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कब तक इसी तरह अजन्मी बच्चियों को मारते रहेंगे ?

कल न्यूज़ मे देखा कि किस तरह अहमदाबाद मे १५ कन्या भ्रूण कचरे मे मिले।जो बहुत ही शर्मनाक और दुखद है कि आखिर इतनी सारी अजन्मी बच्चियों को मारने से उन माँ-बाप और डॉक्टर को क्या मिला। कितने अफ़सोस कि बात है कि एक तरफ तो देश मे लड़कियों को आगे बढाने की बात की जाती है तो वहीँ दूसरी ओर इस निर्ममता से कन्याओं की हत्या की जाती है। ऐसे डॉक्टर जो इस तरह के जघन्य अपराध करते है और जिनके लिए पैसा ही सब कुछ होता है उनसे तो उनकी मेडिकल की डिग्री वापिस ले लेनी चाहिए । डॉक्टर जिन्हें भगवान का रूप माना जाता है वही हत्यारे बन जाते है ।जबकि उन्हें डॉक्टर बनने पर शपथ भी दिलाई जाती है कि वो कभी भी कुछ गलत काम नहीं करेंगे । पर रुपया कमाने की लालच मे वो सब कुछ भूल जाते है । ऐसे डॉक्टर जिनकी अपनी बेटी भी होती होंगी क्या एक क्षण के लिए भी उनका दिल उन्हें धिक्कारता नहीं है ऐसा करने के लिए। इतनी अजन्मी बच्चियों को मारने से मिला रुपया-पैसा कैसे उन्हें फलता-फूलता है। ८० के दशक मे एक बंगाली फ़िल्म देखी थी कन्या भ्रूण पर आधारित ,और तब लगा था कि लोग किस तरह की मानसिकता के साथ जीते है जहाँ बेटी का जन्म अभ...

अब इसमें यू.पी.बिहार वाली क्या बात है ?

अरुणाचल प्रदेश मे ज्यादातर बैंक के ए. टी.एम. मे अलग लाईन जैसा कुछ system है शुरू मे ये हमें पता नहीं था। अब वैसे ए.टी.एम मे महिला और पुरुष की अलग लाईन का कोई तुक तो नहीं बनता है ।और कहीं ऐसा देखा भी नहीं था। यहां ए.टी.एम मे कोई भी गेट के बाहर नहीं इंतज़ार करता है बल्कि सभी लोग अन्दर लाईन लगा कर खड़े रहते है ।बिलकुल एक के पीछे एक इतना पास-पास खड़े रहते है कि एक दूसरे का पिन नंबर भी देख सकते है। ये जरुर हमारे पतिदेव ने बताया था। वैसे ए.टी.एम.के बाहर लिखा भी रहता है तो भी हर कोई अन्दर आ जाता है । खैर ये जनवरी की बात है जब हम नए-नए थे, एक दिन हम एक बैंक के ए.टी.एम. मे पैसे निकालने गए और चूँकि वहां ३-४ लड़के अन्दर खड़े थे इसलिए हम शराफत मे गेट पर खड़े होकर अपने नंबर का इंतज़ार करने लगे । ए . टी . एम के अन्दर एक महिला भी थी जो कभी ए . टी . एम . मशीन के पास जाती और कभी वापिस गेट पर आती । हम समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर माजरा क्या है । फिर उसने हमसे पूछा कि क्या हम उसकी पैसे निकालने मे मदद कर देंगे । तो हमने हाँ कह दिया । तब ...

अमिताभ बच्चन को लेकर इतनी नाराजगी क्यों ?

कल से सभी न्यूज़ चैनल यही खबर दिखा रहे है की मुंबई के बांद्रा सी लिंक के उदघाटन मे अमिताभ बच्चन कैसे गए और उन्हें किसने बुलाया । अरे भाई अगर चले भी गए तो ऐसा कौन सा पहाड़ टूट पड़ा। आखिर अमिताभ बच्चन का अपना भी तो कोई वजूद है और फिर उन्हें इस सदी का महानायक भी कहा जाता है। तो अगर सदी के महानायक पुल के उदघाटन मे चले गए तो इसमें कांग्रेस को अपना इतना अपमान क्यूँ महसूस हो रहा है। और फिर जब कांग्रेस के नेता और मंत्री उससे हाथ मिलाने मे जरा भी नहीं सकुचा रहे थे तो फिर बाद मे इस बात से मुकर जाना कि अमिताभ बच्चन को उन्होंने नहीं बुलाया था ,कहाँ की शराफत है। दुनिया भर मे अमिताभ बच्चन को लोग इतना सम्मान देते है पर अपने ही देश मे इस तरह से अपमान होना ,कहाँ तक सही है।

कामाख्या मंदिर

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अब जब से हम अरुणाचल आये है तो अरुणाचल आने के लिए हमेशा गुवाहाटी से ही आते है और कामख्या देवी का मंदिर गुवाहाटी मे स्थित है । अरुणाचल आने के पहले ये जानते तो थे कि कामख्या मंदिर आसाम मे है पर देवी के दर्शन होंगे या नहीं ये पता नहीं था क्यूंकि आसाम की तरफ आना हुआ ही नहीं था । और मंदिर गुवाहाटी मे है ये पता भी नहीं था । पर वो कहते है ना की जब बुलावा आता है तो अपने आप सब कुछ हो जाता है । और देखिये अब हम अरुणाचल ही आ गए । :) तो कुछ दिन पहले जब हम गुवाहाटी गए तो कामाख्या मंदिर भी देखने गए । हम लोगों के गेस्ट हाउस जो की एअरपोर्ट के पास है वहां से इस मंदिर की दूरी क़रीब १० की . मी ...

