहिऐ।

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