ये कैसा डर है मुलायम सिंह को ?

शायद आप लोगों ने भी पढ़ा होगा की समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह को ये डर है की महिला आरक्षण देश को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है । यही नहीं मुलायम सिंह का तो ये तक सोचना है की महिला आरक्षण के कुछ साल बाद संसद सिर्फ महिला सांसदों की होगी । अभी मुलायम सिंह को काफी चिंता हो रही है की ३३ प्रतिशत आरक्षण के बाद संसद मे महिलाओं की संख्या हर चुनाव के बाद बढती जायेगी। और तो और उनका ये तक सोचना है कि देश का भविष्य क्या होगा जब देश inexperienced महिलाओं के हाथ मे होगा । और अनुभव तो तभी होगा ना जब वो संसद तक पहुंचेंगी । पर मुलायम सिंह जी शायद भूल रहे है कि आज देश के कई मुख्य पदों पर महिलायें ही काम कर रही है। फिर वो चाहे राष्ट्रपति का पद हो या फिर लोक सभा के स्पीकर का पद हो या चाहे विदेश सचिव का पद हो। या चाहे किसी प्राइवेट कम्पनी के उच्च पद या फिर बैंक के उच्च पद पर काम करने वाली महिला ही है। और जहाँ पक्ष और विपक्ष की नेता भी महिला ही है । और फिर ये महिलायें उन सांसदों से तो बेहतर ही होंगी जो बन्दूक और नोट के जोर पर वोट हासिल करके संसद...

ससुराल गेंदा फूल

ये नाम है स्टार प्लस पर आने वाले एक सीरियल का । और इस सीरियल का जिक्र हम यहां इसलिए कर रहे क्यूंकि ये आम सास-बहू जैसे सीरियल जैसा नहीं है बल्कि एक सीरियल है जिसे देख कर मुस्कान अपने आप ही आ जाती है। और हमें ये सीरियल बहुत पसंद आ रहा है तो बस इसलिए लिख रहे है। जिस तरह की सास और ससुराल हर चैनल पर दिखाई जाती है जहाँ हर सास और ननद सिर्फ बहू को सताने और तंग करने के अलावा कुछ नहीं करती है । और जहाँ joint family होते हुए भी सब अलग-अलग रहते है और परिवार का हर सदस्य एक दूसरे के खिलाफ साजिश करता रहता है। वहीँ इस सीरियल मे जो joint family दिखाई गयी है उसे देख कर लगता है कि हाँ ये एक परिवार है जहाँ लोग एक दूसरे की ख़ुशी मे खुश और दुःख मे दुखी होते है। और हाँ अभी तक जितना देखा है उसमे परिवार का कोई भी सदस्य किसी के खिलाफ साजिश नहीं करता है। और सास-बहू मे भी हर समय एक -दूसरे को परेशान करने की होड़ नहीं लगी रहती है। :) इसमें जो कलाकार है उनमे कुछ तो जाने-माने टी-वी कलाकार है और कुछ नए कलाकार भी है । और सभी अच्छी एक्टिंग कर रहे है । इसलिए भी इसे देखने मे मजा आता है। वैसे इस सीरियल को देख कर क...

मायावती को पहनाई गयी लाखों करोड़ों की माला

आज कल राजनीति मे इतनी ज्यादा शो बाजी शुरू हो गयी है जिन्हें देख कर लगता है कि १५-२० साल पहले राजनैतिक पार्टियाँ भला कैसे अपना अधिवेशन या स्थापना दिवस मनाया करती थी। हो सकता है पहले ये खर्च हजारों मे होता रहा होगा । पर अब तो करोड़ों खर्च कर दिए जाते है सिर्फ दिखावे के लिए । और वो भी जनता का पैसा ही होगा । जिसे इस बेदर्दी से खर्च किया जाता है। बी.एस.पी.के २५ साल होने की ख़ुशी मे मायावती और उनकी पार्टी ने २०० करोड़ तो यूँ ही उड़ा दिए । और सोने पे सुहागा की मायावती के कर्नाटक के समर्थक या so called fans ने उन्हें एक हजार के नोटों की माला पहनाई ।और वो भी किसलिए सिर्फ दिखावे के लिए । और उस माला मे तकरीबन ५ करोड़ के नोट लगे हुए थे। २०० करोड़ मे से अगर कुछ करोड़ भी सड़क निर्माण और उत्तर प्रदेश के विकास मे लगाए गए होते तो यू.पी. का उद्धार हो जाता । पर भला ऐसा हों जाए तो यू.पी.क्या सारे देश से गरीबी का नामों निशान मिट जाएगा।पर भला देश के नेता ऐसा क्यूँ चाहेंगे क्यूंकि अगर ऐसा हो गया तो भला वो नोट देकर वोट कैसे लेंगे।